मगरपट्टा सिटी भजन संध्या

गणपति उत्सव के पावन अवसर पर हमारी सीनियर सिटीजन महिला समूह द्वारा प्रस्तुत एक सुमधुर भजन संध्या। इस विशेष प्रस्तुति में मराठी, संस्कृत, हिंदी और तमिल भाषाओं में गाए गए भजनों का आनंद लें।

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🌸 गणपति उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌸

इस भजन संध्या में हमारी महिला समूह ने दर्शकों के समक्ष मराठी, संस्कृत, हिंदी, और तमिल— चार भाषाओं में भजन प्रस्तुत किया ।

🙏 विशेष मार्गदर्शन: इस समूह में हमारी गुरु Kalyani Gurumurthy जी का विशेष मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमें प्राप्त है।

🎤 इस प्रस्तुति में भाग लिया था

1. Aparna Mahesh
2. Chandraprabha Kaushal
3. Chithra Jaggar
4. Chithra Jayashilan
5. Jaishri Zanwar
6. Lakshmi Moni
7. Prema Thakur
8. Rajalakshmi Raman
9. Rajalakshmi Rangarajan
10. Shyamala Shrinivas
11. Sonia Sidhwani
12. Sonal Arora
13. Veena murthy
14. Shanta ji

15. Rekha Sahay

🎵 वाद्ययंत्र संगत (Accompanists)

🎹 Harmonium: Shishir ji
🪘 Dholki: Vignesh
🥁 Mridangam: Ramakrishnan ji

पढ़ाकू साथी पुणे

नवपल्लव बुक्स द्वारा डॉ. रेखा रानी सहाय जी को साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘पढ़ाकू साथी पुणे’ के रूप में चयनित किया गया है। जानिए उनके तीन दशकों के साहित्यिक सफर और इस विशेष पहल के बारे में विस्तार से।

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साहित्य

नवपल्लव बुक्स प्रस्तुत करता है: आपकी “पढ़ाकू साथी पुणे” – डॉ० रेखा रानी सहाय जी

साहित्य, कला और संस्कृति को पुणे ज़िले में आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम।

Profile

रेखा रानी

September 2026

डॉ० रेखा रानी सहाय जी - पढ़ाकू साथी पुणे

नमस्कार साथियों,

हमें बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि नवपल्लव बुक्स द्वारा आयोजित ‘पढ़ाकू साथी’ कड़ी में पुणे, महाराष्ट्र से पढ़ाकू साथी के रूप में “डॉ. रेखा रानी सहाय” जी का चुनाव किया गया है। 6 सितंबर 2026 से आप “पढ़ाकू साथी पुणे” के रूप में जानी जा रही हैं। डॉ. सहाय जी संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद एवं लेखिका हैं, जो लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं。

पढ़ाकू साथी पुणे घोषणा

मनोविज्ञान में पीएच.डी. प्राप्त डॉ. सहाय जी ने लगभग दो दशकों तक शिक्षण, परामर्श और लेखन के क्षेत्र में कार्य किया है। पुस्तकों के लेखन एवं अनुवाद में भी योगदान दिया है। वे कविता, कहानी, बाल साहित्य, संस्मरण, आलेख, निबंध, पुस्तक समीक्षा और अनुवाद सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैं। उनकी रचनाएँ विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हुई हैं।

डॉ. सहाय जी जल्द ही नवपल्लव बुक्स के साथ मिलकर पुणे ज़िले की साहित्य, कला और संस्कृति को और आगे बढ़ाने व संजोने के क्रम में हम सबके साथ रुबरू होंगी। तब तक के लिए @padhakusathi, @navpallavbooks और “पढ़ाकू साथी पुणे” डॉ. सहाय जी को बधाई दीजिए, साथ ही साथ फ़ॉलो करके जुड़ जाइए।

🌟 पढ़ाकू साथी को मिलने वाली सुविधाएँ:

  • पढ़ाकू साथी का Tote Bag उपहार स्वरूप।
  • वेरिफाइड प्रमाण पत्र (ईमेल द्वारा)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट पर पढ़ाकू साथी की प्रोफ़ाइल (लेखक कोना कॉर्नर में उपलब्ध)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट navpallavbooks.com व अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर रिडीम होने वाले extra छूट शॉपिंग कूपन।
  • नवपल्लव के सभी आयोजनों (बुक फेयर, साहित्यिक आयोजन, निजी आयोजन) में अपने ज़िले से पढ़ाकू साथी का अपना प्रतिनिधित्व।
  • पढ़ाकू साथी का अपने ज़िले के साहित्यिक, कलात्मक एवं संस्कृति से सम्बन्धित कार्यों में आजीवन नवपल्लव की सहभागिता।
  • अन्य ज़रूरी साहित्यिक आयोजनों में पढ़ाकू साथी व नवपल्लव बुक्स का साथ रहने की ज़िम्मेदारी।

नवपल्लव बुक्स ऐसे साथियों का उत्साहवर्धन करके साहित्य, समाज और संस्कृति का सम्मान कर रहा है, जिसके केंद्र में आपका शहर, साहित्य, संस्कृति और उस शहर के सम्मानित लेखकगण शामिल हैं। आप भी साहित्य का प्रचार-प्रसार करके और नवपल्लव बुक्स से जुड़कर अगला ‘पढ़ाकू साथी’ बन सकते हैं।

सुविधाएँ

विशेष सूचना

📢 विशेष सूचना:

“अभी तक नवपल्लव बुक्स ने भारत के 36 ज़िलों में, 10 राज्यों से 39 पढ़ाकू साथियों का चयन किया है। अगर आप भी साहित्य, कला और संस्कृति के लिए ‘पढ़ाकू साथी’ अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है। अभी जुड़ जाइए!”

धन्यवाद
टीम, नवपल्लव बुक्स
(@padhakusathi | @navpallavbooks)

Profile

डॉ. रेखा रानी सहाय

संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं लेखिका। लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय एवं नवपल्लव बुक्स द्वारा चयनित “पढ़ाकू साथी पुणे”。

अतीत से भविष्य तक

​डॉ. रेखा रानी का यह शोधपरक लेख ‘अतीत से भविष्य तक नारी की यात्रा’ महिलाओं के बदलते मनोवैज्ञानिक, सामाजिक और आर्थिक स्वरूप को गहराई से दर्शाता है। पढ़ें यह सशक्त लेख!

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समाज

अतीत से भविष्य तक नारी की यात्रा : कल, आज और कल

✍️ रेखा रानी | 🗓️ August 22, 2026

Journey of Women: Past to Future

आज का दौर तेजी से बदल रहा है। ऐसे में महिलाओं के जीवन, सोच और सामाजिक भूमिका में भी व्यापक परिवर्तन हो रहे हैं। महिलाएं समाज की लगभग 50 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करती हैं। इसलिए उनके व्यक्तित्व, दृष्टिकोण और जीवन-शैली में आने वाला परिवर्तन केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र—तीनों को प्रभावित करता है।

महिलाएं समाज की आधारशिला हैं। उनके विकास और परिवर्तन का प्रभाव परिवार व आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता है। वास्तव में परिवर्तन प्रकृति का अटल और शाश्वत नियम है। समय के साथ सामाजिक परिस्थितियाँ, शिक्षा, तकनीक, आर्थिक अवसर और जीवन-मूल्य बदलते रहते हैं, तो व्यक्ति का व्यक्तित्व और आत्मबोध भी बदलता है। यही कारण है कि बीते समय की महिला और आज की महिला के विचारों, आकांक्षाओं तथा जीवन-दृष्टि में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।

बीते कल की नारी

पहले अधिकांश महिलाएं अपनी पहचान स्वयं के व्यक्तित्व से अधिक, दूसरों के दृष्टिकोण और रिश्तों के माध्यम से खोजती थीं। वे किसी की माँ, पत्नी, बहन या बेटी के रूप में ही अपनी सामाजिक पहचान प्राप्त करती थीं। सहनशील होना, अपनी इच्छाओं और भावनाओं को व्यक्त न करना तथा परिवार के लिए स्वयं का त्याग करना आदर्श महिला के गुण माने जाते थे।

उस समय आर्थिक निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत सीमित थी। आर्थिक आत्मनिर्भरता लगभग नगण्य थी और वित्तीय निर्णय मुख्यतः पुरुषों के हाथों में केंद्रित रहते थे। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अवसर भी अपेक्षाकृत सीमित थे। किन्तु आज शिक्षा, करियर, तकनीकी विकास, वैश्विक संपर्क और बढ़ती सामाजिक जागरूकता के कारण महिलाओं के व्यवहार, व्यक्तित्व, सेल्फ कॉन्सेप्ट, यानी उनका अपने बारे में नजरिया और जीवन-दृष्टि में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है।

आज की नारी : सकारात्मक बदलाव

आज महिलाएं शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, न्यायपालिका, खेल, उद्यमिता, चिकित्सा, सेना, राजनीति तथा प्रौद्योगिकी जैसे अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां प्राप्त कर रही हैं। वे केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक और राष्ट्रीय विकास की सक्रिय सहभागी भी बन चुकी हैं।

मनोवैज्ञानिक प्रभाव : बदलता ‘सेल्फ कॉन्सेप्ट’

आधुनिक नारी में हो रहे इस परिवर्तन को मनोविज्ञान की दृष्टि से बदलता हुआ सेल्फ कॉन्सेप्ट (Self-concept) कहा जा सकता है।

सेल्फ कॉन्सेप्ट का अर्थ है—व्यक्ति स्वयं को किस प्रकार देखता है, अपनी भूमिका को समाज में किस रूप में समझता है, अपने आत्मसम्मान को कैसे परिभाषित करता है तथा स्वयं को कितना स्वीकार करता है। शिक्षा, रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता, सामाजिक सम्मान और व्यक्तिगत उपलब्धियाँ इसके निर्माण के प्रमुख आधार माने जाते हैं।

सामाजिक प्रभाव : शोध क्या कहते हैं?

  • 1. शिक्षा और आत्मनिर्भरता: UNESCO (2024) तथा भारत के All India Survey on Higher Education के अनुसार उच्च शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। इसने महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास विकसित किया है।
  • 2. आर्थिक स्वतंत्रता: Humanities and Social Sciences Communications (Nature, 2025) के अनुसार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महिलाओं में निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक सहभागिता अधिक पाई गई है।
  • 3. परिवार की बदलती संरचना: International Journal of Family Studies (2024) के अनुसार आधुनिक परिवारों में महिलाओं की निर्णय-निर्माण प्रक्रिया में समान भागीदारी उनके आत्मसम्मान तथा वैवाहिक संतुष्टि को बढ़ाती है।
  • 4. अधिकारों के प्रति जागरूकता: UN Women (2024) के अनुसार कानूनी जागरूकता, शिक्षा और सामाजिक सहभागिता महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रमुख आधार हैं।

आज : बदलाव का दूसरा पक्ष – नकारात्मक बदलाव

तेजी से बदलते समाज में लोगों की अपेक्षाएं, जीवन-शैली और व्यवहार भी बदलते हैं। यदि इस परिवर्तन के साथ नैतिक संतुलन, भावनात्मक परिपक्वता और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास न हो, तो अनेक प्रकार की चुनौतियाँ सामने आने लगती हैं।

महिलाओं में अपराध और मनोवैज्ञानिक दबाव:
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) और UNODC की रिपोर्टें संकेत देती हैं कि गंभीर अपराधों में महिलाओं की भागीदारी आज भी पुरुषों की तुलना में काफी कम है। अपराधशास्त्री Robert Agnew की General Strain Theory (1992) के अनुसार जब व्यक्ति की आकांक्षाओं और वास्तविक परिस्थितियों के बीच गहरा अंतर उत्पन्न होता है, तब तनाव असामान्य व्यवहार को जन्म दे सकता है।

आज अनेक महिलाएं परिवार और कार्यस्थल—दोनों की दोहरी जिम्मेदारियाँ निभा रही हैं। WHO (2023) के अनुसार लंबे समय तक बना रहने वाला तनाव भावनात्मक नियंत्रण को प्रभावित कर सकता है। अपराध के पीछे व्यक्तिगत, सामाजिक, आर्थिक और परिस्थितिजन्य कई कारक एक साथ कार्य करते हैं।

आने वाले कल की नारी

आने वाले कल की नारी केवल शिक्षित और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर ही नहीं होगी, बल्कि मानसिक रूप से अधिक सशक्त, आत्मविश्वासी, संवेदनशील और विवेकशील भी होगी। यदि उसे समान अवसर, सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा भावनात्मक सहयोग प्राप्त होगा, तो वह इन चुनौतियों को अवसरों में बदलने में सक्षम होगी। वह केवल स्वयं का भविष्य नहीं गढ़ेगी, बल्कि एक अधिक संवेदनशील, न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

निष्कर्ष

आधुनिक महिला का बदलता सेल्फ कॉन्सेप्ट भारतीय समाज के लिए एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक उपलब्धि है। महिलाओं के बदलते जीवन को केवल सामाजिक परिवर्तन के रूप में नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी समझा जाना चाहिए। तभी आने वाले कल की नारी का व्यक्तित्व समग्र समाज के विकास और मानवीय मूल्यों की सशक्त वाहक बनकर एक नए भारत के निर्माण में अपनी निर्णायक भूमिका निभाएगी।

डॉ. रेखा रानी

(लेखिका, परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर)


द डॉसियर (The Dossier) पर मूल लेख पढ़ें