राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान से देश परेशान

क्या राहुल गांधी ने वास्तव में मनुस्मृति को पूरा पढ़ा और समझा है? या यह केवल एक पूर्वनिर्धारित राजनीतिक रणनीति है? द डोज़ियर (The Dossier) में प्रकाशित डॉ. रेखा रानी का यह बेबाक लेख राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान और चयनात्मक राजनीति की पोल खोलता है।

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राजनीति / विचार

राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान से देश परेशान

लेखिका: डॉ. रेखा रानी | प्रकाशित: 15 अक्टूबर, 2026 | मूल स्रोत: The Dossier (Hindi)

राहुल गांधी और मनुस्मृति - रेखा रानी का लेख
Image: The Dossier

22 अगस्त, 2026 को छात्रों की गहमागहमी के बीच राहुल गांधी ने मनुस्मृति के एक श्लोक के आधार कर पूरे हिंदू धर्म को पितृसत्तात्मक और महिला-विरोधी रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। यह अफसोस की बात है दुनिया के प्राचीनतम और सहिष्णुतम सनातन धर्म को नकारात्मक ढंग से चित्रित किया गया। क्या किसी धर्म और उसकी हजारों वर्ष पुरानी परंपरा का मूल्यांकन इस तरह एकपक्षीय ढंग से किया जाना उचित है? इस कार्यक्रम की आड़ में प्राचीन धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति को कटघरे में खड़ा करना अधूरे ज्ञान और चयनित राजनीति का उदाहरण है।

“क्या राहुल गांधी ने मनुस्मृति वास्तव में पूरा पढ़ा और समझा है? जिसके आधार पर वे सनातन के धार्मिक-सांस्कृति परंपरा पर टिप्पणी कर रहे हैं?”

उनका उद्देश्य क्या है? वास्तव में राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया। परंतु उसी मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान को लेकर कहा गया है—

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः.
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”

(जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं; और जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां किए गए सभी शुभ कर्म निष्फल हो जाते हैं।)

महात्मा गांधी के विचार और ऐतिहासिक संदर्भ

यहां यह चर्चा भी महत्वपूर्ण है कि दुनिया में शायद ही किसी अन्य धर्म में देवताओं के साथ-साथ इतनी देवियां पूजी जाती हैं, जितना सनातन धर्म में। महिलाओं की स्वतंत्रता और गरिमा का विचार सनातन धर्म के मूल में है।

स्वयं महात्मा गांधी मनुस्मृति के उपलब्ध पाठ के अंतर्विरोध और बाद में जोड़ी गई सामग्री की संभावना पर प्रश्न उठा चुके हैं। वे कह चुके हैं कि जब किसी के पास इसकी मूल प्रति उपलब्ध नहीं है, तब आज मनुस्मृति के किसी एक श्लोक को अंतिम और निर्विवाद सत्य मानकर प्रस्तुत करने से पहले क्या उसके पाठ-इतिहास और विभिन्न पांडुलिपियों की जानकारी लेना आवश्यक नहीं है?

महात्मा गांधी ने 4 मई 1928 को पी. टी. पिल्लै को लिखे पत्र में लिखा था (संपूर्ण गांधी वाङ्मय, खंड 26, पृष्ठ 348) – “मनुस्मृति में बहुत कुछ प्रशंसनीय है, जबकि उसके वर्तमान स्वरूप में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

चयनित राजनीति और संवाद की भाषा

चर्चा से पहले ज्ञान आवश्यक है। राहुल गांधी ने विवादित बात कही। अतः उन्हें स्रोत और प्रमाण को सार्वजनिक करना चाहिए। राहुल गांधी को बताना चाहिए कि उन्होंने मूल संस्कृत अथवा अनुवाद कौन-सा संस्करण पढ़ा। क्या उन्हें मनुस्मृति की विभिन्न पांडुलिपियों और उसके ऐतिहासिक विकास की जानकारी है?

क्या राहुल गांधी नहीं जानते धर्म और धार्मिक ग्रंथ चर्चा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं? प्राचीन मनुस्मृति को उसके ऐतिहासिक संदर्भ से काटकर, केवल चुनिंदा अंशों के आधार पर प्रस्तुत करना समाज में अनावश्यक विवाद और असहजता पैदा कर सकता है। यहां राहुल गांधी पर यह मुहावरा बिल्कुल सही बैठता है – ‘अध जल गगरी छलकत जाए।’

कार्यक्रम मुख्यतः छात्राओं से संवाद था। राहुल गांधी ने अपनी बात अंग्रेजी में रखी। जब विषय भारतीय समाज, धर्म, महिलाओं और युवाओं के जीवन से जुड़ा हो, तब ऐसी भाषा चुनना उचित होता, जिसे देश की बड़ी आबादी सहजता से समझ सके। ऐसे संवेदनशील विषय पर संवाद हिंदी और स्थानीय भारतीय भाषाओं में अधिक व्यापक हो सकता था।

समान महिला अधिकार और दोहरे मापदंड

भारत में आज भी मुस्लिम समुदाय में कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में शरीयत लागू है, जिसके अंतर्गत विवाह, तलाक, भरण-पोषण आदि का उल्लेख है। भारत सरकार ने तीन तलाक पर कानूनी सुधार, हज में मेहरम की अनिवार्यता हटाना जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

तो फिर प्रश्न स्वाभाविक है — यदि उद्देश्य महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा करना है, तो इन वास्तविक और वर्तमान कानूनी-सामाजिक प्रश्नों पर भी समान गंभीरता से चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए? राहुल गांधी ने महिला सशक्तीकरण से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर मनुस्मृति को ही आलोचना का केंद्र क्यों बनाया?

राहुल ने महिला सशक्तीकरण की कसौटी सबके लिए समान क्यों नहीं रखी? स्पष्ट है कि राहुल गांधी सुधारात्मक नहीं, आलोचना राजनीति कर रहे हैं। वे सभी समुदायों के महिलाओं के अधिकारों के लिए समान रूप से मुखर नहीं हैं।

मनुस्मृति और वैश्विक दृष्टिकोण

मनुस्मृति पर पश्चिमी विद्वानों और लेखकों की हमेशा गंभीर रुचि रही है:

  • फ्रेडरिक नीत्शे (जर्मन दार्शनिक): “बाइबिल को बंद करो और मनुस्मृति को खोलो। मनुस्मृति का दृष्टिकोण बेहद स्वस्थ, विस्तृत और जीवन को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने वाला है।”
  • सर विलियम जोन्स (ब्रिटिश कानूनविद): “मनुस्मृति एक अत्यंत प्राचीन, व्यापक और अद्भुत कानूनी तथा सामाजिक ग्रंथ है।”
  • मॉरिस मेटरलिंक (नोबेल विजेता): “मनुस्मृति में दी गई ब्रह्मांड की उत्पत्ति और आत्मा की विकासवादी यात्रा के विचार आधुनिक विज्ञान की खोजों से बहुत मेल खाते हैं।”

निष्कर्ष: विपक्ष की जिम्मेदारी

देश को विभाजित करने की राजनीति आज के भारत को स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक पद पर हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है, इसलिए उनके वक्तव्यों की जिम्मेदारी और भी अधिक है।

विपक्ष का काम केवल सरकार का विरोध कर देश में अनावश्यक अशांति व भ्रम फैलाने का नहीं है। किसी भी राष्ट्र को मजबूत बनाए रखने के लिए भीतर की चुनौतियों से निपटना उतना ही जरूरी है जितना सीमाओं की रक्षा करना। देश की आंतरिक सुरक्षा बाहरी सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है।

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डॉ. रेखा रानी

लेखिका, परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर हैं। इनके लेख विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।

शुभ अक्षय तृतीया Happy Akshay Tritiya !!!

In Sanskrit, the word “Akshayya” (अक्षय्य) means ” never endingness ” in the sense of “prosperity, hope, joy, success”,

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  • महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।
  • माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
  • द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
  •  कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
  • कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।
  • सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।
  • ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।
  • प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोलाजाता है ।
  •  बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रहचरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।
  •  इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था ।

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहतेहैं। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षयफल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयं सिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।

Stay happy, healthy and safe –- 51

Yesterday is but a dream,

Tomorrow is only a vision. 

But today

well lived makes every yesterday a dream of happiness,

and every tomorrow a vision of hope.

 

 

― Kālidāsa, The complete works of Kalidasa

Kālidāsa –  Classical Sanskrit writer, regarded as the greatest poet and dramatist in the Sanskrit language, based on the Vedas, the Ramayana, the Mahabharata and the Puranas.

Stay happy, healthy and safe – 14

उतिष्ठत। जाग्रत।

प्राप्य वरान्निबोधत।

Transliteration:
utiṣṭhata। jāgrata। prāpya varānnibodhata।

English Translation:
Arise. Awake. And stop not till the goal is reached.

Hindi Translation:
उठो। जागो।

और तब तक नहीं रुकना जब तक लक्ष्य हासिल न हो।

 

Swami Vivekananada

Sanskrit most suitable language for AI- President Kovind

Good compony

Sanskrit / संस्कृत श्लोक-

चन्दनं शीतलं लोके चंदनादपि चंद्रमा: |
चन्द्रचन्दनयोर्मध्ये शीतला साधुसंगत: ||

Meaning –

 

sandalwood is pleasant,

moon (or moon light) is more pleasant than sandal.

but, the  good company

is pleasant then both moon and sandal.

Anurakthi – World’s first 3D Sanskrit film screened at IFFI अनुरक्ति – दुनिया की पहली संस्कृत 3 डी फिल्म

First 3D Sanskrit feature film to hit festival circuit

World’s first 3D Sanskrit film screened at IFFI

 

The 3,000-year-old Sanskrit language may not be part of our daily discourse, but a filmmaker has shot a feature film in Sanskrit in 3D.  World’s first Sanskrit 3D film ‘Anurakthi is among the main attraction in 3D category at the ongoing International Film Festival of India in Panaji in Goa.

 

3,000 साल पुरानीकहलानेवाली संस्कृत भाषा हमारे दैनिक  बोलचाल  का हिस्सा नहीं हो सकती, लेकिन एक फिल्म निर्माता ने संस्कृत में 3 डी में फीचर फिल्म बनाई है। दुनिया की पहली संस्कृत 3 डी फिल्म ‘अनुरक्ति’ गोवा में पणजी में भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में 3 डी श्रेणी में मुख्य आकर्षण है।

संस्कृत बोलने वाला दुर्लभ गांव जहाँ हर घर में इंजिनियर हैं – समाचार (news- Sanskrit  speaking village of India, with many engineers)

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Sanskrit is believed to be a logical and spiritual language. It is also called as devbhasha  (language of God).     

तुंगा नदी के तट पर मत्तुर / माथुर ग्राम ( कर्नाटक राज्य, भारत, सामान्य भाषा कन्नड़ ) में बोलचाल के लिये  संस्कृत का  उपयोग किया जाता है. एक और अद्भुत बात है, जिन प्राचीन ग्रंथो को आज़ हम भूल रहे हैं. उन्हे   यहाँ के पारम्परिक विध्यालय में पढाते  है. इस गांवों में हर घर में इंजिनियर हैं. मान्यता है संस्कृत देव भाषा है और इस के  अध्ययन से आध्यात्मिकता  और तार्किकता बढती है.    

तब क्या संस्कृत को एक मृत भाषा कहना भ्रामक नहीं है?

छाया चित्र  इन्टरनेट से.