ख़्वाबों की दुनिया World Dream Day Sep 25th

नींद और ख़्वाबों की दुनिया

है तिलस्म सी रहस्यों भरी।

झिलमिलाते आधे-अधूरे-पूरे ख़्वाब,

सिर्फ़ स्याह रातों की नींद में नहीं,

जागती आँखों में भी रंग हैं भरते।

ज़िंदगी की दौड़ ख़्वाब और

उसकी ताबीर की है कहानी।

उन्हें बुनने-ख़रीदने-बेचने में

बीत जाती है ज़िंदगानी।

The World Dream Day is a strong reminder of our ability to recognize our strength and make positive change in our lives and in the world. The theme for celebrating World Dream Day 2022 will be “The Higher Dream”.

ज़िंदगी एक फ़िल्म है,

जिसका लेखक, डायरेक्टर सब है ऊपरवाला,

और मुख्य पात्र हैं हम।

कब क्या होगा, किसी को नहीं मालूम।

नए नए ट्विस्ट और टर्न के साथ

अग़ल दृश्य हमेशा है एक मिस्ट्री।

दृश्य है बदलते रहते।

बस नहीं रहता

किसी को इस

फ़िल्म के द एंड

या अंत का इंतज़ार।

Topic by YourQuote.

हो ना नाउम्मीद

कभी सब हाथ छूटने लगे,

रिश्ते टूटने लगे।

झड़ते पत्तों सी गिरती-बिखरती लगे ज़िंदगी,

हो ना नाउम्मीद।

हौसला रख।

सब्र कर।

पतझड़ आता हैं।

फिर बहारें भी आएँगी।

तय है कितनी भी लंबी रात हो,

सुबह आएगी।

एहसास !

दिल में दबा दर्द मुस्कुराहटों की ओट में पनाह लेता है।

मुस्कुराहटें आँखों के आँसुओं के नमी

के पीछे लुका-छिपी करती है।

क्यों एहसासों को छुपाने का चलन ज़माना सिखाता है?

दिल पर बोझ बढ़ाना सिखाता है?

वही आँखें, वही मुस्कान जो राज़दार बनती हैं,

वही दर्द-ए-दिल राज़ खोल देतीं हैं।

नासूर नहीं इलाज-ए-दर्द चाहिए।

Psychological Fact – Don’t Bury Your Feelings. Being in touch with your feelings will make you a better person, as well as a better parent and partner. Being true to your emotions can make you feel better about yourself.

कर्म

जब हौसला अफजाई कम

और व्यंग बाण ज़्यादा हो जायें,

मायने बुलंदियाँ क़रीब हैं।

लोगों की निगाहे उठने लगें,

पैर नीचे खिंचने वाले बढ़ जायें,

मायने आसमाँ क़रीब है।

जब दोस्तों से दुश्मन ज़्यादा हो जायें।

लोगों की निगाहों में चढ़ने लगो।

मायने फ़लक के सितारे क़रीब हैं।

बस सब्र रखो, क्योंकि हर किसी के,

कर्म का नतीजा ज़रूर सामने आता है।

रुख़्सत

विदा करने की हो न हो चाहत।

पर रुख़्सत करना पड़ता है।

चाहे गुज़रे किन्ही हालातों से।

चाहे कैफ़ियत कई हो दिल में।

पर आनेवाले को जाने देना पड़ता है।

दुनिया की है यह रीत।

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी !

ना डरो,

जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।

जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।

तभी अंकुर निकलता है,

ऊपर बढ़ने के लिए।

रौशनी से होती है मुलाक़ात।

नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा

दिल बड़ा नाज़ुक होता है।

रिश्ते दिल के भरोसे पर टिके होते है।

उसके टूटने की आवाज़ नहीं होती।

पर भरोसा टूट जाये ,

तो ज़िंदगी के हर पल में,

हर लफ़्ज़ में इस की गूंज शामिल होती है

औ भरोसा करने की आदत छूट जाती है।

ना करो झूठे वादे, ना किसी का ऐतबार तोडो,

ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा।

ये चोट रूह पर निशाँ छोड़ जाता है।

Psychological Fact – Pistanthrophobia is an

enormous fear of trusting people because of

awful past experiences / bad relationship.