ऋषिकेश की मेरी यात्रा

हिमालय के प्रवेश द्वार – ऋषिकेश की मेरी यह यात्रा बेहद ख़ुशनुमा रही। यहाँ हिमालय की शिखरों से नीचे ऊतर समतल धरा पर शीतल गंगा कलकल- छलछल बहती अद्भुत सम्मोहक लगती है। गंगा के एक ओर के घाटों पर खड़े हो कर दूसरी ओर के किनारे की छटा निराली दिखती है। दूर नज़र आते हैं – परमार्थ निकेतन, राम झूला, सीता झूला, गंगा आरती तथा गंगा तट पर शिव मूर्ति।शाम में होने वाली गंगा आरती की छटा भी निराली और मनमोहक होती है। लोग आस्था के साथ पत्ते के बने दोने में पुष्पों के बीच दीप प्रज्ज्वलित कर गंगा को समर्पित कर प्रवाहित करते है। नदियों को देवतुल्य मान अद्भुत आस्थामय सम्मान देने की यह परंपरा शायद हीं विश्व में कहीं और नज़र आती है। यहाँ की स्वच्छ पुण्य सलिल गंगा को देख कर ख़्याल आता है – “काश गंगा इतनी हीं स्वच्छता से देश के हर क्षेत्र में बहे।”

बद्रीनाथ दर्शन Badrinat temple Darshan

मै मंगलवार 10 मई को बदरीनाथ दर्शन करने गई थी। । यह भगवान विष्णु को समर्पित एक पवित्र प्राचीन मंदिर है जिसका निर्माण ७वीं-९वीं सदी में हुई थी। यह मन्दिर हिमालय के ऊँचे शिखरों के बीच गढ़वाल में, समुद्र तल से ३,१३३ मीटर (१०,२७९ फ़ीट) की ऊँचाई पर स्थित है। बद्रीनारायण मन्दिर भारतीय राज्य उत्तराखण्ड के चमोली जनपद में अलकनन्दा नदी के तट पर स्थित एक हिन्दू मन्दिरहै। यह हिंदू देवता विष्णु को समर्पित मंदिर है और यह स्थान इस धर्म में वर्णित सर्वाधिक पवित्र स्थानों, चार धामों, में से एक है ।

देहरादून से बद्रीनाथ तक यह यात्रा मैंने लगभग 1घंटे में हेलिकॉप्टर से तय किया। हेलिकॉप्टर से नीचे देखने पर पर्वतों और वादियों के अद्भुत और मनमोहक नज़ारे दिख रहे थे। यात्रा के दौरान बारिश होने लगी और चारो ओर धुँध चा गया। यह एक रोमांचक और ख़ूबसूरत यात्रा थी। यहाँ मंदिर में दर्शन का बेहतरीन इंतज़ाम था। यहाँ पुलिसकर्मीयों ने दर्शन में बहुत सहयोग किया।ये सभी दर्शनार्थियों की हर तरह से सहायता करतें है। यहाँ के लोकल गाईड और ड्राइवर श्री सत्यम राणा ने भी हमारी सहायता की।

ऑटो पाइलट मोड, Autopilot mode – Positive Psychology

तन के ताक़त से मज़बूत है मन।
बस चाहिए अदम्य इच्छा शक्ति और आत्म नियंत्रण।
ज़िंदगी सफ़र है बिखरने-सिमटने, ख़ुशियों-मुश्किलों की।
आइये, चलते है सफ़र-ए-ज़िंदगी।
सभी को अदा करना है रोल अपना ।
उम्र भर सफ़र में तन्हा हों या हो कारवाँ।
अपने आप पर भरोसा बनाए रखिये।
ज़िंदगी आप की है, संयम और जज़्बा बनाए रखिए।
राह-ए- सफ़र में धूप हो के छाँव,
लुत्फ़ उठाईये, सफ़रनामा बेहतरीन बनाए रखिए।

Sometimes we live on an autopilot mode to avoid some issues/problems of life. it feels like someone else is driving your life, not you.

Autopilot is an automatic, fast, and unconscious way of thinking. Living on autopilot means leaning towards the most comfortable thinking mode. Sometimes Our brain developes an unconscious decision-making system so we can take care of routine tasks, but it’s not a good practice. Actually Living on autopilot disengages us from our present and our future.

Signs of Autopilot mode– Live in a fixed routine, avoid trying new things. absent minded behaviour, want to stay in comfortable human autopilot state of habitual activities, failures of awareness, live in comfort zone.

Tips to get you started – Come out of fixed routine, practice mindfulness, come out of your comfort zone, try to train the Brain to take Better Decisions.

यूज़ एंड थ्रो

कुछ लोगों को दूसरों को

इस्तेमाल करने की आदत होती है।

अगर ना करने दिया

तो नाराज़ हो जातें हैं।

पर समझा करो यार –

हर कोई यूज़ एंड थ्रो नहीं होता।

रुख़्सत

विदा करने की हो न हो चाहत।

पर रुख़्सत करना पड़ता है।

चाहे गुज़रे किन्ही हालातों से।

चाहे कैफ़ियत कई हो दिल में।

पर आनेवाले को जाने देना पड़ता है।

दुनिया की है यह रीत।

रक़्स-ए-जुगनू

देखा है कभी रक़्स-ए-जुगनू ,

अपने आप से इश्क़ करनेवाले,

नृत्य में डूबे जुगनुओं को?

रातों में अपनी रौशनी में महफ़िलें सजाते?

अँधेरे में बिखेरते अपने उजाले से दुनिया को रिझाते?

अपनी रौशनी से दीवाली मनाते?

दिया सा जलाते, बे-रौशन रातों में?

वैसे हीं अपनी रूह को रौशन रखो!

हौसले का एक सितारा दमकने दो।

यह जीवन के हर पल को रौशन करेगा, अंधकार हरेगा।

Interesting Psychological fact- Self-esteem is your overall opinion of yourself. If you have healthy self-esteem, you feel good about yourself and see yourself as deserving. When you have low self-esteem, you put little value on your opinions and ideas.

विश्व प्रेस आजादी दिवस -3 May, World Press Freedom Day

1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए पहली बार मुहिम छेड़ी थी। अब हर वर्ष 3 मई को प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे मंतव्य यह है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ – मीडिया को मज़बूत बनाया जाये। 180 देशों में, भारत इस इंडेक्स में 142 वें नंबर पर है।

It’s one of the most dangerous countries for journalists trying to do their job properly: RSF

The 2021 World Press Freedom Index produced by Reporters Without Borders (RSF), a French NGO, has again placed India at 142nd rank out of 180 countries. This despite the fact that for a year, under directions from the Cabinet Secretary, an Index Monitoring Cell worked to improve the world rankings, including a meeting between Ambassador to France with the RSF officials to lobby for a change in the ranking in the index compiled by them. https://www.thehindu.com/news/national/india-again-placed-at-142nd-rank-in-press-freedom/article34377079.ece/amp/

बेमेल

अपने सुकून और शांति के लिए

अगर कुछ लोगों से दूर होना पड़े।

तब इसका मतलब है वे आपके

स्वस्थ के लिए बेमेल- विरुद्धाहार हैं।

विरुद्ध आहार- बेमेल या अस्वस्थकर भोजन आयुर्वेद के अनुसार।