स्टिग्मा / कलंक ?- Banished for Bleeding!

BBC NEWS- पश्चिमी भारतीय राज्यों में “पीरियड हट्स” जहां हजारों आदिवासी महिलाओं और लड़कियों को मासिक धर्म के दौरान निर्वासित किया जाता है।

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पता नहीं कब हम बदलेंगे?

सदियाँ गुजर गईं।

ना जाने कितने नए दौर आए।

ईश्वर प्रदात महिलाओं की सबसे बड़ी रचनात्मकता हीं

उनका स्टिग्मा है।

कब बदलेंगे हम?

 

शुभ बुद्ध पूर्णिमा Happy Buddh Purnima!

“If you light a lamp for somebody, it will also brighten your path.”

बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार बैसाख पूर्णिमा को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महात्मा बुद्ध का जन्म इस दिन हुआ था। जहां हिंदू धर्म के लोग इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं, वहीं बौद्ध धर्म के लोग इस दिन बौद्ध जयंती मनाते हैं।

Buddha’s Birthday is celebrated on Buddhu Purnima, it is celebrated on the full moon day of the Vaisakha month According to Buddhist tradition and modern academic consensus, Gautama Buddha was born c. 563–483 BCE in Lumbini (what is now Nepal) and raised in the Shakya capital of Kapilavastu.

कोरोना से संघर्षरत हिंदुस्तान

Don’t shoot them with your camera !

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यह कोरोना से थका-हारा, संघर्षरत हिंदुस्तान है।

मैदाने-जंग या फ़ोटोग्राफ़ी कॉम्पटिशन  नहीं!

गिद्ध और नन्ही  बच्ची की तस्वीर से

पुलित्ज़र पुरस्कार जीतने वाला

रॉबर्ट हेडली भी अपने अपराध बोध से जीत नहीं पाया।

सोंचो वास्तव में गिद्ध कौन है?

 

यहाँ सब ने किसी ना किसी को खोया है।

मदद करो!

पेश आओ  सहानुभूति और हमदर्दी से।

 

महाप्रलय !!

World’s largest iceberg breaks off from Antarctica !

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महाप्रलय… जल मग्न धरा पर

बच गए अकेले मानव मनु।

है जानते यह कथा सब ।

गलते-टूटते विशालकाय हिम खंड

क्या वही इतिहास दोहराएँगे?

 आज ये आइसबर्ग खबरें हैं,

क्या कल हम सब खबरें बन जाएँगे?

 

 

 

मैं क्यों आई धरा पर? #गंगाजयंती/गंगासप्तमी 18 मई

गंगा सप्तमी 18 मई को है। वैशाख मास शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन गंगा स्वर्ग लोक से भगवान शिव की जटाओं में पहुंची थीं। इसलिए इस दिन को गंगा जयंती या गंगा सप्तमी के रूप में मनाया जाता है।

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हिमालय से लेकर सुन्दरवन तक की यात्रा करती,

पुण्य, सरल, सलिला, मोक्षदायिनी गंगा,

 हमेशा की तरह पहाड़ों से नीचे पहुँची मैदानों का स्पर्श कर हरिद्वार !

कुम्भ की डुबकी में उसे मिला छुअन कोरोना का।

आगे मिले अनगिनत कोरोना शव।

वह तो हमेशा की तरह बहती रही

कोरोना वायरस 

जल पहुँचाती घाट घाट!

जो दिया उसे, वही रही है बाँट!

किनारे बसे हर घर, औद्योगिक नगर, हर खेत और पशु को।

 

शुद्ध, प्राणवायु से भरी गंगा भी हार गई है मानवों से।

सैंकड़ों शवों को साथ ले कर जाती गंगा।

हम भूल रहें हैं, वह अपने पास कुछ भी  रखती नहीं।

अनवरत बहती है और पहुँचाती रही है जल।

अब वही पहुँचाएगी जो इंसानों ने उसे दिया।

कहते हैं गंगा मां  के पूजन  से  भाग्य खुल जाते हैं।

पर उसके भाग्य का क्या? 

  ख़्याल उसे आता होगा मगर।

स्वर्ग छोड़ मैं क्यों आई धरा पर ?

शुभ अक्षय तृतीया Happy Akshay Tritiya !!!

In Sanskrit, the word “Akshayya” (अक्षय्य) means ” never endingness ” in the sense of “prosperity, hope, joy, success”,

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  • महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।
  • माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
  • द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
  •  कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
  • सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
  • ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
  • प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोलाजाता है ।
  •  बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रहचरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।
  •  इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहतेहैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षयफल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।

साँसें #NOOXYGEN

थके राही को चंद साँसों के लिए,

लड़ते झगड़ते देखा!

पर अधूरी ख़्वाब बन कर रह गई ज़िंदगी!

बस रह गईं कुछ सिसकियाँ

और चंद कतरे आँसू के!

 

 

 

मुस्कुरा लो ज़रा !

Smile and laughter releases happy hormone Endorphins.
When we smile, brain releases tiny molecules called neuropeptides to help fight off stress. Then other neurotransmitters like dopamine, serotonin and endorphins come into play too. The endorphins act as a mild pain reliever, whereas the serotonin is an antidepressant.

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हँसो ना हँसो ! मुस्कुराओ या ना मुस्कुराओ!

ज़िंदगी यूँ हीं अपनी राहों पर चलती रहती है!

ऊपर-नीचे राहों पर गुजरती रहती है।

फिर क्यों ना थोड़ा मुस्कुरा कर जिया जाए।

चेहरे की मायूसी से कुछ नहीं मिलता।

पर मुस्कुराहटें बहुत कुछ दे जाती हैं।

इसलिए हँसो और मुस्कुराओ,

सिर्फ़ चेहरे से नहीं, सिर्फ़ आँखो से नहीं।

अपने पूरे वजूद से मुस्कुराओ।

मालूम नहीं इस छोटी सी ज़िंदगी के किस पल में

ज़िंदगी की शाम हो जाए।

इसलिए जीवन में मुस्कुराहटें बाँटते चलो ।

 

मुस्कुराहट अौर हंसी से हैप्पी हार्मोन एंडोर्फिन स्त्राव होता है – जब हम मुस्कुराते हैं, तब हमारा  मस्तिष्क तनाव को दूर करने में मदद करता है। इस के लिए वह  न्यूरोप्रेप्टाइड्स नामक छोटे अणु छोड़ता है। जिस से हैप्पी हार्मोन डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे  न्यूरोट्रांसमीटरों का स्त्राव होने लगता हैं। एंडोर्फिन एक हल्के दर्द निवारक के रूप में  भी काम  करता है अौर सेरोटोनिन एक एंटीडिप्रेसेंट भी है। 

Happy World Laughter Day- 2 May, 2021

मई महीने के पहले रविवार को इस का आयोजन होता है। तनाव को कम करने के लिए वर्ल्ड लॉफ्टर डे की शुरुआत भारत में हुई। लॉफ्टर योग आंदोलन के संस्थापक डॉ. मदन कटारिया ने 11 जनवरी 1998 में मुंबई में पहली बार वर्ल्ड लॉफ्टर डे मनाया था।

I smile like a flower not only with
my lips but with my whole being.

Laughter Day was first celebrated on May 10, 1998, in Mumbai, India by Dr Madan Kataria, who is also the founder of the worldwide Laughter Yoga movement. World Laughter Day is celebrated On first Sunday each year in May to highlight the importance of laughter in our lives.

ज़िंदगी की किताब !!

ज़िंदगी के किताब को ना अपनी मर्ज़ी से बंद कर सकते हैं

ना आगे के सफ़ेद पन्नों को पढ़ सकते हैं।

सिर्फ़ आज़ के पन्नों से कभी कभी दिल भर जाता है!

और जाने- अनजाने अक्सर पुराने पन्ने पलट जातें हैं।

वहाँ होते हो तुम!

अज़ीज़ हो तुम,

पर नाराज़ है हम।

 बिना कहे तुम्हारे जाने से।