क्या फ़र्क़ है पड़ता (International Day of Older Persons -1 October)

उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,

क्या फ़र्क़ है पड़ता?

उजालों का भी समय है ढलता।

सूरज भी है ढलता।

बस ज़िंदगी ख़ूबसूरत

और हो सुकून भरी।

यही है कामना।

उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,

क्या फ़र्क़ है पड़ता?

The UN is marking IDOP by encouraging

countries to draw attention to and

challenge negative stereotypes and

misconceptions about older persons

and ageing, and to enable older persons

to realize their potential.

2022 Theme:Resilience of Older Persons

in a Changing World

रूह-ए-दुर्गा (शुभ नवरात्रि)

नारी के झुकने, झुक कर उठने,

झुकी नज़रों को उठाने की अदा में

दिखती है कायनात की ख़ूबसूरती।

पर नहीं दिखता रूह-ए-दुर्गा ।

क्यों दिखता है सिर्फ़ हुस्न औ जिस्म?

कुछ लोगों की तस्वीर नहीं फ़क़त फ़्रेम

देखने की अजब है आदत।

औरत को तवायफ़….नगरवधु

बनाने की परम्परा जाती नहीं

कि नज़र आते नहीं तवायफ़ को

वधू बनाने वाले।

बदन पे गिरवी निगाहों से आगे देख,

उसका वजूद नज़र आएगा।

NEWS Ankita Bhandari Murder Case –

Main kya 10k mein bik jaungi’: Ankita

told her friend in WhatsApp chat.

ख़्वाबों की दुनिया World Dream Day Sep 25th

नींद और ख़्वाबों की दुनिया

है तिलस्म सी रहस्यों भरी।

झिलमिलाते आधे-अधूरे-पूरे ख़्वाब,

सिर्फ़ स्याह रातों की नींद में नहीं,

जागती आँखों में भी रंग हैं भरते।

ज़िंदगी की दौड़ ख़्वाब और

उसकी ताबीर की है कहानी।

उन्हें बुनने-ख़रीदने-बेचने में

बीत जाती है ज़िंदगानी।

The World Dream Day is a strong reminder of our ability to recognize our strength and make positive change in our lives and in the world. The theme for celebrating World Dream Day 2022 will be “The Higher Dream”.

अमन और शांति (The International Day of Peace 21 September)

कुछ आवाज़ें दिल-औ-दिमाग़ को

हैं देतीं शांति और सुकून,

जैसे दूर मंदिरों में टुनटुनाती घंटियाँ

या कहीं बज रहा हो शांत, धीर-गंभीर शंख।

लहजा मानो, हलकी से आ रही हो

ख़ुश्बू या आरती की आवाज़ें।

जैसे ये कहतीं हैं गले लगा लो,

मीठी बोली की बहती कलकल-छलछल

चंचल बहते पानी को।

अमन और शांति की बहा दो निर्झर।

The International Day of Peace (or World Peace Day) celebrated annually on September 21 is devoted to strengthening the ideals of peace, both within and among all nations and peoples.

ज़िंदगी की जंग (World Suicide Prevention Day observed on 10th September)

इससे तो अच्छा पाषाण युग रहा होगा।

जब जंग भूख व जीवन के लिए होता होगा।

जब अस्मत के जिम्मेदार वस्त्र नहीं होते होंगे।

ग्लैमर का नापतौल कपड़ों से नहीं होता होगा।

कपड़ों पर छींटाकशी की सियासत नहीं होती होगी।

काश जंग देश के किसी गम्भीर मुद्दे पर होता।

“सादा जीवन उच्च विचार” के ज्ञान पर होता।

विचार होता, लोग ज़िंदगी की जंग हार क्यों जातें हैं?

News – BJP still hanging in T-shirts and

khaki shorts: Bhupesh Baghel retorts

on ‘Rs 41k t-shirt’ jibe on Rahul Gandhi

World Suicide Prevention Day observed on 10th September.

अरण्य

ना जाने कितने जंगल,

शहर बन गए ईंटों-कंक्रीटों से।

जहाँ सहमें हुए इंसाँ को

ख़ौफ़ हैं इंसानी दरिंदों से।

अरण्य के दरख़्त कभी हुआ करते थे

ख़्वाबों के दरख़्त

औ आशयाँ वनचरों के।

अब ये जानवर कहाँ जायें?

#NationalWildlifeDay

National Wildlife Day on September 4th

encourages improved awareness of the

species around us and in the broader world.

शुभ गणेश चतुर्थी ! Happy Ganesh Chaturthi !

ना तो हम किसी से बंधे हैं ना कोई हमसे।

फिर भी पाने-खोने, जैसी मृगतृष्णा क्यों?

ना किसी के साथ आए ना साथ जाना।

फिर भी अपना-पराया के

सराब / मरीचिका में भटकते हैं क्यों ?

माया-मोह में उलझी यह दुनिया

है कोई जादू, भ्रम या नशा शराब का?

माया मोहिनी, जैसे मीठी खांर
सदगुरु की कृपा भैयी, नाटेर करती भांर।

– कबीर

कबीर कहते है की समस्त माया और भ्रम चीनी के मिठास की तरह आकर्षक होती है।प्रभु की कृपा है की उसने मुझे बरबाद होने से बचा लिया।

Kabir says illusions are attractive like sweet sugar I am blessed by the God, otherwise it would have ruined me.

प्रकृति

https://www.firstpost.com/india/chiles-atacama-desert-said-to-be-worlds-driest-place-turns-into-valley-of-flowers-11101401.html/amp

तलाश अपनी

तलाश थी अपनी, ढूँढते रहे

दहर…दुनिया के ज़र्रे-ज़र्रे में।

दिल के अंदर से आई आवाज़,

कस्तूरी मृग ना बन,

जो अपनी ही ख़ुशबू खोजता रहता है बाहर।

झाँक अपने अंदर।

हृदय के अंदर, रिक्त आकाश में है

असल तू, तेरा दहर ( शिव या ब्रह्म अंश)।

गुफ़्तगू कर उससे।

आईने सा नज़र आएगा अक्स तेरा।

चिदानंद रूपः शिवोहम शिवोहम!

शब्दार्थ- दहर- दुनिया, दहर – शिव या ब्रह्म अंश

शुभ शिवरात्रि !

Happy Shivratri – I am not the ether, nor the earth, nor the fire, nor the wind (the five elements). I am indeed, That eternal knowing and bliss, the auspicious (Shivam), love and pure consciousness.