मैंने अक्सर देखा है !

होते हैं कुछ लोग

ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।

दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,

बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।

नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।

समय दिखाता है,

इनके असली रंग।

गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,

उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,

जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

सारी कायनात है उसकी!

वह है हर जगह,

फिर भी जाते हैं मंदिरों में

ताकि उसे महसूस कर सकें।

वह है हमारे अंदर,

फिर भी जपते हैं मंत्र

ताकि उसे हर वक्त याद रख सकें।

कितनी गहरी है ये सीखें।

अफ़सोस ग़लतियाँ करने समय

लोग अक्सर भूल जातें है।

सारी कायनात है उसकी,

कि वह हर वक्त देख रहा है हमें।

Psychological Fact – The process of being watched affects our performance positively. (Hawthorne effect)

सूक्ष्म तरंगें! शुभ योग दिवस!

दुनिया सागर है ऊर्जा और तरंगो का। सृष्टि शुरू हुई कम्पन और तरंगों से। हम सब भी सूक्ष्म तरंगें हैं। जिस घड़ी, जिस पल, जिस दिन, ब्रह्मांड और हमारे कंपन….. फ़्रीक्वेंसी का योग हो जाएगा, हम एकसार हो जाएँगे और ब्रह्मांड के अनमोल राज़ों से रूबरू होने लगेंगे। हमारी तरंगे हैं हमारे विचार, हमारे भाव – सकारात्मक या नकारात्मक। प्रेम भर देगा प्रेममय ऊर्जा, नफ़रत भर देगा नकारात्मकता। ग़र बदल लिया दिल, दिमाग़ रूह की सोंच, ब्रह्मांड के मधुर गीत के साथ एकलय हो जाएँगें।

All things in our universe are constantly in motion, vibrating. Even objects that appear to be stationary are in fact vibrating, oscillating, resonating, at various frequencies.

HAPPY YOGA DAY!!

रुख़्सत

विदा करने की हो न हो चाहत।

पर रुख़्सत करना पड़ता है।

चाहे गुज़रे किन्ही हालातों से।

चाहे कैफ़ियत कई हो दिल में।

पर आनेवाले को जाने देना पड़ता है।

दुनिया की है यह रीत।

दुनिया है रंग मंच

सुना था यह दुनिया है इक रंग मंच, हम सब है किरदार।

जीवन यात्रा में अलग-अलग हैं कहानियाँ और दास्तान।

कुछ मुकम्मल कुछ अधूरी।

सब की डोर है ऊपरवाले के हाथों में।

अब पढ़ा ट्रूमैन शो ऐसा वहम है,

जहाँ व्यक्ति अपने जीवन को रिएलिटी शो

का हिस्सा मान भ्रम में जीता है।

क्या हम सब वास्तव में रंग मंच के ऐसे हीं किरदार हैं,

जिन पर कई नज़रें टिकी हैं? …..

……जीपीएस ट्रेकिंग, कैमरे, सीसीटीवी,

ड्रोन, फ़ेसबुक, इंस्टग्राम, व्हाटअप…….

The Truman Show delusion or Truman syndrome, is a type of delusion in which the person believes that their lives are staged reality shows, or that they are being watched on cameras.

(In the film “The Truman Show,” Jim Carrey plays a man who is an unknowing star of a TV show. His life is streamed to an audience at all times).

एक अरसा हो गया ख़ुद से मिले…

हमें मालूम है तुम्हें,

एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।

दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।

उस आईने में,

अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना

तुम्हें अपना व्यवहार

अपना किरदार नज़र आएगा।

#TopicByYourQuote

रेशम सी नाज़ुक

हर रिश्ते के दर्मियान होती है एक डोर।
रेशम सी नाज़ुक विश्वास और भरोसे से बंधी।
राज़, रहस्य, बेवफ़ाई और झूठ आयें बीच में,
तो टूट कर बिखर जाती है।
ग़र बनाने हो या निभाने हों रिश्ते,
एक दूसरे को सब बताओ, सच बताओ।
ग़र सच सहने का ताब ना हो तो मुरझाने दो इन्हें।
रूह की आईनों में देखो, तुम्हें रिश्तों में क्या चाहिए।
वही दो दूसरों को।
वरना ज़िंदगी क़ैद बन जाएगी।

Happy Psychology! Positive Psychology! – Honesty Can Make or Break a Relationship. When you know you can totally trust your mate, it strengthens your love.

बलिदान दिवस, शहीद दिवस, 23 March

शक्ति मद नींद में डूबे अंग्रेज सरकार को,

जगाने की कोशिश में फेंका संदेशमय पर्चे के साथ बम –

“मानव को मारा जा सकता है, उसके विचार को नहीं।

बड़े से बड़े साम्राज्यों का पतन हो जाता है

लेकिन विचार हमेशा जीवित रहते हैं।”

सुप्त, बधिर, क्रूर आंग्ल शासकों को जगाने की कोशिश में

23 मार्च, क्रांतिकारी वीर भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव

सो गए चिर निंद्रा, देश की आज़ादी के लिए।

दिल, दिमाग़ और रूह mind, Body, Soul

दिमाग़ हमेशा तर्क खोजता है क्योंकि दिमाग़ और ईगो साथी हैं।

रूह जो संदेश देता है दिल को, उसे वही भाता है

क्योंकि दिल और रूह साथी हैं।

दिल-औ-दिमाग़ के बीच जंग,

यह है दुनियावी और रूहानियत कश्मकश।

ग़र दिल-दिमाग़-आत्मा एक हो जाएँ।

जीवन का अर्थ दिखने लगेगा।

नज़रों के सामने छाया धुआँ-धुँध छँटने लगेगा।

जीवन यात्रा की लौकिक और आलौकिक राहें नज़र आने लगेंगीं।

Mind-body-soul – struggle of thoughts are actually struggle of spirituality and worldly views.

भटका दिया ज़िंदगी ने मुझे

कुछ पलों के लिए लगा,

भटका दिया ज़िंदगी ने मुझे ।

जब दिल की गहराईयों में झाँक

तब समझ आया।

ज़िंदगी ने नहीं,

जिनसे राहें पूछी थीं,

उन लोगों ने भटका दिया था।

ज़िंदगी ने तो भटके राहों पर,

अँधेरे पलों में भी

कई सबक़ सिखा दिये।

वापस सही राहों पर ला दिया।

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