मगरपट्टा सिटी भजन संध्या

गणपति उत्सव के पावन अवसर पर हमारी सीनियर सिटीजन महिला समूह द्वारा प्रस्तुत एक सुमधुर भजन संध्या। इस विशेष प्रस्तुति में मराठी, संस्कृत, हिंदी और तमिल भाषाओं में गाए गए भजनों का आनंद लें।

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🌸 गणपति उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ! 🌸

इस भजन संध्या में हमारी महिला समूह ने दर्शकों के समक्ष मराठी, संस्कृत, हिंदी, और तमिल— चार भाषाओं में भजन प्रस्तुत किया ।

🙏 विशेष मार्गदर्शन: इस समूह में हमारी गुरु Kalyani Gurumurthy जी का विशेष मार्गदर्शन और आशीर्वाद हमें प्राप्त है।

🎤 इस प्रस्तुति में भाग लिया था

1. Aparna Mahesh
2. Chandraprabha Kaushal
3. Chithra Jaggar
4. Chithra Jayashilan
5. Jaishri Zanwar
6. Lakshmi Moni
7. Prema Thakur
8. Rajalakshmi Raman
9. Rajalakshmi Rangarajan
10. Shyamala Shrinivas
11. Sonia Sidhwani
12. Sonal Arora
13. Veena murthy
14. Shanta ji

15. Rekha Sahay

🎵 वाद्ययंत्र संगत (Accompanists)

🎹 Harmonium: Shishir ji
🪘 Dholki: Vignesh
🥁 Mridangam: Ramakrishnan ji

Who am I ?

शमा के नूर

पूछा किसी ने रूमी से- दरवेश! किस मद में चूर हो?

गोल-गोल झूमते और घूमते लगते शमा के नूर हो।

नृत्य में बेफ़िक्री डूबे किस सुरूर हो?

यह नशा पाते कहाँ से हो?

जवाब मिला – चूर हैं हम मद, औ मुहब्बत में उसके,

दुनिया रौशन है उल्फ़त में जिसके।

तु हर चोट की दरार से रिसके,

रौशनी भरने दे अपनी रूह में।

उसके इश्क़ को ना ढूँढ दिल में,

अपने अंदर जो दीवारें बना रखीं है,

तोड़ आज़ाद हो जा हँस के।

तु भी झूमने लगेगा इस मद में।

अर्थ

शमा – सूफी नृत्य की रूहानी दुनिया।

रूमी – सूफ़ी दरवेश \ संत।

धूप का इक टुकड़ा

आफ़ताब से आँख मिलाने की कोशिश ना कर

रौशनी से शिकवा-शिकायत न कर।

अंधेरे को उजाला करने को

इक किरण-ए-आफ़ताब काफ़ी है।

चम्पई अंधेरा और सुरमई उजाला

रौशन करने को गज़ाला-ए-किरण…

…धूप का इक टुकड़ा हीं काफ़ी है।

अर्थ : गज़ाला -सूर्य, सूरज,

picture courtesy – Anurag Dutta

जी भर, जी ले ज़िंदगी

सारे सच लोग झूठ बताते चले गये।

सारी ज़िंदगी छले जाते रहे।

कई धोखे भरे रिश्ते निभाते चले गये।

शायद हुआ ऊपर वाले के सब्र का अंत।

हाथ पकड़ ले चला राह-ए-बसंत।

एक नई दुनिया, नई दिशा में।

बोला, पहचान बना जी अपने में।

तलाश अपने आप को, अपने आप में।

ग़र चाहिए ख़ुशियाँ और सुकून का साया।

जाग, छोड़ जग की मोह-माया।

मैं हूँ हमेशा साथ तेरे, कर बंदगी।

ख़ुशगवारी से जी भर, जी ले ज़िंदगी।

Goodbye!

Goodbyes are only for those

who love with their eyes,

Because for those who love

with heart and soul there is

no such thing as separation.

~~Rumi

#TopicByYourQuote

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है!

खोने का डर क्यों? साथ क्या लाए थे।

क्या कभी बिना डरे जीने कोशिश की?

तब तो फ़र्क़ समझ आएगा।

इस जहाँ में आए, सब यहाँ पाए।

सब यही छोड़ जायें।

यही कहती है ज़िंदगी।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है।

एक बार ज़िंदगी की बातें मान

कर देखने में हर्ज हीं क्या है?

Topic by yourQuote

जीवन का अर्थ खोजना है

विचलित नहीं होना मन मेरे

विचलित नहीं होना मन मेरे, देख कफ़न का सफ़ेद नूर।

यह तो है राह-ए-सुकून, दुनिया के दुःख-दर्द से दूर।

होते हैं कई बदकिस्मत बे-कफ़न

होते है कुछ जीते-जी मद में चूर।

भूल जाते है ज़िंदगी है रूहानियत,

समझदारी है, नही रखने में ग़ुरूर।

कफ़न में जेब नहीं होती, यह है मशहूर।

कर्मों की वसीयत होती है रूह पर ज़रूर।

#TopicByYourQuote

तन्हा तन्हा सफ़र

जहान में आए तन्हा,

जाना है यहाँ से तन्हा।

तन्हाई अकेलापन नहीं, है एकांत।

ग़र मिलना है ख़ुदा से, ख़ुद से।

तन्हाईयाँ हीं मुलाक़ात हैं करातीं।

अक्सर जीवन का सफ़र होता है क़ाफ़िले में,

फिर भी होती हैं दिल में तनहाइयाँ।

मिलो सबों से,

पर करो अपने साथ सफ़र।

ना जाने क्यों ख़ूबसूरत तन्हाईयाँ हैं बदनाम।