
असल फ़तह




ज़िंदगी की हर जंग में,
हर महाभारत में आश्वस्त हैं।
क्योंकि जीवन के
हर सैलाब में तुम्हें साथ
ले कर चल रहें हैं।
भरोसा है,
जब तुमने जंग दिया है
तो जय दिलाने सारथी
बन तुम आओगे हीं।

उनसे सच की
क्या उम्मीद करना,
जो ख़ुद से भी झूठ बोलतें हैं?
बड़े सलीक़े से झूठ बोलते हैं।
तय है, हर लफ़्ज़ से, बेख़ौफ़ टपकते झूठ का हुनर ,
मुद्दतों में सीखा होगा।
वे हमें नादाँ कहते हैं।
हैं नादान क्योंकि
हमने भी भरोसा करना ,
यक़ीं करना अरसे
से सीखा है।

इनायत
अँधेरे पल हो या उजाले,
ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ
हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,
तुम्हारी रज़ा और
इनायत के साये में।
ना किया तुमने
कभी कोई वादा,
पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे
भरोसे का वो रिश्ता है
कि तुमने कभी
निराश नहीं किया।

यक़ीन और भरोसा टूटने पर,
अपने ऐतबार पर शर्मिंदा ना हों।
कहते हैं,
बार-बार कोई विश्वास तोड़े,
तब उसे जाने दो।
समझ लो,
यह है ईश्वर का संकेत।
क्योंकि
किसी से खिलवाड़ करने वाले से, नियति है खिलवाड़ करती।
यह है ऊपर वाले का नियम।
झुक कर रिश्ते निभाते-निभाते एक बात समझ आई,
कभी रुक कर सामनेवाले की नज़रें में देखना चाहिये।
उसकी सच्चाई भी परखनी चाहिये।
वरना दिल कभी माफ नहीं करेगा
आँखें बंद कर झुकने अौर भरोसा करने के लिये।
अपनी तो आदत थी
गैरों पर भी यकीन करने की।
अपनों ने हीं सिखा दिया शक करना।
गैरों पर भरोसा किया होता,
तब शायद धोखे कम मिले होते..
समझौता, भोलापन, भरोसा हँस पङे।
बोले हमारे साथ रहने वाले का यही हश्र होता है
पर एक बात है!
हम जिंदगी का आईना अौर दुनिया की असलियत जरुर दिखा देतें हैं।
धोखा- फरेब की परिभाषा खोजने पर,
जवाब मिला, दूर जाने की क्या जरुरत है?
यह तो अक्सर पास वालों से मिलता है।
खरीदने की भी जरुरत नहीं, मुफ्त बँटता रहता है,
बस थोङा भरोसा कर के तो देखो….
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