Do you know about thumb center in the brain and effect of smart phone on it?

new research shows – Smartphones may have altered the shape and function of the human brain.

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 latest study and experts have discovered, that people who use  touchscreen phones on a daily basis have a larger and more powerful somatosensory cortex – the area at the centre of the brain which controls the thumbs.  

In a research Swiss team tracked 37 volunteers over ten days – 27 of them using touchscreen phones, and 11 using traditional mobiles with fixed buttons. During these tests, researchers monitored each user’s brain waves. It is found that Those using touchscreen phones had altered the function of their cortex

 

 

 

कैंसर ट्रेन-क्या आप जानते हैं?

यह एक ट्रेन है. जिसमें, मन में आशा की किरणें अौर लबों पर प्रार्थना जपते रोज सैकड़ों कैंसर रोगी यात्रा करते हैं। यह ट्रेन अबोहर, पंजाब से निकलती है और बीकानेर जाती है। जहाँ राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित कैंसर अस्पताल है। यहाँ आचार्य तुलसी शांति प्रतिष्ठान, एक निजी दान ट्रस्ट द्वारा समर्थित अस्पताल है, जो गरीबों के लिए एकमात्र किफायती विकल्प है।

यहाँ इसे “कैंसर ट्रेन” के रूप में जाना जाता है। यह पंजाब में कैंसर के मामलों में अचानक वृद्धि के कारण हुआ है। माना जा रहा है कि यह कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग के कारण हो रहा है। यह प्रकृति से खेलवाङ करने का जीता-जागता, दुःखद उदाहरण है।

It is a train trip hundreds of cancer patients take for subsidised treatment. The train, which originates from Abohar and goes all the way to Jodhpur, dropping off patients at Bikaner, has come to be known as the “Cancer Train“. This is a train for the poor. It has no air-conditioned coaches. There is a sudden increase in cancer cases in Punjab due to excessive use of pesticide.

गर्भस्थ शिशु की प्रस्तर प्रतिमा

ये गर्भस्थ शिशु की प्रस्तर प्रतिमा कुंददम वादककुनाथ स्वामी मन्दिर की एक दीवाल पर उकेरी हुई है। कल्पना करें X-RAY की खोज से हजार साल पहले ये जानकारी उस समय के लोगों को कैसे मिली होगी।
मन्दिर की दूसरी दीवारों पर भी गर्भस्थ शिशु के हर महीने की पोजिशन की प्रतिमा उकेरी हुई है।
सनातन हिन्दू धर्म दुनिया का सबसे प्राचीन पहला और आखरी वैज्ञानिक धर्म है,इन्होंने ही दुनिया को विज्ञान दिया,दृष्टि दी जीवन जीने की कला दी,सहित्य दिया, संस्कृति दी, विज्ञान दिया, विमान शास्त्र दिया, चिकित्सा शास्त्र दिया, अर्थ शास्त्र दिया.
सनातन धर्म सा धर्म नही दुजा।
सनातन धर्म लाखो वर्षों से वैज्ञानिक अनुसंधान करता आया है, ऋषि मुनियों ने विज्ञान की नींव रखी है, ऋषियों ने अपनी हड्डिया गलाकर दुनिया को विज्ञान ओर अनुसंधान के दर्शन कराए है।
पूरी दुनिया कभी सनातन के ऋषी मुनियो के ऋण से मुक्त नही हो पाएगी इतना दिया है दुनिया को हमारे ऋषि मुनियों ने।
हम उन्हीं वैज्ञानिक ऋषिमुनियों की संतान सनातनी हिन्दू हूँ, इस बात का गर्व है . कुंददम कोयम्बटूर से करीब ८० किलोमीटर की दूरी पर है।

Forwarded

नीलम-पन्ना सा !

ब्रह्मांड में बिन आधार गोल घूमता नीलम-पन्ना सा, नीले जल बिंदु सा, यह पृथ्वी, हमारी धरा, हमारा घर है। यह वह जगह है, जहाँ हम सब जीते-मरते और प्यार करते हैं। यह हमारे अस्तित्व का आधार है। हर व्यक्ति जो कभी था जो कभी है । सभी ने यहीं जीवन जिया। हमारा सुख-दुख, हमारा परिवार, हजारों धर्म, आस्थाएँ, महान और सामान्य लोग, हर रिश्ता , हर प्रकार का जीवन, हर छोटा कण, ब्रह्मांड में बिना सहारे घूमती इस अलौकिक पृथ्वी के रंगभूमि का हिस्सा है।

फिर इसकी उपेक्षा क्यों ? ना जाने कितने महिमामय रजवाड़े, शासकों ने मनमानी की, बिखेरे रक्त की बूंदें। क्या यह उनका यह क्षणिक आत्मा महिमा, एक भ्रम नहीं था? क्या बिन इस धरा के, इस विशाल विश्व के उनका अस्तित्व संभव था?

हमारी विशाल धरा, ब्रह्मांड के अंधकार में जीवन से पुर्ण, नाचती एक मात्र स्थान है। क्या है ऐसी कोई आशा की किरण जो हमें जीवन का आधार दे सके? जो परीक्षा की घड़ी में मददगार हो? आज यह पृथ्वी एकमात्र ज्ञात जीवन से परिपूर्ण दुनिया है। फिर क्या यह अच्छा नहीं है कि हम इसका सम्मान करें? नफरत छोड़कर प्रेम से जिये और जीने दें सभी को?

संगीत सुने अौर खुश रहें

अपने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक स्वंय बने – संगीत खुशी को बढ़ा कर आपके तनाव व चिंता को कम कर सकता है।
Be your own therapist -music can boost happiness and reduce anxiety.

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क्या आप जानते हैं गीत, संगीत सुनना हमारे लिए अच्छा है. विभिन्न शोधों और अध्ययन से यह पता चला है खुशियों भरा संगीत हमारा मूड अच्छा करता है. इससे हमारी बेचैनी और तनाव में कमी आती है. इससे एंटीबॉडी का स्तर यानी रोगों के खिलाफ लड़ने की हमारी शारीरिक क्षमता में भी सुधार आता है और पीड़ा या दर्द के अनुभूति में कमी आती है. मनपसंद और मधुर गानों के सुनने से मस्तिष्क में हैप्पी हार्मोन का बहाव होता है. न्यूरोलॉजिकल अध्ययन बताते हैं खुशगवार संगीत हमारे मस्तिष्क के ऐसे केंद्रों को सक्रिय करता है जिससे डोपामिन रिलीज होता है. यही कारण है कि लोरी , भजन,  कीर्तन का प्रभाव सकारात्मक होता है. 

मुस्कुराते रहें !

खुशियों का मनोविज्ञान, अपने मनोवैज्ञानिक चिकित्सक स्वंय बने। Be your own therapist -Keep Smiling! It can trick your brain into happiness and boost your health.

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हम खुशियाँ नहीं खरीद सकते है। लेकिन एक मुस्कुराहट से मस्तिष्क में रासायनिक संतुलन  पैदा कर सकते हैं।  मनोवैज्ञानिकों अौर न्यूरोलॉजिस्टों के खोज बताते हैं – जब आप मुस्कुराते हैं, तब मस्तिष्क की एक रासायनिक प्रतिक्रिया डोपामाइन और सेरोटोनिन सहित कुछ हार्मोनों को छोड़ती है।सेरोटोनिन अौर डोपामाइन खुशी की हमारी भावनाओं को बढ़ाता है।

 हर बार जब आप मुस्कुराते हैं, तब दिमाग में एक  फील गुड  एहसास होता हैं। मुस्कुराहट  तंत्रिका संदेश को सक्रिय करता है। जो आपको स्वस्थ्य  और प्रसन्नचित बनाता है। हैपी हारमोन या  फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर- डोपामाइन, एंडोर्फिन और सेरोटोनिन- सभी तब रिलीज़ होते हैं, जब आपके चेहरे पर एक मुस्कान आती है। साथ-साथ यह चेहरे पर चमक लाता है । यह न केवल आपके शरीर को आराम देता है, बल्कि यह आपके हृदय गति और रक्तचाप को भी कम करता है।

दुर्भाग्य की बात है कि  कई स्थितियों मे चिकित्सकों को  एंटीडिप्रेसेंट दवा से डोपामाइन और सेरोटोनिन को बढ़ाकर चिकित्सा  करना पङता हैं। आप मुस्कुरा कर बङे आराम से हैपी हारमोन या  फील-गुड न्यूरोट्रांसमीटर के स्तर को स्वाभाविक रूप से बढ़ा सकते हैं। 

एंजाइटी अौर मानसिक तनाव से निकलें

अपने थेरेपिस्ट स्वयं बने।
Be your own therapist.

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एंजाइटी मानसिक तनाव – मैं मनोविज्ञानिक को बहुत गहराई से पढ़ा और समझा है। पर हैरानी की बात है  जब अपनी जिंदगी में परेशानियां आईं। तब उन्हें संभालना बहुत कठिन लगा। तब मैंने जाना, व्यक्तिगत रूप में इन्हें संभालने के लिए क्या करना चाहिए। इस पोस्ट में प्रैक्टिकल रूप से उपयोगी बातें शेयर करने जा रही हूं।

खानपान- यह हमेशा से कहा जाता रहा है कि पेट सभी बीमारियों का जड़ है . मानसिक समस्याओं जैसे एंजाइटी- तनाव में भी यह उतना ही महत्वपूर्ण है। जितना शारीरिक बीमारियों में। आपने देखा भी होगा अक्सर बेहद तनाव की स्थिति में या तो हम ज्यादा खाने लगते हैं या भूख नहीं लगती है । कभी-कभी कुछ मनचाहा खाने से अच्छा एहसास भी होता है।

नींद और आराम – एंजाइटी और तनाव सबसे पहले हमारे नींद को प्रभावित करती है। सबसे पहले अपने सोने के पैटर्न को देखें उसे सही करें। हमारे बॉडी क्लॉक कुछ इस तरह होती है कि आराम के पलों में हमारे शरीर का मेंटेनेंस होता है। अगर मन, मस्तिष्क, और शरीर को समुचित आराम मिलेगा। तब शरीर अपने आपको स्वयं ही हील करके, ठीक करने लगेगा। अगर समस्या हो तब योग निद्रा जरुर करें। इस समस्या के लिए डॉक्टर की सलाह भी ले सकते हैं।

खानपान – एंजाइटी से बचने या संभालने के लिए ज्यादा चीनी, तला-छना भोजन, आर्टिफिशियल नमक, डिब्बाबंद भोजन और पेय पदार्थों कम से कम लेना चाहिए। इनमें शामिल प्रिजर्वेटिव अौर अन्य पदार्थ हारमोंस को प्रभावित करते हैं। ताजे फल, सब्जियां, मेवे – अखरोट, बादाम, पिस्ता, दूध, पालक, ब्लूबेरी, ओट्स, डार्क चॉकलेट, ग्रीन टी, किवी आदि खाना ऐसे में फायदेमंद होता है।

आयुर्वेद – शंखपुष्पी, भृंगराज , अश्वगंधा, जटामांसी से एंग्जायटी और तनाव कम होता है। इनसे एकाग्रता बढ़ती है और स्मरण शक्ति भी मजबूत होती है। इनका उपयोग किसी जानकार से पूछ कर ही किया जाना चाहिए।

योगा और ध्यान – आज की भागती दौड़ती दुनिया में अपने मन- मस्तिष्क को शांत और खुश रखना सबसे जरूरी है। जिसका एक उपाय ध्यान और योग है। इसे नियमित रूप से करने से बहुत फायदा होता है। अगर समय कम हो तो शुरू में 5 या 10 मिनट प्राणायाम करना भी मददगार होता है। इसका फायदा आपको जल्दी ही नजर आने लगेगा।

एक्सरसाइज और टहलना – इससे शरीर में कुछ लाभदायक हार्मोन का स्त्राव बढ़ता है। जिससे हैपी हार्मोन के नाम से जाना जाता है। जो तनाव कम करता है और सेहत में भी फायदा मिलता है।

अपने साथ समय बिताएं – कभी-कभी एकांत में बैठकर अपने बारे में सोचें। अपनी समस्याओं अौर उनके कारणों अौर उपाय के बारे में सोचें। अपने को स्वस्थ रूप में, जैसा आप दिखना चाहते हैं। उसकी कल्पना करें। इस कामना को बार बार दोहराएं। अपनी खूबियों को याद करें।

ऐसे लोगों से दूर रहें जिनकी बातों से आपको तकलीफ होती है या दुख होता है। अपनी बातों को बोलना सीखे। किसी की बात ना पसंद हो तो जताना सीखें। मन की बातों को लिखने से या किसी से बांटने से भी तकलीफ और तनाव कम होता है।