इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

मैं या तुम

मुझे हमेशा लगा

– यह तो मैं हूँ।

गौर किया,

तब पाया।

यह तो तुम हो,

मुझ में समाए।

हाथ पकड़ कर !

दिया तुमने दर्द औ तकलीफ़।

ज़रूर कुछ सिखा रहे हो,

कुछ बता रहे हो।

डिग्री नहीं, सच्चे सबक़ नज़रों

के सामने ला रहे हो।

जानते हैं गिरने ना दोगे।

हाथ पकड़ कर चलना सीखा रहे हो।

खामोशी

ख़ामोशी की क़दर करने वाले लोग,

हर लम्हें जीते हैं।

सही वक़्त मिले, दिल मिलें।

गुलिस्ताँ में गुलाब से लगाने वाले

अपने जैसे लोग मिलें।

दिल की बातें दिलों तक जाए।

तब कम बोलने वाले भी क्या ख़ूब बोलते हैं।

Psychological Fact- Quiet people are actually very talkative around the right people.

ज़िंदगी के रंग -228

ज़िंदगी रोज़ एक ना एक

सवाल पूछती है।

सवालों के इस पहेली में

उलझ कर, जवाब ढूँढो।

तो ये सवाल बदल देती है।

ज़िंदगी रोज़ इम्तहान लेती है।

एक से पास हो या ना हो।

दूसरा इम्तहान सामने ला देती है।

अगर खुद ना ले इम्तहान,

तो कुछ लोगों को ज़िंदगी में

इम्तहान बना देती है।

बेज़ार हो पूछा ज़िंदगी से –

ऐसा कब तक चलेगा?

बोली ज़िंदगी – यह तुम्हारा

नहीं हमारा स्कूल है।

तब तक चलेगा ,जब तक है जान।

बस दिल लगा कर सीखते रहो।

ज़िंदगी के रंग – 225

हर दिल में कितने

ज़ख़्म होते हैं….

ना दिखने वाले।

कुछ चोट, समय के

मरहम से भर जातें हैं।

कुछ रिसने वाले

नासूर बन, रूहों तक

उतर जातें हैं।

धीरे-धीरे ज़िंदगी

सिखा देती है,

दिल में राज़ औ लबों

पर मुस्कुराहट रखना।

अधूरी मुहब्बत

अधूरी मुहब्बतों की

दास्ताँ लिखी जाती है।

राधा और कृष्ण,

मीरा और कान्हा को

सब याद करते हैं।

किसे याद है कृष्ण की

आठ पटरानियों और

16 हजार 108 रानियों की?

बाती और चराग

बाती की लौ भभक

कर लहराई।

बेचैन चराग ने पूछा –

क्या फिर हवायें सता रहीं हैं?

लौ बोली जलते चराग से –

हर बार हवाओं

पर ना शक करो।

मैं तप कर रौशनी

बाँटते-बाँटते ख़ाक

हो गईं हूँ।

अब तो सो जाने दे मुझे।

नाराज़ हूँ तुमसे ! ( शुभ जन्माष्टमी -30.08.2021)

“The only way you can conquer me is through Love and there I am gladly conquered” says Krishna in The Bhagavad Gita. The only way to win people is by spreading love and getting rid of hatred, anger, and vengeance.

Bhagavad Gita

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 नाराज़ हूँ तुमसे !
पर आसरा भी तुमसे चाहिए!
वृंदावन और जमुना चाहिए।
माखन चाहिए और चाहिए,
 धनवा से ली तुम्हारी, 
बांसुरी की मधुर तान 
 होली में मिले हम तुम पहली बार…..
….गोकुल और बरसाना का वह फाग चाहिए।
फूलों से सजे  तुम अौर मैं  (राधा ) 
वह शरद  पूर्णिमा  की 
रास  चाहिये।
तुला दान के एक तुला पर बैठे  तुम,
दूसरे पलड़े में हलके पङते हीरे जवाहरात के ढेर 
से व्यथित मैया यशोदा।
 ईश्वर को तौलने की कोशिश में लगे थे सब।
यह  देख  तुम्हारे चेहरे पर  छा गई  शरारती मुस्कान ।
वह नज़ारा चाहिये।
मैंने ..(राधा)  हलके पङे तुला पर अपनी बेणी से निकाल एक  फूल रखा
अौर वह झुक धरा से जा लगा
और तुम्हारा पलड़ा ऊपर आ गया।
 स्नेह पुष्प  से,
तुम्हे पाया जा सकता है।
यह बताता वह पल चाहिये।
मुझे छोड़ गये
नाराज़ हूँ तुमसे,
पर तुम्हारा हीं साथ चाहिए।
नाराज़ हूँ तुम से,
पर प्रेम भी तुम्हारा हीं चाहिए।