अपने आप

 कैसे तराशें अपने आप को ?

यह  प्रश्न चिन्ह सा डोलता है मन में.

यह देख , चाँद  थोङ झुका अौर बोला। 

देखो, मैं तो सनातन काल से यही कर रहा हूँ।

हर दिन,  अपने आप को तराशता रहता हूँ।

जब-जब  अपने  में  कमी नज़र आती है।

अपने को  पूरा करने की कोशिश में लग जाता हूँ।

राह के पत्थर

राह के पत्थरों के ठोकरों ने सिखाया,

राह-ए-ज़िंदगी पर चलना।

बुतों का इबादत किया हर दम।

फिर क्यों  फेंक दें इन पाषणों को? ,

सबक तो इन्हों ने  भी दिये कई  बार।

 

 

क्या हाल है?

क्यों,  किसी के  ‘क्या हाल है?’  पूछते

 दर्दे-ए-दिल का हर टांका उधड़ता चला जाता है?

कपड़े के थान सा दिल का हर दर्द,

तह दर तह, अनजाने खुलता चला जाता है।

 यह  सोचे बिना,  इसे समेटेगा कौन?

ख़ता किसकी है?

पूछने वाले के अपनेपन की?

 या पीड़ा भरे दिल की?

 

Image- Aneesh

हिन्दी दिवस (हिन्दी सप्ताह ) Hindi Divas

 

“हिन्दी दिवस” – 14 सितंबर के शुभ अवसर पर सभी   को मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

Happy  Hindi Divas (Day) ! It is  celebrated on 14 September

यह गर्व की बात हैं कि  हिंदी एक वैज्ञानिक भाषा है. इसकी विशेषताएं हैं –

1. जो लिखते हैं ,वही पढ़ते हैं और वही बोलते हैं.

2.  उच्चारण सही हो, तब सुन कर लिख सकते हैं.

3. वाक्य सम्बोधन  बड़े या छोटे के लिये अलग अलग होते हैं. जैसे आप ,तुम.

4. वाक्य शुरू करनेवाले  विशेष अक्षर ( capital ) नहीँ     होते.

  वैज्ञानिक कारण –

 अक्षरों का वर्गीकरण, बोली  और उच्चारण के अनुसार हैं. “क” वर्ग  कंठव्य कहे जाता हैं , क्योंकि इसका कंठ या गले से हम उच्चारण करते हैं.बोलने के समय जीभ गले के ऊपरी भाग को छूता हैं. बोल कर इसे  समझा जा सकता हैं.

क, ख, ग, घ, ङ.

इसी तरह “च ” वर्ग के सब अक्षर तालव्य कहलाते हैं.इन्हें बोलने के  समय जीभ तालू  को छूती है ।

च, छ, ज, झ,ञ

    “ट”  वर्ग मूर्धन्य कहलाते हैं. इनके  उच्चारण के समय जीभ  मूर्धा से लगती  है ।

ट, ठ, ड, ढ ,ण

त ” समूह के अक्षर दंतीय कहे जाते हैं. इन्हें बोलने के  समय जीभ दांतों को छूता हैं.

त, थ, द, ध, न

“प ” वर्ग ओष्ठ्य कहे गए, इनके  उच्चारण में दोनों ओठ आपस में मिलते  है।

प , फ , ब ,भ , म.

इसी तरह दंत ” स “, तालव्य  “श ” और मूर्धन्य “ष” भी बोले और लिखे जाते हैं.

मुखौटे

बड़ा गुमान था कि, 

चेहरा देख पहचान लेते हैं लोगों को .

तब हार गए पढ़ने में चेहरे.

खा गए धोखा ।

जब चेहरे पे लगे थे मुखौटे… …

 एक पे एक।

साँस

हर साँस के साथ ज़िंदगी कम होती है.

फिर भी क्यों ख़्वाहिशें अौर हसरतें कम नहीं होतीं?

 

हार-जीत

जिंदगी में हार-जीत या

पाना-खोना चलता रहता है।

मैंनें तुम्हें खो दिया है,

अौर अपने-आप को पा लिया।

लेकिन पता नहीं यह जीत है या हार।

 

ज़हन

अर्श….आसमान में चमकते आफ़ताब की तपिश और

महताब की मोम सी चाँदनी

ज़हन को जज़्बाती बना देते हैं.

सूरज और चाँद की

एक दूसरे को पाने की यह जद्दोजहद,

कभी मिलन  नहीं होगा,

यह जान कर भी एक दूसरे को पाने का

ख़्याल  इनके रूह से जाती क्यों नहीं?

 

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अर्थ – 

अर्श-आसमान।

आफ़ताब- सूरज।

महताब- चाँद।

ज़हन – दिमाग़।

 

Some interesting psychological facts

Here are some interesting lines from psychology area. Spare a thought!!!

1) If a friendship lasts longer than 7 years, psychologists say it will last a lifetime.

2) Being unable to get someone off your mind indicates that you are also on that person’s mind.

3) That mood where everything irritates you indicates that you’re actually missing someone.

4) Before sleeping, 90% of your mind begins to imagine the stuff you would like to happen.

5) Listening to 5 to 10 songs a day can improve memory, strengthen immune system and reduce depression risk by 80%.

6) The most powerful way to win an argument is by asking questions. It can make people see the flaws in their logic.

7) Subconsciously, it takes at least 6-8 months for the brain, to process complete forgiveness for someone who hurt you emotionally..

8) Overthinking causes the human mind to create negative scenarios and or a replay painful memories.

9) Usually, the people with the best advice are the ones with the most problems.

10) Intelligent people are more likely to avoid conflict, which explains why some people notice everything but choose to say nothing.

11) People who refuse to depend on others have experienced the most disappointment earlier on in their lives.

12) When someone refuses to tell you what’s wrong, you tend to think it’s your fault.

13) If you have a tough decision, flip a coin!
Not to decide for you, but you’ll realise what you really want when it’s in the air..

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