पढ़ाकू साथी पुणे

नवपल्लव बुक्स द्वारा डॉ. रेखा रानी सहाय जी को साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘पढ़ाकू साथी पुणे’ के रूप में चयनित किया गया है। जानिए उनके तीन दशकों के साहित्यिक सफर और इस विशेष पहल के बारे में विस्तार से।

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साहित्य

नवपल्लव बुक्स प्रस्तुत करता है: आपकी “पढ़ाकू साथी पुणे” – डॉ० रेखा रानी सहाय जी

साहित्य, कला और संस्कृति को पुणे ज़िले में आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम।

Profile

रेखा रानी

September 2026

डॉ० रेखा रानी सहाय जी - पढ़ाकू साथी पुणे

नमस्कार साथियों,

हमें बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि नवपल्लव बुक्स द्वारा आयोजित ‘पढ़ाकू साथी’ कड़ी में पुणे, महाराष्ट्र से पढ़ाकू साथी के रूप में “डॉ. रेखा रानी सहाय” जी का चुनाव किया गया है। 6 सितंबर 2026 से आप “पढ़ाकू साथी पुणे” के रूप में जानी जा रही हैं। डॉ. सहाय जी संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद एवं लेखिका हैं, जो लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं。

पढ़ाकू साथी पुणे घोषणा

मनोविज्ञान में पीएच.डी. प्राप्त डॉ. सहाय जी ने लगभग दो दशकों तक शिक्षण, परामर्श और लेखन के क्षेत्र में कार्य किया है। पुस्तकों के लेखन एवं अनुवाद में भी योगदान दिया है। वे कविता, कहानी, बाल साहित्य, संस्मरण, आलेख, निबंध, पुस्तक समीक्षा और अनुवाद सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैं। उनकी रचनाएँ विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हुई हैं।

डॉ. सहाय जी जल्द ही नवपल्लव बुक्स के साथ मिलकर पुणे ज़िले की साहित्य, कला और संस्कृति को और आगे बढ़ाने व संजोने के क्रम में हम सबके साथ रुबरू होंगी। तब तक के लिए @padhakusathi, @navpallavbooks और “पढ़ाकू साथी पुणे” डॉ. सहाय जी को बधाई दीजिए, साथ ही साथ फ़ॉलो करके जुड़ जाइए।

🌟 पढ़ाकू साथी को मिलने वाली सुविधाएँ:

  • पढ़ाकू साथी का Tote Bag उपहार स्वरूप।
  • वेरिफाइड प्रमाण पत्र (ईमेल द्वारा)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट पर पढ़ाकू साथी की प्रोफ़ाइल (लेखक कोना कॉर्नर में उपलब्ध)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट navpallavbooks.com व अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर रिडीम होने वाले extra छूट शॉपिंग कूपन।
  • नवपल्लव के सभी आयोजनों (बुक फेयर, साहित्यिक आयोजन, निजी आयोजन) में अपने ज़िले से पढ़ाकू साथी का अपना प्रतिनिधित्व।
  • पढ़ाकू साथी का अपने ज़िले के साहित्यिक, कलात्मक एवं संस्कृति से सम्बन्धित कार्यों में आजीवन नवपल्लव की सहभागिता।
  • अन्य ज़रूरी साहित्यिक आयोजनों में पढ़ाकू साथी व नवपल्लव बुक्स का साथ रहने की ज़िम्मेदारी।

नवपल्लव बुक्स ऐसे साथियों का उत्साहवर्धन करके साहित्य, समाज और संस्कृति का सम्मान कर रहा है, जिसके केंद्र में आपका शहर, साहित्य, संस्कृति और उस शहर के सम्मानित लेखकगण शामिल हैं। आप भी साहित्य का प्रचार-प्रसार करके और नवपल्लव बुक्स से जुड़कर अगला ‘पढ़ाकू साथी’ बन सकते हैं।

सुविधाएँ

विशेष सूचना

📢 विशेष सूचना:

“अभी तक नवपल्लव बुक्स ने भारत के 36 ज़िलों में, 10 राज्यों से 39 पढ़ाकू साथियों का चयन किया है। अगर आप भी साहित्य, कला और संस्कृति के लिए ‘पढ़ाकू साथी’ अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है। अभी जुड़ जाइए!”

धन्यवाद
टीम, नवपल्लव बुक्स
(@padhakusathi | @navpallavbooks)

Profile

डॉ. रेखा रानी सहाय

संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं लेखिका। लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय एवं नवपल्लव बुक्स द्वारा चयनित “पढ़ाकू साथी पुणे”。

अतृप्त तृष्णा

डॉ. रेखा रानी की मार्मिक कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ अब प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ पत्रिका में प्रकाशित। इंसानी इच्छाओं के इस गहरे जीवन-दर्शन को Amazon Kindle पर पढ़ें।

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🎉 📖 ✨

अत्यंत खुशी के साथ साझा कर रही हूँ!

मुझे आप सभी को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मेरी लिखी हुई कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ (Pratigyan) पत्रिका में प्रकाशित हुई है!

साहित्य की इस नई पहचान का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। यह पत्रिका अब Amazon Kindle पर भी उपलब्ध है।

Atript Trishna Poem in Pratigyan Magazine

अतृप्त तृष्णा

हर इंसान आजीवन लड़ता रहता है,

नज़र न आने वाले

कई अनकहे युद्धों से-

कभी ख़ुद से,

कभी ज़माने से,

कभी लोगों से,

और कभी अपनी अतृप्त तृष्णाओं से।


यही तृष्णा

सुकून को मृगतृष्णा बना देती है,

इंसान भूल जाता है,

सफ़र-ए-ज़िंदगी कोई जंग नहीं,

बल्कि वह रूहानी सफ़र है,

जो हर अनुभव से,

हर ज़ख्म से हमें तराशता है।

ताकि हम

ख़ुद को ख़ुद से

बेहतर बना सके।

ताकि सुकून से भरे,

रौशन वजूद के साथ

जीवन के अगले मुकाम का

इस्तक़बाल कर सके।

आप सभी से अनुरोध है कि कृपया नीचे दिए गए लिंक पर जाकर किंडल (Kindle) पर पूरी पत्रिका पढ़ें और अपना प्यार एवं आशीर्वाद दें। 🙏

सधन्यवाद स्नेह,

डॉ. रेखा रानी

प्रतिज्ञान

प्रेम विशेषांक में मेरी नई रचना ‘भरम’

कविता भरम - प्रतिज्ञान

साहित्य और मानवीय संवेदनाओं के इस खूबसूरत सफर में, मुझे यह साझा करते हुए अपार हर्ष हो रहा है कि ‘प्रतिज्ञान प्रकाशन’ के नवीनतम अंक (अंक 6 – प्रेम विशेषांक) में मेरी स्वरचित कविता ‘भरम’ प्रकाशित हुई है।

यह अंक प्रेम के उन अनछुए और यथार्थवादी पहलुओं पर बात करता है जो अक्सर खामोशियों में छिपे रह जाते हैं। मेरी कविता ‘भरम’ भी इश्क़ की उसी अजब कहानी और दूर क्षितिज पर सागर-आसमान के मिलन जैसी बेचैनी को दर्शाती है।

भरम

अजब है इश्क़ की ये कहानी,
आसमान की नीली परछाइयों में रंगा है समुंदर,
दूर क्षितिज पर आसमान–सागर
के मिलन का है भरम भरा नजरिया।
हर लहर में मिलन की तड़प है।
हर सैलाब में बेचैनी, पूनम की रातों में
नज़र आती है……
फ़लक छू लेने की आरजू-ए-बेचैनी हैं।
इश्क़ पर टिकी ज़िंदगानी,
अजब है इश्क़ की ये कहानी।

यदि आप भी साहित्य प्रेमी हैं और प्रेम के इस सफर को महसूस करना चाहते हैं, तो इस अंक को जरूर पढ़ें और अपना स्नेह दें।

— डॉ. रेखा रानी