इनायत

इनायत

अँधेरे पल हो या उजाले,

ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ

हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,

तुम्हारी रज़ा और

इनायत के साये में।

ना किया तुमने

कभी कोई वादा,

पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे

भरोसे का वो रिश्ता है

कि तुमने कभी

निराश नहीं किया।

मंज़िल

मंज़िल

यक़ीं करो अपने आप पर।

और नज़र रखो मंज़िल पर।

इस दुनिया में इतना

है टोका-टोकी।

ग़र लोगों की बातें

सुनते रहे,

मंज़िल तक नहीं

पहुँच पाएँगे कभी।

चुभन

दे कर चुभन और

हाल पूछते हैं।

ना मिलने पर

सवाल पूछतें हैं।

कुरेदतें हैं,

ज़ख्मों को

मलहम के बहाने।

उन लोगों का

क्या किया जाए?

शीश महल

शीशमहल

कौन खोजता हैं दूसरों में

कमियाँ हीं कमियाँ ?

उसमें अपने आप को

ढूँढने वाले।

यह शीश महल

देखने जैसा है।

जिधर देखो अपना हीं

अक्स और परछाइयाँ

देख ख़ुश हो

लेते है ये लोग।

सूर्यग्रहण- अमावस्या, मार्गशीर्ष माह

क्या आप जानते है? जिस महीने की पूर्णिमा तिथि को जो नक्षत्र पड़ता है, उस नक्षत्र के नाम पर उस महीने का नाम होता है। मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा के दिन मृगशिरा नक्षत्र होता है। इसलिए इसे मार्गशीर्ष माह कहा जाता है। इसे मगसर, मंगसिर, अगहन, अग्रहायण नाम से भी जाना जाता है।

विज्ञान ने चंद्र और सूर्य ग्रहणों के डेट/ तिथि कुछ सौ सालों से बताना शुरू किया है। जब कि हमारे पंचांग हज़ारों वर्ष से इनकी सटीक भविष्यवाणी करते आ रहें है। महाभारत युद्ध के दौरान वर्णित ग्रहण आज सच पाए गए हैं। 4 दिसंबर या मार्गशीर्ष अमावस्या या शनैश्चरी अमावस्या, साल का आखिरी सूर्यग्रहण (Solar Eclipse) है।

On Saturday, Dec. 4, 2021, some people in the Southern Hemisphere will have the chance to experience a total or partial eclipse of the Sun.

कद्र

कद्र

किसी के लिए सब कुछ

दिल से करो ।

फिर भी तुम्हारे वजूद

का मोल ना हो।

कद्र न हो तुम्हारी।

तब दूरियाँ हीं

समझदारी है।

लोग

लोग

ज़िंदगी की राहों में

लोगों को आने दो

….. जाने दो।

सिर्फ़ उनसे मिले

सबक़ अपना लो।

राहों में मिले टेढ़े-मेढ़े

लोग सीधे चलने की

सबक़ औ समझ दे जाएँगे।

सोना या कुंदन

कुंदन

ज़िंदगी के इम्तहानों में

तप कर सोना बने,

कुंदन हुए या

हुए ख़ाक।

यह तो मालूम नहीं।

पर अब महफ़िलें

उलझतीं नहीं।

बेकार की बातें

रुलातीं नहीं।

ना अपनी ख़ुशियाँ

कहीं और ढूँढते हैं ,

ना देते है किसी

को सफ़ाई ।

हल्की सी

मुस्कान के साथ,

अपनी ख़ुशियों पर

यक़ीं करना सीख रहें हैं।

ख़्वाब

ख़्वाब और तितलियाँ

रात के आँचल में,

कई ख़्वाब रंग-बिरंगी

तितलियों से आतें हैं।

बंद आँखों में

खेल जातें हैं।

हाथ बढ़ाते,

आँखें खुलते,

कुछ अधूरी यादें

छोड़ जातें है।

जैसे तितलियों को

पकड़ने की कोशिश में,

उनके परों के कुछ

रंग अंगुलियों पर

छूट जातें हैं।

संगेमरमर

संगमरमर

संगमरमर को तराश,

अनचाहे पाषाण को

काट-छाँट, हटा कर हीं

निखरती है सुंदर

अनमोल कलाकृति।

ज़िंदगी को तराशने के

लिए कभी छाँटना पड़े

अनचाहे लोगों को,

तो ग़लत है क्या?