ग़ुरूर

स्वाभिमान अच्छा है

ग़ुरूर नहीं।

कितने हिचक के बाद

माँगते हैं लोग मदद,

अपनी ख़ुद्दारी दरकिनार कर।

मदद ना करो तो है अच्छा,

मदद कर याद दिलाने से।

स्वाभिमान अच्छा है,

ग़ुरूर दिखाने से।

भरोसा

ज़िंदगी की हर जंग में,

हर महाभारत में आश्वस्त हैं।

क्योंकि जीवन के

हर सैलाब में तुम्हें साथ

ले कर चल रहें हैं।

भरोसा है,

जब तुमने जंग दिया है

तो जय दिलाने सारथी

बन तुम आओगे हीं।

ज़िंदगी के रंग -231

ज़िंदगी के जंग में,

जब हम अपना सम्मान करना,

अपने लिए खड़े होना

सीखने लगते है।

तब कई लोग हम से

दूर हो जातें है।

वे साथ नहीं छोड़ते

क्योंकि वे कभी

साथ थे हीं नहीं।

बस दिखने लगती है

सब की फ़ितरत।

जो अपने हैं,

वो तो हमेशा

साथ खड़े मिलेंगे।

Why We Love Narcissists – Have you ever wondered why selfish, arrogant, and entitled individuals are so charming? These narcissistic people have parasitic effects on others/ society. Narcissists manipulate credit and blame in their favor.
Research by January 15, 2014

दिल की बातें

किसी और की बातों

और राय को बोझ

ना बनने दो।

सुन सब की लो।

पर सुनो अपने दिल की।

चिटियाँ और इंसान

चींटियाँ हों या इंसान।

ज़िंदगी जीने की

जद्दो-जहद में,

क्या दोनों

एक सी ज़िंदगी

नहीं जी रहे?

ज़िंदगी के रंग – 230

जो उलझ गई वो है

ज़िंदगी साहब।

सब की है अपनी ज़िंदगी

अपनी राहें।

कई बार सुलझती सी,

कई बार उलझने और

उलझती सी।

ना सज्दा ना जप के

मनके राह सुझाते है।

दिल परेशान है,

ये रास्ते किधर जातें है?

अब उलझनों को

आपस में उलझने

छोड़ दिया है।

यह सोंच कर कि

उन्हें बढ़ाने से

क्या है फ़ायदा?

ज़िंदगी ना उलझी

तो क्या है मज़ा?

बादल

खुले आसमान में,

जलद …. जल भरे हलके

बादलों को आज़ाद,

ऊपर उठते देखा है।

सात रंग बिखेरते

इंद्रधनुष बनते-बनाते

देखा है।

जैसे हीं वे अपने

अंदर के पानी को बोझ

बना लेतें हैं।

पल भर में पानी बन

वही जा गिरते हैं।

जहाँ से ऊँचाइयों

पर पहुँचें थे।

ज़िंदगी के रंग – 229

ख़ुशियों के खोज़ में

गुज़रती जा रही है ज़िंदगी।

कितनी गुजारी यादों में

कितनी कल्पना में ?

है क्या हिसाब?

ग़र आधी ज़िंदगी गुज़ारी

अतीत के साये में

और भविष्य की सोंच में।

फिर कैसे मिलेगी ख़ुशियाँ ?

और कहते है –

चार दिनों की है ज़िंदगी,

चार दिनों की है चाँदनी ।

Wandering mind not a happy mind ( A research result)

Harvard psychologists Matthew A. Killingsworth and Daniel T. Gilbert used a special “track your happiness” iPhone app to gather research. The results: We spend at least half our time thinking about something other than our immediate surroundings, and most of this daydreaming doesn’t make us happy.

About 47% of waking hours spent thinking about what isn’t going on.

https://news.harvard.edu/gazette/story/2010/11/wandering-mind-not-a-happy-mind/

इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।

Psychology- Halo effect

The halo effect is a well documented social-psychology phenomenon that causes people to be biased in their judgments by transferring their feelings about one attribute of something to other, unrelated, attributes. The halo effect allows us to make snap judgments. The term “halo” is used in analogy with the religious concept: a glowing circle that can be seen floating above the heads of saints

The halo effect works in both positive and negative directions:

  • If you like one aspect of something, you’ll have a positive predisposition toward everything about it.
  • If you dislike one aspect of something, you’ll have a negative predisposition toward everything about it.
So, Always Be very careful while judging others.