अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?
जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.
अब तो सोंचने-विचारने का समय मिल गया है.
अगर जीवन चाहिये,
तब धरा और प्रकृति का सम्मान करना होगा.
हमें इसकी ज़रूरत है.
यह तो हमारे बिना भी पूर्ण है.

अफ़सोस क्यों, अगर आज क़ैद में है ज़िंदगी?
जब आज़ाद थे तब तो विचारा नहीं.
अब तो सोंचने-विचारने का समय मिल गया है.
अगर जीवन चाहिये,
तब धरा और प्रकृति का सम्मान करना होगा.
हमें इसकी ज़रूरत है.
यह तो हमारे बिना भी पूर्ण है.

Earth Day is an annual event celebrated around the world on April 22 to demonstrate support for environmental protection. First celebrated in 1970, it now includes events coordinated globally by the Earth Day Network in more than 193 countries.
― Rob Kozak, Finding Fatherhood
जीवन प्रवाह में बहते-बहते आ गये यहाँ तक।
माना, बहते जाना जरुरी है।
परिवर्तन जीवन का नियम है।
पर जब धार के विपरीत,
कुछ गमगीन, तीखा मोङ आ जाये,
किनारों अौर चट्टानोँ से टकाराने लगें,
जलप्रवाह, बहते आँसुअों से मटमैला हो चले,
तब?
तब भी,
जीवन प्रवाह का अनुसरण करो।
यही है जिंदगी।
प्रवाह के साथ बहते चलो।
अनुगच्छतु प्रवाह ।।
― Nanette Mathews
संगेमरमर से पूछो तराशे जाने का दर्द कैसा होता है.
सुंदर द्वार, चौखटों और झरोखों में बदल गई,
साधारण लकड़ी से पूछो काटे जाने और नक़्क़ाशी का दर्द.
सुंदर-खरे गहनों से पूछो तपन क्या है?
चंदन से पूछो पत्थर पर रगड़े-घिसे जाने की कसक,
कुन्दन से पूछो आग की तपिश और जलन कैसी होती है.
हिना से पूछो पिसे जाने का दर्द.
कठोर पत्थरों से बनी, सांचे में ढली मंदिर की मूर्तियां से पूछो चोट क्या है.
तब समझ आएगा,
तप कर, चोट खा कर हीं निखरे हैं ये सब!
हर चोट जीना सिखाती है हमें.
अौर बार-बार ज़िंदगी परखती है हमें।
Rumi ❤
Mahatma Gandhi
Image courtesy – Aneesh
My friends, our challenge today is not to save Western civilization – or Eastern, for that matter. All civilization is at stake, and we can save it only if all peoples join together in the task.

Kofi Annan
Marie Curie
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