33 उत्कृष्ट रचनाकारों और 95 बेहतरीन कविताओं से सजा नया काव्य-संग्रह “कतरा-कतरा ज़िंदगी का” (मुख्य संपादिका: डॉ. रेखा रानी, सह-संपादक: आशीष कुमार ‘शैंकी’) अब NotionPress पर उपलब्ध है। जीवन के अनछुए एहसासों को महसूस करने के लिए आज ही अपनी प्रति ऑर्डर करें!

Rate this:

कतरा-कतरा ज़िंदगी का - डॉ. रेखा रानी

🌟 नई पुस्तक 🌟

‘कतरा-कतरा ज़िंदगी का – दिल के अनछुए कोने’

ज़िंदगी केवल साँसों के चलने और समय के गुज़रने का नाम नहीं है। यह अनगिनत अनुभवों, अनकही भावनाओं, टूटते-बनते रिश्तों, संघर्षों, स्मृतियों और उम्मीदों से बुनी हुई एक खूबसूरत यात्रा है। इसी यात्रा के अनछुए एहसासों को शब्दों में पिरोकर हम आपके लिए लाए हैं हमारी नई काव्य-प्रस्तुति— “कतरा-कतरा ज़िंदगी का”।

📖 पुस्तक एक नज़र में

  • 📌 पुस्तक का नाम: कतरा-कतरा ज़िंदगी का
  • 📌 उप-शीर्षक: दिल के अनछुए कोने
  • 🖋️ मुख्य संपादिका: डॉ. रेखा रानी
  • 🖋️ सह-संपादक: आशीष कुमार (‘शैंकी’)
  • 📚 विधा (Genre): कविता (Poetry Anthology)
  • 📖 प्रारूप (Format): पेपरबैक (Paperback)
  • ✨ कुल रचनाएँ: 95 कविताएँ
  • 👥 सह-लेखक: 33 उत्कृष्ट रचनाकार

✨ पुस्तक के बारे में

ज़िंदगी एक पूरी कहानी नहीं, बल्कि अनगिनत अनुभवों, अनकहे एहसासों, अधूरे ख़्वाबों और बिखरी स्मृतियों का संगम है। कभी रिश्तों की गर्माहट सुकून देती है, तो कभी अपनों की बेरुख़ी ख़ामोशी छोड़ जाती है। प्रेम, विरह, संघर्ष और उम्मीद—इन्हीं से जीवन के रंग बनते हैं।

‘कतरा-कतरा ज़िंदगी का’ 33 रचनाकारों का एक बहुरंगी काव्य-संकलन है, जिसमें 95 कविताएँ जीवन को अनेक दृष्टिकोणों से देखने और महसूस करने का अवसर देती हैं।

इन रचनाओं में प्रेम और समर्पण, रिश्तों की जटिलता, अकेलापन, स्मृतियाँ और आत्ममंथन हैं। कहीं माँ का स्नेह और पिता की छाया है, तो कहीं स्त्री-संघर्ष, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएँ। आध्यात्मिकता, भक्ति, प्रकृति, विश्वास, जीवन-दर्शन और आशा के स्वर भी इस संग्रह को समृद्ध बनाते हैं।

‘कतरा-कतरा ज़िंदगी का’ — हर क़तरे में एक एहसास, हर एहसास में एक कहानी!

✍️ संपादकीय दृष्टि और हमारे 33 रचनाकार

एक उत्कृष्ट काव्य-संग्रह कभी भी किसी एक व्यक्ति के विचारों तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह कई भिन्न-भिन्न हृदयों, अनुभवों और जीवन-दृष्टियों का एक खूबसूरत संगम होता है।

इस संपूर्ण रचना-क्रम को एक सूत्र में पिरोने का भगीरथ प्रयास मुख्य संपादिका डॉ. रेखा रानी और सह-संपादक आशीष कुमार द्वारा किया गया है। डॉ. रेखा रानी जहाँ अपने 15 से अधिक प्रकाशित उपन्यासों, मनोविज्ञान और बाल-परामर्श के अथाह अनुभवों के साथ इसे एक परिपक्व दृष्टि प्रदान करती हैं, वहीं आशीष कुमार की दार्शनिक सोच और यथार्थवादी लेखनी इसे एक नई ऊर्जा देती है।

इस पुस्तक को जिन उत्कृष्ट और विविधतापूर्ण रचनाकारों ने सजाया है, वे इस प्रकार हैं:

विजय वर्मा, तनुश्री, डॉ. नमिता श्रीवास्तव, नम्रता सोनी, सुभाष चंद्र मेहता, ज्योति जिन्दल, प्रतिमा सिन्हा, चाँदनी सहाय, अपूर्वा कानिटकर, हरिणा पंड्या, श्रेया, राजनीता प्रसाद, उर्मी, राही विनायक करंजे, बबीता सिन्हा, सच्चिदानंद ‘ॐ पथिक’, मनीषा, रवींद्र नैय्यर, डॉ. कल्याणलक्ष्मी चित्ता, अपर्णा जे., वैष्णवी, मनीष खरे, निम्मी बत्ता, दिग्विजय शुक्ल, दिनेश गुप्ता, निर्मला मुकुंद महाजन, डॉ. कविता कुमारी, विजयंत कुमार सिन्हा, तनुश्री डी. घोष (‘तरुछाया’), डॉ. राजीव कुमार मिश्रा, और श्वेता प्रभा।

🛒 अपनी प्रति आज ही ऑर्डर करें!

आइए, इन कविताओं में जीवन के कुछ क़तरों को महसूस करें—शायद इनमें आपको अपनी कहानी, अपना एहसास या मन की अनकही आवाज़ मिल जाए।

पेपरबैक (Paperback) मूल्य: ₹399 + ₹50 (डिलीवरी)


📚 यहाँ से खरीदें (Buy Now)

(नोट: यह पुस्तक बहुत जल्द Amazon, Flipkart और अंतर्राष्ट्रीय पाठकों के लिए Walmart सहित 150+ देशों में भी उपलब्ध होगी।)

अगर आपको यह काव्य-संग्रह पसंद आए, तो कृपया अपना रिव्यू (Review) और रेटिंग (Rating) देना न भूलें। आपके विचार हमारे रचनाकारों के लिए बहुत मायने रखते हैं! ❤️

गुल्लक – कहानियों की

बच्चों के लिए डॉ. रेखा रानी की नई किताब ‘गुल्लक – कहानियों की’ अब Amazon पर उपलब्ध है! 4 मज़ेदार कहानियों, जादू और अच्छी सीख से भरी यह किताब 6 से 10 साल के बच्चों के लिए एक बेहतरीन उपहार है।

Rate this:


गुल्लक - कहानियों की (डॉ. रेखा रानी)

🎉 खुशखबरी! 🎉

बच्चों के लिए एक बेहद खूबसूरत और सीख देने वाली किताब अब Amazon पर आ गई है! 📚

“गुल्लक – कहानियों की”

✍️ लेखिका: डॉ. रेखा रानी

इस किताब में 4 प्यारी और मज़ेदार कहानियाँ हैं:

  • ⏱️ 1. कबीर के मन की जादू वाली घड़ी
  • 🦋 2. तितलियों के देश में
  • 💖 3. मेरी माँ
  • 🦁 4. जंगल ओलंपिक

बच्चों को इस किताब में क्या मिलेगा?

✨ जादू, रोमांच और ढेर सारी मस्ती

💖 परिवार और अपनों के लिए प्यार

🦋 प्रकृति और नन्हे जीवों के प्रति दया

💪 खुद पर भरोसा रखने और मेहनत करने की सीख

यह किताब 6 से 10 साल के बच्चों के पढ़ने के लिए एक प्यारा संग्रह है। यह आपके बच्चों के लिए एक बेहतरीन उपहार है।

अपने बच्चों को कल्पना और खुशियों की इस ‘गुल्लक’ के साथ एक नई दुनिया की सैर कराएं! 🌟



🛒 Buy on Amazon

आज ही ऑर्डर करें!

राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान से देश परेशान

क्या राहुल गांधी ने वास्तव में मनुस्मृति को पूरा पढ़ा और समझा है? या यह केवल एक पूर्वनिर्धारित राजनीतिक रणनीति है? द डोज़ियर (The Dossier) में प्रकाशित डॉ. रेखा रानी का यह बेबाक लेख राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान और चयनात्मक राजनीति की पोल खोलता है।

Rate this:

राजनीति / विचार

राहुल गांधी के अधूरे ज्ञान से देश परेशान

लेखिका: डॉ. रेखा रानी | प्रकाशित: 15 अक्टूबर, 2026 | मूल स्रोत: The Dossier (Hindi)

राहुल गांधी और मनुस्मृति - रेखा रानी का लेख
Image: The Dossier

22 अगस्त, 2026 को छात्रों की गहमागहमी के बीच राहुल गांधी ने मनुस्मृति के एक श्लोक के आधार कर पूरे हिंदू धर्म को पितृसत्तात्मक और महिला-विरोधी रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश की। यह अफसोस की बात है दुनिया के प्राचीनतम और सहिष्णुतम सनातन धर्म को नकारात्मक ढंग से चित्रित किया गया। क्या किसी धर्म और उसकी हजारों वर्ष पुरानी परंपरा का मूल्यांकन इस तरह एकपक्षीय ढंग से किया जाना उचित है? इस कार्यक्रम की आड़ में प्राचीन धार्मिक ग्रंथ मनुस्मृति को कटघरे में खड़ा करना अधूरे ज्ञान और चयनित राजनीति का उदाहरण है।

“क्या राहुल गांधी ने मनुस्मृति वास्तव में पूरा पढ़ा और समझा है? जिसके आधार पर वे सनातन के धार्मिक-सांस्कृति परंपरा पर टिप्पणी कर रहे हैं?”

उनका उद्देश्य क्या है? वास्तव में राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। इसे महिलाओं की स्वतंत्रता के विरुद्ध बताया। परंतु उसी मनुस्मृति में महिलाओं के सम्मान को लेकर कहा गया है—

“यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः.
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥”

(जहां नारियों का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं; और जहां उनका सम्मान नहीं होता, वहां किए गए सभी शुभ कर्म निष्फल हो जाते हैं।)

महात्मा गांधी के विचार और ऐतिहासिक संदर्भ

यहां यह चर्चा भी महत्वपूर्ण है कि दुनिया में शायद ही किसी अन्य धर्म में देवताओं के साथ-साथ इतनी देवियां पूजी जाती हैं, जितना सनातन धर्म में। महिलाओं की स्वतंत्रता और गरिमा का विचार सनातन धर्म के मूल में है।

स्वयं महात्मा गांधी मनुस्मृति के उपलब्ध पाठ के अंतर्विरोध और बाद में जोड़ी गई सामग्री की संभावना पर प्रश्न उठा चुके हैं। वे कह चुके हैं कि जब किसी के पास इसकी मूल प्रति उपलब्ध नहीं है, तब आज मनुस्मृति के किसी एक श्लोक को अंतिम और निर्विवाद सत्य मानकर प्रस्तुत करने से पहले क्या उसके पाठ-इतिहास और विभिन्न पांडुलिपियों की जानकारी लेना आवश्यक नहीं है?

महात्मा गांधी ने 4 मई 1928 को पी. टी. पिल्लै को लिखे पत्र में लिखा था (संपूर्ण गांधी वाङ्मय, खंड 26, पृष्ठ 348) – “मनुस्मृति में बहुत कुछ प्रशंसनीय है, जबकि उसके वर्तमान स्वरूप में कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता।”

चयनित राजनीति और संवाद की भाषा

चर्चा से पहले ज्ञान आवश्यक है। राहुल गांधी ने विवादित बात कही। अतः उन्हें स्रोत और प्रमाण को सार्वजनिक करना चाहिए। राहुल गांधी को बताना चाहिए कि उन्होंने मूल संस्कृत अथवा अनुवाद कौन-सा संस्करण पढ़ा। क्या उन्हें मनुस्मृति की विभिन्न पांडुलिपियों और उसके ऐतिहासिक विकास की जानकारी है?

क्या राहुल गांधी नहीं जानते धर्म और धार्मिक ग्रंथ चर्चा अत्यंत संवेदनशील विषय हैं? प्राचीन मनुस्मृति को उसके ऐतिहासिक संदर्भ से काटकर, केवल चुनिंदा अंशों के आधार पर प्रस्तुत करना समाज में अनावश्यक विवाद और असहजता पैदा कर सकता है। यहां राहुल गांधी पर यह मुहावरा बिल्कुल सही बैठता है – ‘अध जल गगरी छलकत जाए।’

कार्यक्रम मुख्यतः छात्राओं से संवाद था। राहुल गांधी ने अपनी बात अंग्रेजी में रखी। जब विषय भारतीय समाज, धर्म, महिलाओं और युवाओं के जीवन से जुड़ा हो, तब ऐसी भाषा चुनना उचित होता, जिसे देश की बड़ी आबादी सहजता से समझ सके। ऐसे संवेदनशील विषय पर संवाद हिंदी और स्थानीय भारतीय भाषाओं में अधिक व्यापक हो सकता था।

समान महिला अधिकार और दोहरे मापदंड

भारत में आज भी मुस्लिम समुदाय में कुछ व्यक्तिगत और पारिवारिक मामलों में शरीयत लागू है, जिसके अंतर्गत विवाह, तलाक, भरण-पोषण आदि का उल्लेख है। भारत सरकार ने तीन तलाक पर कानूनी सुधार, हज में मेहरम की अनिवार्यता हटाना जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

तो फिर प्रश्न स्वाभाविक है — यदि उद्देश्य महिलाओं की स्वतंत्रता, समानता और गरिमा की रक्षा करना है, तो इन वास्तविक और वर्तमान कानूनी-सामाजिक प्रश्नों पर भी समान गंभीरता से चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए? राहुल गांधी ने महिला सशक्तीकरण से जुड़े इन महत्वपूर्ण विषयों को छोड़कर मनुस्मृति को ही आलोचना का केंद्र क्यों बनाया?

राहुल ने महिला सशक्तीकरण की कसौटी सबके लिए समान क्यों नहीं रखी? स्पष्ट है कि राहुल गांधी सुधारात्मक नहीं, आलोचना राजनीति कर रहे हैं। वे सभी समुदायों के महिलाओं के अधिकारों के लिए समान रूप से मुखर नहीं हैं।

मनुस्मृति और वैश्विक दृष्टिकोण

मनुस्मृति पर पश्चिमी विद्वानों और लेखकों की हमेशा गंभीर रुचि रही है:

  • फ्रेडरिक नीत्शे (जर्मन दार्शनिक): “बाइबिल को बंद करो और मनुस्मृति को खोलो। मनुस्मृति का दृष्टिकोण बेहद स्वस्थ, विस्तृत और जीवन को सकारात्मक रूप से स्वीकार करने वाला है।”
  • सर विलियम जोन्स (ब्रिटिश कानूनविद): “मनुस्मृति एक अत्यंत प्राचीन, व्यापक और अद्भुत कानूनी तथा सामाजिक ग्रंथ है।”
  • मॉरिस मेटरलिंक (नोबेल विजेता): “मनुस्मृति में दी गई ब्रह्मांड की उत्पत्ति और आत्मा की विकासवादी यात्रा के विचार आधुनिक विज्ञान की खोजों से बहुत मेल खाते हैं।”

निष्कर्ष: विपक्ष की जिम्मेदारी

देश को विभाजित करने की राजनीति आज के भारत को स्वीकार्य नहीं है। राहुल गांधी नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक पद पर हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति से जुड़ा रहा है, इसलिए उनके वक्तव्यों की जिम्मेदारी और भी अधिक है।

विपक्ष का काम केवल सरकार का विरोध कर देश में अनावश्यक अशांति व भ्रम फैलाने का नहीं है। किसी भी राष्ट्र को मजबूत बनाए रखने के लिए भीतर की चुनौतियों से निपटना उतना ही जरूरी है जितना सीमाओं की रक्षा करना। देश की आंतरिक सुरक्षा बाहरी सुरक्षा जितनी ही महत्वपूर्ण है।

🖋️

डॉ. रेखा रानी

लेखिका, परामर्शदाता और पूर्व प्रोफेसर हैं। इनके लेख विभिन्न प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से प्रकाशित होते रहते हैं।

सुनहरा अवसर!

सभी कवियों और रचनाकारों के लिए सुनहरा अवसर! डॉ. रेखा रानी सहाय की आगामी पुस्तक “कतरा-कतरा ज़िंदगी का” में अपनी उत्कृष्ट कविता निःशुल्क प्रकाशित करवाएं। अपने शब्दों को दें एक नया और प्रतिष्ठित मंच।

Rate this:

सुनहरा अवसर - कतरा-कतरा ज़िंदगी का

📢 सुनहरा अवसर!

सभी रचनाकारों और कवियों के लिए…

हर इंसान के दिल में एक कोना ऐसा होता है, जहाँ कुछ यादें, कुछ जज़्बात और कुछ अनकही कहानियाँ छिप कर रहती हैं। हम उन्हीं एहसासों को एक किताब में पिरोने जा रहे हैं।

हमारी आगामी पुस्तक

“कतरा-कतरा ज़िंदगी का”

में अपनी कविता प्रकाशित करवाएं!

क्यों जुड़ें हमारे साथ?

  • 🌿
    यह एक निःशुल्क (Free) साहित्यिक पहल है।
  • 👥
    आपके शब्दों को एक नया और प्रतिष्ठित मंच मिलेगा।
  • 📖
    देश के बेहतरीन रचनाकारों के साथ आपकी कविता भी प्रकाशित होगी!

“अपनी कलम उठाईए… अपने दिल के अनछुए कोनों को पन्नों पर उतरने दीजिए…” 🖋️❤️

अपनी एक उत्कृष्ट कविता और अपना संक्षिप्त परिचय हमें यहाँ भेजें:


✉️ rekharanisahay@gmail.com

🗓️ अंतिम तिथि:
30 अक्टूबर!

अधिक जानकारी के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़ें:

WhatsApp QR Code


💬 WhatsApp ग्रुप ज्वाइन करें

भरम

जिंदगी सबसे बड़ी गुरु है, जो हमें तब तक सबक सिखाती है जब तक हम ‘भरम’ से बाहर निकलकर असल ‘इल्म’ (ज्ञान) नहीं सीख लेते। डॉ. रेखा रानी की एक बेहद गहरी और प्रेरणादायक कविता।

Rate this:

Bharam - Dr Rekha Rani Poetry

भरम

जिंदगी गुरु बन, तब तक सबक दोहराती रही,
हमें तराशने और खोने-पाने के
भरम से निकालने के लिए,
जब तक इल्म सीख न लिया।

~ Dr. Rekha Rani ♥️

पढ़ाकू साथी पुणे

नवपल्लव बुक्स द्वारा डॉ. रेखा रानी सहाय जी को साहित्य, कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ‘पढ़ाकू साथी पुणे’ के रूप में चयनित किया गया है। जानिए उनके तीन दशकों के साहित्यिक सफर और इस विशेष पहल के बारे में विस्तार से।

Rate this:

साहित्य

नवपल्लव बुक्स प्रस्तुत करता है: आपकी “पढ़ाकू साथी पुणे” – डॉ० रेखा रानी सहाय जी

साहित्य, कला और संस्कृति को पुणे ज़िले में आगे बढ़ाने की दिशा में एक नया कदम।

Profile

रेखा रानी

September 2026

डॉ० रेखा रानी सहाय जी - पढ़ाकू साथी पुणे

नमस्कार साथियों,

हमें बताते हुए बहुत खुशी हो रही है कि नवपल्लव बुक्स द्वारा आयोजित ‘पढ़ाकू साथी’ कड़ी में पुणे, महाराष्ट्र से पढ़ाकू साथी के रूप में “डॉ. रेखा रानी सहाय” जी का चुनाव किया गया है। 6 सितंबर 2026 से आप “पढ़ाकू साथी पुणे” के रूप में जानी जा रही हैं। डॉ. सहाय जी संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद एवं लेखिका हैं, जो लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय हैं。

पढ़ाकू साथी पुणे घोषणा

मनोविज्ञान में पीएच.डी. प्राप्त डॉ. सहाय जी ने लगभग दो दशकों तक शिक्षण, परामर्श और लेखन के क्षेत्र में कार्य किया है। पुस्तकों के लेखन एवं अनुवाद में भी योगदान दिया है। वे कविता, कहानी, बाल साहित्य, संस्मरण, आलेख, निबंध, पुस्तक समीक्षा और अनुवाद सहित विभिन्न विधाओं में लेखन करती हैं। उनकी रचनाएँ विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं और साहित्यिक मंचों पर प्रकाशित हुई हैं।

डॉ. सहाय जी जल्द ही नवपल्लव बुक्स के साथ मिलकर पुणे ज़िले की साहित्य, कला और संस्कृति को और आगे बढ़ाने व संजोने के क्रम में हम सबके साथ रुबरू होंगी। तब तक के लिए @padhakusathi, @navpallavbooks और “पढ़ाकू साथी पुणे” डॉ. सहाय जी को बधाई दीजिए, साथ ही साथ फ़ॉलो करके जुड़ जाइए।

🌟 पढ़ाकू साथी को मिलने वाली सुविधाएँ:

  • पढ़ाकू साथी का Tote Bag उपहार स्वरूप।
  • वेरिफाइड प्रमाण पत्र (ईमेल द्वारा)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट पर पढ़ाकू साथी की प्रोफ़ाइल (लेखक कोना कॉर्नर में उपलब्ध)।
  • नवपल्लव की वेबसाइट navpallavbooks.com व अन्य प्लेटफ़ॉर्म पर रिडीम होने वाले extra छूट शॉपिंग कूपन।
  • नवपल्लव के सभी आयोजनों (बुक फेयर, साहित्यिक आयोजन, निजी आयोजन) में अपने ज़िले से पढ़ाकू साथी का अपना प्रतिनिधित्व।
  • पढ़ाकू साथी का अपने ज़िले के साहित्यिक, कलात्मक एवं संस्कृति से सम्बन्धित कार्यों में आजीवन नवपल्लव की सहभागिता।
  • अन्य ज़रूरी साहित्यिक आयोजनों में पढ़ाकू साथी व नवपल्लव बुक्स का साथ रहने की ज़िम्मेदारी।

नवपल्लव बुक्स ऐसे साथियों का उत्साहवर्धन करके साहित्य, समाज और संस्कृति का सम्मान कर रहा है, जिसके केंद्र में आपका शहर, साहित्य, संस्कृति और उस शहर के सम्मानित लेखकगण शामिल हैं। आप भी साहित्य का प्रचार-प्रसार करके और नवपल्लव बुक्स से जुड़कर अगला ‘पढ़ाकू साथी’ बन सकते हैं।

सुविधाएँ

विशेष सूचना

📢 विशेष सूचना:

“अभी तक नवपल्लव बुक्स ने भारत के 36 ज़िलों में, 10 राज्यों से 39 पढ़ाकू साथियों का चयन किया है। अगर आप भी साहित्य, कला और संस्कृति के लिए ‘पढ़ाकू साथी’ अभियान से जुड़ना चाहते हैं, तो आपका स्वागत है। अभी जुड़ जाइए!”

धन्यवाद
टीम, नवपल्लव बुक्स
(@padhakusathi | @navpallavbooks)

Profile

डॉ. रेखा रानी सहाय

संवेदनशील साहित्यकार, मनोवैज्ञानिक, शिक्षाविद् एवं लेखिका। लगभग तीन दशकों से साहित्य-सृजन में सक्रिय एवं नवपल्लव बुक्स द्वारा चयनित “पढ़ाकू साथी पुणे”。

कुछ गुल खिले और बिखर गए !

जीवनसाथी को खोने के दर्द, अनमोल यादों और फिर से उठ खड़े होने की उम्मीद को दर्शाती डॉ. रेखा रानी की हृदयस्पर्शी कविता “कुछ गुल खिले और बिखर गए”।

Rate this:

कविता पाठ (मेरी आवाज़ में)

कुछ गुल खिले

कुछ गुल खिले और हवा में बिखर गए! उनकी ख़ुशबुओं को ना पकड़,
वे फ़िज़ा में घुल गए।

हम न किसी के साथ आए थे,
न साथ किसी के जाएँगे।
न साथ खिले थे,
न साथ मुरझाएँगे।

कुछ गुल खिले और हवा में —-बिखर गए।

न भूल थी बयार की,
न भूल थी नसीब की।
न डाल दोष हवा पर,
न डाल दोष बूँदों पर।

अख़्तियार न था साँसों पर,
आग़ाह न था मुस्तकबिल का,
नावाक़िफ़ थे आने वाले कल से।

फूलों की इक डाली हवा से लचकी,
कई ज़िंदगियों को जुंबिशें दे,
पंखुड़ियाँ बिखर गईं। 

कुछ गुल खिले और हवा में बिखर गए।

कई पल बिना आवाज़
युगों से गुज़र गए,
और हम बिखर गए।

न पूछ बार–बार वो मंज़र,
फिर ले जाते हैं
उसी ग़म के समंदर।

किसने सोचा था—
बहारें आई हैं,
पतझड़ भी आएगा।

हम सँवरा करते,
आईना सँवारा करता था।
अब ख़ुद ही ख़्वाबों की दुकानें सजाते है,
ख़ुद ही ख़रीदार बन जाते हैं।

ज़िंदगी हिसाब है
वफ़ाओं, जफ़ाओं
और ख़ताओं का।

जो सदाएँ गूँजती हैं,
गूँजने दे। 

फिर बहारें आएँगी,
गुलशन सजाएँगी।
आफ़ताब फिर आएगा,
गुनगुनी धूप की चादर फैलाएगा।

कुछ गुल खिले और हवा में बिखर गए!
उनकी ख़ुशबुओं को न पकड़।
जो बिखर गए,
वो बिखर गए।

रंजो–मलाल में डूब नहीं,
चलानी है कश्ती ज़िंदगी की।
न ग़म कर,
न कम कर रौशनी अपनी।
फ़िज़ा में फैलने दे,
ख़ुशबू अपनी। 

न ग़म कर,
न कम कर रौशनी अपनी।
फ़िज़ा में फैलने दे
ख़ुशबू अपनी। 

कुछ गुल खिले और हवा में बिखर गए!
उनकी ख़ुशबुओं को न पकड़,
वे फ़िज़ा में घुल गए।  

“मेरी कविता में गुलों की खुशबू, फूलों की डाली, उनका बिखरना जीवन की क्षणभंगुरता के बारे में है। यादें, भावनाएँ और अनुभव अनमोल होती हैं। अक्सर दिल की कसक अंतरात्मा की गहराईयों से निकल लफ़्ज़ों में प्रतिबिम्ब हो कविता बन जातीं हैं। धैर्य और साहस से कठिनाइयों का सामना करना हीं जिंदगी है। जीवन–प्रवाह रुकता नहीं। किसी भी हादसे… चोट के बाद ख़ुद से, फिर से खुशियां खोजनी पड़ती है।“

यह कविता मैंने 2018 में मेरे पति के निधन के बाद लिखी थी।

भावपूर्ण अभिव्यक्ति,

डॉ. रेखा रानी

अतृप्त तृष्णा

डॉ. रेखा रानी की मार्मिक कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ अब प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ पत्रिका में प्रकाशित। इंसानी इच्छाओं के इस गहरे जीवन-दर्शन को Amazon Kindle पर पढ़ें।

Rate this:

🎉 📖 ✨

अत्यंत खुशी के साथ साझा कर रही हूँ!

मुझे आप सभी को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मेरी लिखी हुई कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ (Pratigyan) पत्रिका में प्रकाशित हुई है!

साहित्य की इस नई पहचान का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। यह पत्रिका अब Amazon Kindle पर भी उपलब्ध है।

Atript Trishna Poem in Pratigyan Magazine

अतृप्त तृष्णा

हर इंसान आजीवन लड़ता रहता है,

नज़र न आने वाले

कई अनकहे युद्धों से-

कभी ख़ुद से,

कभी ज़माने से,

कभी लोगों से,

और कभी अपनी अतृप्त तृष्णाओं से।


यही तृष्णा

सुकून को मृगतृष्णा बना देती है,

इंसान भूल जाता है,

सफ़र-ए-ज़िंदगी कोई जंग नहीं,

बल्कि वह रूहानी सफ़र है,

जो हर अनुभव से,

हर ज़ख्म से हमें तराशता है।

ताकि हम

ख़ुद को ख़ुद से

बेहतर बना सके।

ताकि सुकून से भरे,

रौशन वजूद के साथ

जीवन के अगले मुकाम का

इस्तक़बाल कर सके।

आप सभी से अनुरोध है कि कृपया नीचे दिए गए लिंक पर जाकर किंडल (Kindle) पर पूरी पत्रिका पढ़ें और अपना प्यार एवं आशीर्वाद दें। 🙏

सधन्यवाद व स्नेह,

डॉ. रेखा रानी

Recognition that Inspires

Honoured to receive recognition from the Central Hindi Directorate, Government of India, for securing Third Prize in the Hindi Essay Writing Competition. A memorable milestone that inspires a deeper commitment to literature and the Hindi language.

Rate this:

Certificate of Recognition - Central Hindi Directorate

✦ ✦ ✦

Honoured by the Government of India

Humbled and honoured to receive this certificate from the Central Hindi Directorate, Government of India, today.

Awarded for securing the Third Prize in the online Hindi Essay Writing Competition, organized on the occasion of the 65th Anniversary of the establishment of the Directorate.

“Grateful for this recognition.”

– Dr. Rekha Rani

जिंदगी के अनदेखें तमगे

काव्य प्रतियोगिता में विजेता रही डॉ. रेखा रानी की हृदयस्पर्शी कविता ‘जिंदगी के अनदेखे तमगे’। यह कविता जीवन के संघर्षों, तकलीफों और मानवता के गहरे पाठ को खूबसूरती से दर्शाती है।

Rate this:

🏆काव्य प्रतियोगिता में विजयी!🏆

मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत खुशी हो रही है कि “India’s Biggest Book Giveaway – काव्य प्रतियोगिता” में मेरी इस कविता को शीर्ष 5 विजेताओं में चुना गया है। आप सभी के प्रेम, प्रोत्साहन और समर्थन के लिए हृदय से आभार!

Poetry Winner Announcement

जिंदगी के अनदेखें तमगे

( कविता – मानवता )

ऊंची पथरीली चट्टानों,
शैल-शिखरों पर उगने वाले
दरख़्तों की जड़े
वक्त की सख्त मार,
तूफानों के थपेड़े सह,
वक्त से पहले जिम्मेदार
गहरी मजबूत हो जाती है।

❖ ❖ ❖

जिंदगी भी कुछ यूं ही,
चोटें, जख्म, तकलीफें दे
फना होने की हद तक आजमाती है।
जो इन तमाम दर्दों से उठकर
आगे बढ़ता है,
उसकी जड़ें भी गहरी, मजबूत हो जाती हैं।
वे दूसरों के संघर्षों को
समझना और सम्मान देना सीख जाते हैं।

❖ ❖ ❖

जीवन के थपेड़े सहकार,
गिर कर भी जो संभल जाएं,
उनके कदमों को फिर
कोई तूफान डिगा नहीं सकता।
बेरहम वक्त की मार से बने
ये जख्म और उनके निशान ही असल में
जिंदगी के पाठ और अनदेखें तमगे हैं।

~ डॉ. रेखा रानी