सूक्ष्म तरंगें! शुभ योग दिवस!

दुनिया सागर है ऊर्जा और तरंगो का। सृष्टि शुरू हुई कम्पन और तरंगों से। हम सब भी सूक्ष्म तरंगें हैं। जिस घड़ी, जिस पल, जिस दिन, ब्रह्मांड और हमारे कंपन….. फ़्रीक्वेंसी का योग हो जाएगा, हम एकसार हो जाएँगे और ब्रह्मांड के अनमोल राज़ों से रूबरू होने लगेंगे। हमारी तरंगे हैं हमारे विचार, हमारे भाव – सकारात्मक या नकारात्मक। प्रेम भर देगा प्रेममय ऊर्जा, नफ़रत भर देगा नकारात्मकता। ग़र बदल लिया दिल, दिमाग़ रूह की सोंच, ब्रह्मांड के मधुर गीत के साथ एकलय हो जाएँगें।

All things in our universe are constantly in motion, vibrating. Even objects that appear to be stationary are in fact vibrating, oscillating, resonating, at various frequencies.

HAPPY YOGA DAY!!

इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

दिल, दिमाग़ और रूह mind, Body, Soul

दिमाग़ हमेशा तर्क खोजता है क्योंकि दिमाग़ और ईगो साथी हैं।

रूह जो संदेश देता है दिल को, उसे वही भाता है

क्योंकि दिल और रूह साथी हैं।

दिल-औ-दिमाग़ के बीच जंग,

यह है दुनियावी और रूहानियत कश्मकश।

ग़र दिल-दिमाग़-आत्मा एक हो जाएँ।

जीवन का अर्थ दिखने लगेगा।

नज़रों के सामने छाया धुआँ-धुँध छँटने लगेगा।

जीवन यात्रा की लौकिक और आलौकिक राहें नज़र आने लगेंगीं।

Mind-body-soul – struggle of thoughts are actually struggle of spirituality and worldly views.

One of the best thing I did for myself !

I learned to live easiest existence –

With inner peace and harmony for myself.

No one is allowed to destroy our

inner peace, as no one can bring peace to us.

I learned it late, but believe me -it’s better late than never.

Topic by YouQuote – One of the best thing I did for myself !

इश्क़

कुछ मोहब्बतें

जलतीं-जलातीं हैं।

कुछ अधुरी रह जाती हैं।

कुछ मोहब्बतें अपने

अंदर लौ जलातीं हैं।

जैसे इश्क़ हो

पतंग़े का चराग़ से,

राधा का कृष्ण से

या मीरा का कान्हा से।

इंद्रधनुष

दिव्य प्रेम के जश्न,

रास में डूब,

राधा इंद्रधनुष के रंगों से

नहा कर बोली कान्हा से –

हम रंगे हैं रंग में तुम्हारे।

रंग उतारता नहीं कभी तुम्हारा ।

कृष्ण ने कहा- यह रंग नहीं उतरता,

क्योंकि

राधा ही कृष्ण हैं और

कृष्ण ही राधा हैं।

गोपाल सहस्रनाम” के 19वें श्लोक मे वर्णित है कि महादेव जी देवी पार्वती जी को बतातें है कि एक ही शक्ति के दो रूप है – राधा और माधव(श्रीकृष्ण)।यह रहस्य स्वयं श्री कृष्ण ने राधा रानी को भी बताया। अर्थात राधा ही कृष्ण हैं और कृष्ण ही राधा हैं।

ध्वनियाँ

ध्वनियाँ मानो तो शोर हैं,

जानो तो संगीत हैं।

नाद साधना हैं।

मंत्र हैं।

ॐ है हर ध्वनि का आधार।

ध्वनियों को ज्ञान से सजा दो,

तो ध्वनियाँ मंत्र कहलातीं हैं।

इन मंत्रों में माधुर्य, सुर,

ताल, लय मिला दो

तो संगीत बन जातीं हैं।

जो रूह में गूंज आध्यात्म

की राहें खोलतीं है।

ब्रह्मांड का हर आयाम

खोलतीं हैं।

ऊपरवाले को पाने का

मार्ग खोलतीं हैं।

कंकर से शंकर

कल तक कंकर था।

तराश कर हीरा बन गया।

कल तक कंकर था।

बहती नर्मदा में ,

तराश कर शंकर बन गया।

तराशे जाने में दर्द है,

चोट है।

पर यह अनमोल बना देता है।

इनायत

इनायत

अँधेरे पल हो या उजाले,

ज़िंदगी की सारी लड़ाईयाँ

हम ने तुम्हारे भरोसे लड़ी,

तुम्हारी रज़ा और

इनायत के साये में।

ना किया तुमने

कभी कोई वादा,

पर दर्मियान हमारे-तुम्हारे

भरोसे का वो रिश्ता है

कि तुमने कभी

निराश नहीं किया।

देवत्व की दिव्यता ( डिग्निटी डिविनिटी)

Dignity Foundation hosted digital event of 2021, opting for the theme to be “spirituality. This video is included in Dignity Divinity, Part 1। Its also available on youtube.

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चले थे शिकायतों की पोटली ले ऊपर वाले के पास.
आवाज आई,
एहसान फ़रामोश ना बनो.
तुम्हारा अपना क्या है?
ज़िंदगी? तन? धन? या साँसे?
कुछ भी नहीं।
सब मिला है तुम्हें
दाता से उधार, ऋण में. 
बस हिफ़ाज़त से रखो.
जाने से पहले सब वापस करना है.
 

 

 मैंने नजरें उठाई, खुले विस्तृत नीले आकाश की ओर देखा और ऊपर वाले से पूछा। ईश, रात में सोने से पहले और सुबह उठने के बाद तुमसे बातें करती हूं। हर तरफ तुम्हारी ही आभा बिखरी दिखती है.  अपनी हर परेशानी  और कामना तुम्हें बताती हूं। अब तुम्हारे देवत्व और दिव्यता के बारे में क्या कहूं?  तुम्हें परिभाषा में बांधना असंभव है।तुम मेरे लिये क्या हो? तुम्हीं बताअो। 

 ऊपर वाले ने जवाब दिया – “जो मैं हूं वह तुम हो. तुम मेरा ही अंश हो। तुम्हारी यात्रा मुझ तक पहुंचने की है. चाहे जो भी राह या धर्म अपना लो. योग, प्राणायाम, ध्यान जिस विधि मुझे पा लो. मेरी हर रचना में मुझे ही देखो, यही मेरी सबसे बड़ी उपासना है।

हमने  कहा – अगर तुम और हम एक ही हैं. तब तुमने मुझे इतना गहरा आघात, इतनी चोटें क्यों दीं? जानते हो ना,  जिंदगी के मझधार में हमसफर का खोना कितना दुखदाई है। ऊपरवाला थोड़ा हिचकिचाया। फिर वह धीरे से मुस्कुराया और बोला – यह जीवन यात्रा है। इसमें   जन्म-मृत्यु,  दुख-सुख तो लगा ही रहेगा। राम और कृष्ण बन कर मैं भी तो इनसे गुजरा हूं। सच कहो तो, मैं तुम्हें तराश रहा था। ठीक वैसे जैसे तराश कर हीं पाषाण या संगमरमर से कलात्मक कलाकृति बनती है। जीवन का हर चोट बहुत कुछ सिखाता है. आत्मा और परमात्मा के करीब लाता है। अपने अंतर्मन के अंदर यात्रा करना सिखाता है. बस टूटना नहीं, मजबूत बने रहना अौर याद रखना –

When the world pushes you to your knees,
you’re in the perfect position to pray. 
Wherever you are,
and whatever you do,
be in love with me. 

 

डिग्निटी फाउंडेशन ने “आध्यात्मिकता” 2021  पर वीडियो आमंत्रित किया  था। मेरे इस वीडियो का चयन “डिग्निटी डिविनिटी -भाग 1” मे किया गया। यह यूट्यूब पर उपलब्ध है।