आपका दिया, आपको समर्पित!

इतनी भी क्या है शिकायतें?

जहाँ जहाँ आप जातें है।

बातें बनाते और सुनाते हैं।

सब हम तक लौट कर आते हैं।

क्यों सब भूल जातें हैं – दुनिया गोल है।

किसी ने क्या ख़ूब कहा है –

पाने को कुछ नहीं, ले कर जाने को कुछ नहीं ।

फिर  इतनी भी क्या है शिकायतें?

हम किसी का कुछ रखते नहीं।

आपका दिया आपको समर्पित –

त्वदीयं वस्तु तुभ्यमेव समर्पये ।

       

मधुमेह उपचार में ध्यान व निष्काम कर्म की भूमिका !

यह पोस्ट भारतीय योग संस्थान द्वारा आयोजित शिविर के लिए लिखा गया है।

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सभी साधकों और वरिष्ठ ज्ञानी जनों का मधुमेह उपचार शिविर में स्वागत है।

मैं रेखा सहाय हूँ । मैंने मनोविज्ञान की पढ़ाई की है। लेकिन मेरा प्रिय विषय है – अाध्यात्म।  मैं अक्सर मनोविज्ञान,  विज्ञान अौर योग विज्ञान  को अाध्यात्मिकता के नजरिया से समझने की कोशिश करती रहती हूं। दरअसल विज्ञान, मनोविज्ञान या अध्यात्म का उद्देश्य एक ही है –   मनुष्य को स्वस्थ जीवन प्रदान करना।

लेकिन इनके  तुलनात्मक अध्ययन में मैनें हमेशा पाया है कि योग अौर अाध्यात्म बेहद महत्वपुर्ण है । निष्काम कर्म व ध्यान मधुमेह के साथ-साथ  सभी रोगों में लाभदायक हैं। यह हमें अाध्यात्मिकता की अोर भी ले जाता है।

सबसे पहले मैं विज्ञान अौर मधुमेह रोग की बातें करती हूं।  रिसर्चों के आधार पर विज्ञान ने आज मान लिया है कि मानसिक और शारीरिक स्ट्रेस या तनाव  हमारे ब्लड शुगर लेवल को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। ऐसे में शरीर में कुछ हानिकारक हार्मोन भी रिलीज होने लगते हैं। इन्हें नियंत्रित करने का एक अच्छा उपाय हैं ध्यान लगाना और खुश रहना है। शोधों से पता चला है कि माइंडफुलनेस यानि हमेशा खुश रहने की प्रैक्टिस टाइप 2 डायबिटीज में ब्लड शुगर लेवेल को कम करती है।

 

अब मनोविज्ञान की बातें करें । मनोविज्ञान का मानना है कि स्वस्थ रहने के लिए  हमारा खुश रहना जरूरी है और ये खुशियां हमारें ही अंदर हैं। जब हम  बिना स्वार्थ के,  दिल से किसी की सहायता करते हैं। किसी के साथ अपनी मुस्कुराहटे बांटते हैं, अौर ध्यान लगाते हैं।  तब हमारे शरीर में कुछ हार्मोन सीक्रिट होते हैं। जिसे वैज्ञानिकों ने हैप्पी हार्मोन का नाम दिया है। ये हैप्पी हार्मोन  हैं  – डोपामिन, सेरोटोनिन, ऑक्सीटॉसिन और एस्ट्रोजन।

 

यानी विज्ञान और मनोविज्ञान दोनों के अनुसार, जब हम ध्यान लगाते हैं अौर निष्काम कर्म करते हैं। तब हमारे अंदर हैप्पी हार्मोन स्त्राव से खुशियां अौर शांती उत्पन्न होती है। जो स्वस्थ जीवन के लिये जरुरी है।  विज्ञान और मनोविज्ञान के ऐसे खोजों  से  विदेश के यूनिवर्सिटीज में हैप्पीनेस कोर्सेज अौर योग के क्लासेस शुरू होने लगे। आप में से बहुत लोग जानते होगें। आज के समय में हावर्ड यूनिवर्सिटी में पॉजिटिव साइकोलॉजी का हैप्पीनेस स्टडीज बेहद पॉपुलर कोर्स है। इस के अलावा 2 जुलाई 2018 में दलाई लामा की उपस्थिति में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में भी हैप्पीनेस कोर्स लांच किया गया।

      अब अध्यात्म की बातें करते हैं । आज  मनोविज्ञान और विज्ञान  स्वस्थ जीवन के लिए हारमोंस को महत्वपूर्ण मानते हैं।  मेरे विचार में, हमारे प्राचीन ज्ञान आज से काफी उन्नत थे। हमारे प्राचीन ऋषि और मनीषियों ने काफी पहले यह खोज लिया था कि शारीरिक और मानसिक रूप से  स्वस्थ रहने के लिए अाध्यात्म – यानि  ध्यान, योग, निष्काम कर्म  आदि हीं सर्वोत्तम उपाय है। किसी भी परिस्थिती में संतुलित रहना,  शांत रहना,  सकारात्मक या पॉजिटिव और खुश रहना ही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।  आधुनिक शोधों  में पाया गया कि योग, ध्यान और निष्काम कर्म से शरीर में हैप्पी हार्मोन सीक्रिट होते हैं । ध्यान व  निष्काम कर्म सभी हार्मोनों के स्त्राव को संतुलित भी  रखतें हैं।  यह हमारे मानसिक व  शारीरिक स्वास्थ के लिये महत्वपूर्ण हैं।

अब एक बात गौर करने की है। हमारे शरीर में जहां-जहां हमारे ध्यान  के चक्र है। हार्मोन सीक्रिट करने वाले ग्लैंडस भी लगभग वहीं वहीं है।  यह इस बात का सबूत है कि विज्ञान आज जहां पहुंचा है। वह ज्ञान हमारे पास अाध्यात्म के रूप में पहले से उपलब्ध है।  सरल शब्दों में कहा जा सकता है कि  योग, ध्यान और निष्काम कर्म यही बातें सदियों से हमें बताते आ रहा है। यह संदेश भगवान कृष्ण ने गीता में हमें हजारों वर्ष पहले दे दिया था –

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। 

भगवान श्री कृष्ण कहते हैं-  कर्मयोगी बनो। फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य और अच्छे कर्म करो।| निष्काम कर्म एक यज्ञ  हैं। जो व्यक्ति निष्काम कर्म को अपना कर्तव्य समझते हैं। वे तनाव-मुक्त रहते हैं | तटस्थ भाव से कर्म करने वाले अपने कर्म को ही पुरस्कार समझते हैं| उन्हें उस में शान्ति अौर खुशियाँ मिलती  हैं |

योगसूत्र के अनुसार – 

 तत्र प्रत्ययैकतानता ध्यानम।। 3-2 ।।

अर्थात जहां चित्त  को लगाया जाए । जागृत रहकर चित्त का उसी  वृत्त के एक तार पर चलना ध्यान है । ध्यान अष्टांग योग का सातवां  महत्वपूर्ण अंग है। ध्यान का मतलब है भीतर से जाग जाना।  निर्विचार  दशा में रहना ही ध्यान है।  ध्यान तनाव व  चिंता के स्तर को कम करता है। मेडिटेशन मन को शांत और शरीर को स्वस्थ बनाता है।  यह हमें आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाता है।

योग, ध्यान, निष्काम कर्म का  ज्ञान बहुत पहले से हमारे पास है। लेकिन  भागती दौड़ती जिंदगी में हम सरल जीवन, निष्काम कर्म अौर  ध्यान को भूलने लगे हैं। मधुमेह या अन्य बीमारियां इस बात की चेतावनी है कि हमें खुशियों भरे स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए  योग, ध्यान, और निष्काम कर्म की ओर  जाना होगा। मधुमेह रोग के उपचार में ध्यान और निष्काम कर्म बेहद लाभदायक पाये गये हैं। आज खुशियों और शांति की खोज में सारी दुनिया विभिन्न कोर्सेज के पीछे भाग रही है, ऐसे में हम सब भाग्यशाली हैं कि हमें विरासत के रूप में आध्यात्म का ज्ञान मिला है। इसलिए रोग हो या ना हो सभी को स्वस्थ्य और खुशियों भरा जीवन को पाने  के लिए ध्यान तथा निष्काम कर्म का अभ्यास करना चाहिये। क्योंकि 

 Prevention is better than cure.

आशा है,  ये  जानकारियाँ आप सबों को पसंद आई होगी।धन्यवाद।

हमेशा खुश रहे! हमेशा स्वस्थ रहें! 

 

द इंटरनेशनल डे ऑफ पिंक The International Day of Pink

द इंटरनेशनल डे ऑफ पिंक – यह बुलिंग के विरोध में अप्रैल के दूसरे सप्ताह में गुलाबी कपड़े पहन कर होने वाला एक इंटरनेशनल इवेंट है । यह संदेश देता है कि दूसरों को बूली करने वाले लोगों को कभी बढ़ावा नहीं देना चाहिए।

बुलिंग क्या है – कुछ कम या लो सेल्फ स्टीम वाले लोग अक्सर, बार-बार दूसरों के साथ क्रूर, अपमानजनक और आक्रामक व्यवहार करते हैं। कुछ देशों में के इसके खिलाफ कानून भी है।

 

The International Day of Pink -This is an international anti-bullying event held in second week of April. People with low self-esteem  sometime treat (someone) in a cruel, insulting, threatening, or aggressive fashion. This harmful behavior is often repeated and habitual. This abusive behaviour have laws against it in some places.

Bullying is never fun; it’s a cruel and terrible thing to do to someone. If you are being bullied, it is not your fault. No one deserves to be bullied, ever. ~~Raini Rodriguez

 

 (Anti-Bullying DayAnti-Bullying WeekInternational Day of PinkInternational STAND UP to Bullying Day and National Bullying Prevention Month. )

क़तरा-ए-कालकूट

अर्थ – क़तरा- बूँद ड्रॉप, कालकूट – ज़हर poison, कैफ़ियत- बहाना excuse, रूह – आत्मा soul, अल्फ़ाज़ -शब्द .

देवत्व की दिव्यता ( डिग्निटी डिविनिटी)

Dignity Foundation hosted digital event of 2021, opting for the theme to be “spirituality. This video is included in Dignity Divinity, Part 1। Its also available on youtube.

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चले थे शिकायतों की पोटली ले ऊपर वाले के पास.
आवाज आई,
एहसान फ़रामोश ना बनो.
तुम्हारा अपना क्या है?
ज़िंदगी? तन? धन? या साँसे?
कुछ भी नहीं।
सब मिला है तुम्हें
दाता से उधार, ऋण में. 
बस हिफ़ाज़त से रखो.
जाने से पहले सब वापस करना है.
 

 

 मैंने नजरें उठाई, खुले विस्तृत नीले आकाश की ओर देखा और ऊपर वाले से पूछा। ईश, रात में सोने से पहले और सुबह उठने के बाद तुमसे बातें करती हूं। हर तरफ तुम्हारी ही आभा बिखरी दिखती है.  अपनी हर परेशानी  और कामना तुम्हें बताती हूं। अब तुम्हारे देवत्व और दिव्यता के बारे में क्या कहूं?  तुम्हें परिभाषा में बांधना असंभव है।तुम मेरे लिये क्या हो? तुम्हीं बताअो। 

 ऊपर वाले ने जवाब दिया – “जो मैं हूं वह तुम हो. तुम मेरा ही अंश हो। तुम्हारी यात्रा मुझ तक पहुंचने की है. चाहे जो भी राह या धर्म अपना लो. योग, प्राणायाम, ध्यान जिस विधि मुझे पा लो. मेरी हर रचना में मुझे ही देखो, यही मेरी सबसे बड़ी उपासना है।

हमने  कहा – अगर तुम और हम एक ही हैं. तब तुमने मुझे इतना गहरा आघात, इतनी चोटें क्यों दीं? जानते हो ना,  जिंदगी के मझधार में हमसफर का खोना कितना दुखदाई है। ऊपरवाला थोड़ा हिचकिचाया। फिर वह धीरे से मुस्कुराया और बोला – यह जीवन यात्रा है। इसमें   जन्म-मृत्यु,  दुख-सुख तो लगा ही रहेगा। राम और कृष्ण बन कर मैं भी तो इनसे गुजरा हूं। सच कहो तो, मैं तुम्हें तराश रहा था। ठीक वैसे जैसे तराश कर हीं पाषाण या संगमरमर से कलात्मक कलाकृति बनती है। जीवन का हर चोट बहुत कुछ सिखाता है. आत्मा और परमात्मा के करीब लाता है। अपने अंतर्मन के अंदर यात्रा करना सिखाता है. बस टूटना नहीं, मजबूत बने रहना अौर याद रखना –

When the world pushes you to your knees,
you’re in the perfect position to pray. 
Wherever you are,
and whatever you do,
be in love with me. 

 

डिग्निटी फाउंडेशन ने “आध्यात्मिकता” 2021  पर वीडियो आमंत्रित किया  था। मेरे इस वीडियो का चयन “डिग्निटी डिविनिटी -भाग 1” मे किया गया। यह यूट्यूब पर उपलब्ध है।

पावा कढ़ाइगल -थांगम, समीक्षा (Paava kathaigal – Thangam Netflix, Movie Review )

Heart touching story of a trans woman Sattaar who is hated and isolated by everyone in his village .

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मुझे लगता है  मूवी रिव्यु लिखना, किसी फिल्म की बारीकियों को समझने और अभिव्यक्त करने की कला है। इस कला में मैं अनाड़ी हूं। मैंने आज तक रिव्यु नहीं लिखा हैं। यह मेरा पहला प्रयास है। यह मैं किसी के अनुरोध पर लिख रही हूं। मुझे नहीं पता, मैं इस समीक्षा के साथ कितना न्याय कर पा रही हूं । आपके विचार सादर आमंत्रित है।

“पावा कढ़ाइगल ” मैं ने नेटफ्लिक्स पर देखी । इसकी पहली कहानी “थांगम/ सोना” ने मेरे दिल को छू लिया। सत्तार का चरित्र बिल्कुल सच्चाई के करीब और मार्मिक है। जिसे मैं भूल नहीं पा रही। इसलिए मुझे यह ख्याल अच्छा लगा कि अपने दिल की बातों को पन्ने पर उतार दूं। इसके इंट्रो में बेहद खूबसूरती से, लाल रंग को नारी  जीवन के बदलावों के प्रतीक रूप में दिखाया गया है। थंगम एक ट्रांस ग्रामीण की कहानी है। कहानी का नायक, युवा सत्तार पुरुष शरीर में फंसा नारी मन है। जिसमें नारी सुलभ ईर्ष्या, प्रेम, नारी बनने की ख्वाहिश और सजने सँवरने की लालसा है। उसका सपना है अपना ऑपरेशन करा कर एक संपूर्ण नारी बनना। वह दिल से नारी है। इसलिये किसी सामान्य युवती की तरह वह अपने बचपन के मित्र सरवनन (शांतनु ) से बेहद प्यार करता है। जिसे वह प्यार से ‘सोना’ बुलाता है। महिला ट्रांसजेंडर सत्तार समाज के क्रूर व्यवहार और बहिष्कार का सामना करता है। सत्तार का एक मार्मिक डायलॉग उसके दिल का दर्द बखूबी बयान करता है –

“जब मैं किसी को छूता हूं तो लोग मुझे गलत समझते हैं या दूर भाग जाते हैं। ऐसे प्यार से मुझे आज तक किसी ने गले नहीं लगाया।”

हम सब अपना दर्द खूब महसूस करते हैं। जरूरी यह है कि दूसरों की तकलीफें भी उतनी ही शिद्दत से महसूस की जाए। ताकि यह खूबसूरत दुनिया और खूबसूरत बन जाए। कहते हैं ट्रांसजेंडर ईश्वरीय भूल है। लेकिन हम अर्धनारीश्वर को पूजते हैं। प्राचीन संस्कृति में किन्नरों को यक्ष और गंधर्वों के बराबर माना जाता था। उन्हें मंगल या शुभ कहते थे। पर आज समाज में तीसरे जेंडर की स्थिति बेहद नाजुक है। जिसे कालिदास और सुधा कोंगारा ने थांगम में अभिव्यक्त किया है। हम भूल जाते हैं कि ट्रांसजेंडर अन्य रचनाओं की तरह हीं ईश्वर की अनोखी और दुर्लभ रचना है। उनके पास भी दिल और भावनाएं होती हैं। जिस का हमें सम्मान करना चाहिए।

तमिल कथा संकलन  ‘पावा कढ़ाइगल’ को हिंदी में ‘ गुनाहों की कहानियां या सिन स्टोरीज’ कह सकते हैं।   थांगम नेटफ्लिक्स की तमिल एंथोलॉजी, ‘पावा कढ़ाइगल’ का हिस्सा है। इस लघु फिल्म को हिंदी, इंग्लिश, तमिल या तेलुगु में देखने के ऑप्शन उपलब्ध है। इस का संगीत मधुर है अौर बहते झरने के आसपास का दृश्य मनोहर है।

गौतम मेनन, वेत्रिमरन, सुधा कोंगारा और विग्नेश शिवन की समाज की कालिमा अभिव्यक्त करती हुई लाजवाब लघु फिल्म है। जो समाज के कई पक्षों के बारे में सोचने के लिए मजबूर करती है। नायक कालिदास जयराम ने सत्तार के ट्रांस कैरेक्टर एक्टिंग में दिल जीत लिया। अगर आपके पास 45 मिनट समय है। तब इसे जरूर देखें । शायद यह आपके ख्यालात और सोचने का नजरिया बदल दे।

Paava Kadhaigal' review: A largely effective dark anthology- The New Indian  Express

   Paava kathaigal – Thangam on Netflix

 

 

 

ख़ुशियाँ !

चले थे शिकायतों की पोटली ले ज़िंदगी के पास.

हँसी वह और बोली एहसान फ़रामोश ना बनो.

तुम्हारा अपना क्या है?

ज़िंदगी? तन? मन? धन? साँसे?

सब मिला है तुम्हें

दाता से उधार, ऋण में. 

बस हिफ़ाज़त से रखो.

जाने से पहले सब वापस करना है.

और गौर से उन्हें भी देखो जिनके पास तुमसे कम है,

पर वे खुश तुमसे ज़्यादा है.

 

 

Image courtesy – Aneesh

एक टुकड़ा चाँद का !

एक टुकड़ा चाँद का ,

खुली खिड़की के अंदर आ गया.

बड़े गौर से देखता रहा ,

थोड़ा मुस्कुराया फिर बोला –

बाहर आओ.

असल दुनिया में!

टूटना या खंडित होना बुरा नहीं होता.

उसे पकड़े रहने की कोशिश ग़लत होती है.

आगे बढ़ते रहने के लिए,

कुछ छोड़ना सीखना ज़रूरी है,

मेरी तरह!

देखो मुझे,

खंडित होना और पूरा होना ही मेरा जीवन है,

मेरी नियति है.

फिर भी मुस्कुराता हूँ.

सितारों के साथ  टिमटिमाता हूँ।

चाँदनी, शीतलता और सौंदर्य फैलाता हूँ.