Stay happy, healthy and safe – 17

सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः।

satyameva jayate nānṛtaṃ satyena panthā vitato devayānaḥ।

Truth alone triumphs, not falsehood.
Through Truth lies Devayâna- the path of gods.

असत्य नहीं,  सत्य हमेशा विजयी होता है।

सत्य देवताओं तक जाने का मार्ग है।

Source – Mundaka, III. i. 6

Stay happy, healthy and safe – 16

उध्दरेदात्मनात्मानम्।

udhdaredātmanātmānam।

Save yourself by yourself.

स्वंय से अपनी रक्षा स्वंय करो।

Swami Vivekananda

चिड़ियों की मीटिंग

अहले सुबह नींद खुली मीठी, गूँजती आवाज़ों से.

देखा बाहर परिंदों की सभा है.

शोर मचाते-बतियाते किसी गम्भीर मुद्दे पर, सभी चिंतित थे

– इन इंसानों को हुआ क्या है?

बड़े शांत हैं? नज़र भी नहीं आते?

कहीं यह तूफ़ान के पहले की शांति तो नहीं?

हाल में पिंजरे से आज़ाद हुए हरियल मिट्ठु तोते ने कहा –

ये सब अपने बनाए कंकरीट के पिंजरों में क़ैद है.

शायद हमारी बद्दुआओं का असर है.

Stay happy, healthy and safe – 15

आत्मानं सततं रक्षेत्।

ātmānaṃ satataṃ rakṣet।

One must save oneself under any circumstances.

हर परिस्थति में अपनी, स्वंय की सुरक्षा जरुर करें।

 

Source – Swami Vivekananda in a letter to Sj. Balaram Bose (5th January 1890)

image courtesy- Chandni Sahay.

जागता रहा चाँद

जागता रहा चाँद सारी रात साथ हमारे.

पूछा हमने – सोने क्यों नहीं जाते?

कहा उसने- जल्दी हीं ढल जाऊँगा.

अभी तो साथ निभाने दो.

फिर सवाल किया चाँद ने –

क्या तपते, रौशन सूरज के साथ ऐसे नज़रें मिला सकोगी?

अपने दर्द-ए-दिल औ राज बाँट सकोगी?

आधा चाँद ने अपनी आधी औ तिरछी मुस्कान के साथ

शीतल चाँदनी छिटका कर कहा -फ़िक्र ना करो,

रात के हमराही हैं हमदोनों.

कितनों के….कितनी हीं जागती रातों का राज़दार हूँ मैं.

Stay happy, healthy and safe – 14

उतिष्ठत। जाग्रत।

प्राप्य वरान्निबोधत।

Transliteration:
utiṣṭhata। jāgrata। prāpya varānnibodhata।

English Translation:
Arise. Awake. And stop not till the goal is reached.

Hindi Translation:
उठो। जागो।

और तब तक नहीं रुकना जब तक लक्ष्य हासिल न हो।

 

Swami Vivekananada

दूसरी दीवाली

पहली बार देखा और सुना साल में दो बार दीवाली!

दुःख, दर्द में बजती ताली.

साफ़ होती गंगा, यमुना, सरस्वती और नादियाँ,

स्वच्छ आकाश, शुद्ध वायु,

दूर दिखतीं बर्फ़ से अच्छादित पर्वत चोटियाँ.

यह क़हर है निर्जीव मक्खन से कोरोना का,

या सबक़ है नाराज़ प्रकृति का?

देखें, यह सबक़ कितने दिन टिकता है नादान, स्वार्थी मानवों के बीच.