आज के दधीचि

Thousands of bodies were left to decay in unsanitary conditions at The Centre for Body Donations at Paris-Descartes University, reports say.

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इन्सान की क़ीमत इतनी कम क्यों है?

युगों-युगों चले आ रहे रस्मों-रिवाजों को बदल

अपने शरीर का दान करना सरल नहीं होगा.

जन कल्याण के लिए बॉडी डोनेशन करने वाले

इन दधीचियों का ऐसा हश्र ?

इन्सान की क़ीमत इतनी कम क्यों है?

जीवन में और जीवन के बाद भी?

किवदंति – दधीचि ने अपने शरीर / अस्थियों का दान,  इन्द्र के अनुरोध पर,  लोक कल्याण के लिये किया था। क्योंकि ब्रह्म तेज़, महर्षि दधीचि के हड्डियों से बने वज्र से राक्षस  वृत्रासुर का संहार संभव था।

Brain-eating amoeba

Naegleria fowleri, colloquially known as the “brain-eating amoeba“, is a species of the genusNaegleria, belonging to the phylumPercolozoa, which is technically not classified as true amoeba, but a shapeshifting amoeboflagellate excavate. It is a free-living, bacteria-eating microorganism that can be pathogenic, causing an extremely rare fulminant (sudden and severe) and fatal brain infection called naegleriasis, also known as primary amoebic meningoencephalitis.

 

NEWS – Brain-eating amoeba: Warning issued in Florida after rare infection case

 

Information courtesy – wikipedia.

गुवाहाटी अक्षर स्कूल – बेकार प्लास्टिक के बदले पढ़ाई

Gauhati Akasher school takes plastic waste as school fee. Students Study, teach, earn, recycle the waste and protects environment .

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गुवाहाटी का एक नायाब स्कूल अद्भुत  काम कर रहा है। यहाँ अक्षर स्कूल प्लास्टिक के कचरे को स्कूल फीस के रूप में लेता है अौर बच्चों से  प्लास्टिक नहीं जलाने का संकल्प  करवाता है। स्कूल के छात्र न केवल किताबों से भरे बैग लेकर आते हैं, बल्कि वे स्कूल फीस के रूप में पॉलिथीन से भरे प्लास्टिक भी लाते हैं। इस प्लास्टिक से रचनात्मक कार्य करवाया जाता है।

साथ हीं  अक्षर स्कूल में पढ़ने वाले बड़े बच्चों को वहाँ के छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए  भी प्रशिक्षित किया जाता है। इसके लिए उन्हें धन भी दिया जाता है। जिससे उन्हें स्कूल न छोड़ने का  प्रोत्साहन  मिलता है। माजिन मुख्तार और परमिता सरमा ने 2016 में समाज के दलित वर्ग की मदद करने और प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से स्कूल खोला था।

 

Happy World Environment Day-June 5, 2020

Lunar Eclipse /Chandra Grahan -11:15 pm 5th June 2020.

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It is celebrated on 5 June in over 100 countries. The theme for World Environment Day 2020  is “Bio Diversity”, and will be hosted in Colombia in partnership with Germany.

यह 5 जून को 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस 2020 का थीम /विषय है – जैव विविधता , जिसे कोलंबिया में मनाया जाएगाऔर जर्मनी के साथ साझेदारी में। इसे हर साल पर्यावरण के प्रति लोगों में जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है।

नासमझ या सोसियोपैथ

क्या यह सोंच उचित है – यह सिर्फ एक जानवर है, इसलिए क्यों परवाह करना? क्या ऐसे क्रूर प्रवृत्ति के लोगों को कठोर सजा नहीं मिलनी चाहिये?

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जो व्यक्ति दूसरों के दर्द या तकलीफ को नहीं समझता है। या तो वह  व्यक्ति  सामान्य आई क्यू का नहीं है या  सोसियोपैथ / Sociopath है। जानवरों के प्रति क्रूरता दो बातों की अभिव्यक्ति है – कमजोर और छोटे प्राणियों पर नियंत्रण रखने की इच्छा और परपीङा या दूसरों को दर्द देने  की प्रवृत्ति।  

 

World No Tobacco Day: The positive effects of quitting smoking.

World No Tobacco Day (WNTD) is observed around the world every year on 31 May. This yearly celebration informs the public on the dangers of using tobacco, the business practices of tobacco companies, what the World Health Organization (WHO) is doing to fight the tobacco epidemic, and what people around the world can do to claim their right to health and healthy living and to protect future generations.  

लॉकडाउन जेनरेशन या पीढ़ी Lockdown generation

Lockdown generation’ of young workers will need extra help after COVID-19. Young women worst affected.

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युवा श्रमिकों की लॉकडाउन पीढ़ी – एक नए अध्ययन के अनुसार, पूरे विश्व में युवा कामागारों, अौर  नौकरी करने वालों  पर COVID -19 का बेहद खराब असर पङा है। पाया गया है कि युवा महिलाएँ ज्यादा प्रभावित हुई हैं। छह में से एक से अधिक युवाओं ने महामारी की शुरुआत के बाद से काम करना बंद कर दिया है।

 इस शोध के अनुसार, लॉकडाउन पीढ़ी को अतिरिक्त मदद की आवश्यकता होगी।

अगर  उनकी स्थिति में सुधार के लिए  तत्काल कार्रवाई नहीं की गई। तब इसका  खामियाज़ा  दशकों  तक झेलना पङ सकता है। यह  पोस्ट-कोविङ अर्थव्यवस्था को  भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा।

 

 

 

माँ या मानवता !!

उस दिन मौत किसकी हुई ?

माँ की ?

या मानवता की ?

या दोनों की ??

क्यों कोई नहीं  आया उसे गोद में उठाने ?

 

Menstrual Hygiene Day, May 28

Menstrual Hygiene Day (MHD, MH Day in short) is an annual awareness day on May 28 to highlight the importance of good menstrual hygiene management (MHM). It was initiated by the German-based NGO WASH Unitedin 2014 and aims to benefit women and girls worldwide. The 28th was selected to acknowledge that 28 days is the average length of the menstrual cycle.

Courtesy – Wikipedia

कोविड-19

बात  बड़ी महत्वपूर्ण है। दुनिया है तो बीमारियां होंगी ही और वायरस भी होंगे । पहले भी चीन से  कुछ इंफेक्शन फैले हैं – 2002 में सार्स,  h7 n9 आदि।  पर   कोरोना या कोविड-19 सबसे भयंकर है।  यदि चमगादड़ों की समस्या इतनी गंभीर थी कि 2005 से उस पर शोध  चल रहे थे। इसके लिए बैटवुमैन जैसे शब्द चर्चे में थे। तब क्या समय रहते चेतावनी और रोकथाम या अन्य देशों से मदद लेने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए था? शायद लाखों लोगों की जानें बच जातीं।

China’s bat woman  warns coronavirus is just the tip of the iceberg

Shi Zhengli, a virologist renowned for her work on coronavirus in bats, emphasized on the need for studying viruses among wild animals in advance to prevent another pandemic. BLOOMBERG NEWS25 May, 2020 9:44 pm IST