तेरी मेरी कहानी

बँटवारा हो तब

ख़ुशियाँ तुम रख लो,

ग़म मेरे पास रहने दो।

अपने हिस्से की ख़ुशियाँ हम

ख़ुद रचेंगे, ख़ुद कमाएँगे।

अभी थोड़ी ख़ुशियाँ दे दो मुझे भी।

दुनिया को तुमसे मिले विरासत दिखाने के लिए।

चेहरे पर मुस्कान की मास्क लगा दुनिया

के सामने जाने के लिए।

बस इतनी सी है, तेरी मेरी कहानी।

topic by – yourQuote

क्या फ़र्क़ है पड़ता (International Day of Older Persons -1 October)

उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,

क्या फ़र्क़ है पड़ता?

उजालों का भी समय है ढलता।

सूरज भी है ढलता।

बस ज़िंदगी ख़ूबसूरत

और हो सुकून भरी।

यही है कामना।

उम्र-ए-रफ़्ता ना लौटे,

क्या फ़र्क़ है पड़ता?

The UN is marking IDOP by encouraging

countries to draw attention to and

challenge negative stereotypes and

misconceptions about older persons

and ageing, and to enable older persons

to realize their potential.

2022 Theme:Resilience of Older Persons

in a Changing World

रात की आग़ोश में

ज़द्दोजहद में ज़िंदगी के,

थके, बेचैन दिन,

कट जाते है निशा के इंतज़ार में।

आ कर गुज़र जाती है रात भी,

किसी याद में।

रात की आग़ोश में,

थक कर सो जाते हैं ख़्वाब।

जागते रह जातें है

चराग़ और महताब…..चाँद।

जारी रहती है सफ़र-ए- ज़िंदगी।

जुस्तजू

जुस्तुजू

उलझी बातें, उलझी चालें।

दूसरों को गिराने के ख़्याल।

ईश्वर की अजीब मख़्लूक़… रचना है इंसान।

यह सब करके भी है जुस्तुजू

पाने के सीधे -सच्चे मख़्लूक़-ए-ख़ुदा…इंसान।

जो दुनिया को दोगे, वही मिलेगा।

क्यों नहीं आता ऐसा ख़्याल।

रूह-ए-दुर्गा (शुभ नवरात्रि)

नारी के झुकने, झुक कर उठने,

झुकी नज़रों को उठाने की अदा में

दिखती है कायनात की ख़ूबसूरती।

पर नहीं दिखता रूह-ए-दुर्गा ।

क्यों दिखता है सिर्फ़ हुस्न औ जिस्म?

कुछ लोगों की तस्वीर नहीं फ़क़त फ़्रेम

देखने की अजब है आदत।

औरत को तवायफ़….नगरवधु

बनाने की परम्परा जाती नहीं

कि नज़र आते नहीं तवायफ़ को

वधू बनाने वाले।

बदन पे गिरवी निगाहों से आगे देख,

उसका वजूद नज़र आएगा।

NEWS Ankita Bhandari Murder Case –

Main kya 10k mein bik jaungi’: Ankita

told her friend in WhatsApp chat.

ख़्वाबों की दुनिया World Dream Day Sep 25th

नींद और ख़्वाबों की दुनिया

है तिलस्म सी रहस्यों भरी।

झिलमिलाते आधे-अधूरे-पूरे ख़्वाब,

सिर्फ़ स्याह रातों की नींद में नहीं,

जागती आँखों में भी रंग हैं भरते।

ज़िंदगी की दौड़ ख़्वाब और

उसकी ताबीर की है कहानी।

उन्हें बुनने-ख़रीदने-बेचने में

बीत जाती है ज़िंदगानी।

The World Dream Day is a strong reminder of our ability to recognize our strength and make positive change in our lives and in the world. The theme for celebrating World Dream Day 2022 will be “The Higher Dream”.

अलफ़ाज़ बेमानी

चटख़ कर बिना शोर टूटते हैं दिल।

यक़ीन और विश्वास बेआवाज़ टूटते है।

तय है, खामोशी में भी है शोर।

ग़र सुन सके, तो हैं अलफ़ाज़ बेमानी।

कहने वाले कहते हैं –

खामोशी होती है बेआवाज़ …. शांत।

खामोशी की है अपनी धुन

सुन सके तो सुन।