बेख़ुदी में

क़बूल भी नहीं कर सकते और इनकार भी नहीं कर सकते……

सचमुच देखा था तुम्हें क़रीब अपने.

हाथ भी बढ़ाया छूने के लिए.

तभी नींद खुल गईं और देखा बाहें शून्य में फैलीं हैं.

शायद सपने में घड़ी की सुईयों को पीछे घुमाते चले गए थे.

शायद बेख़ुदी में तुमको पुकारे चले गए थे.

 

Image- Aneesh

पड़ाव

जब भी कहीं डेरा डालना चाहा.

रुकना चाहा.

ज़िंदगी आ कर कानों में धीरे से कह गई-

यह भी बस एक पड़ाव है…

ठहराव है जीवन यात्रा का.

अभी आगे बढ़ना है,

चलते जाना है. बस चलते जाना है.

 

image courtesy – Aneesh

फासले भी मायने रखते हैं !!

हमेशा क़रीब होना हीं सही नही।

बहुत क़रीब से देखने पर पूरे दृश्य को नहीं देखा जा सकता है।

वे धुँधली हो जातीं हैं।

परिदृश्य या घटना का हिस्सा बन कर पूरी बातें नहीं समझी जा सकती हैं.

जैसे चित्र में रह कर चित्र देखा नहीं जा सकता.

थोङे फासले भी मायने रखते हैं।

तारीख़ों में छुपी कहानियाँ

तारीख़ों में छुपी हैं कितनी कहानियाँ.

किसी तारीख़ से जुड़ी होतीं हैं यादें,

किसी से दर्द, किसी से ख़ुशियाँ.

किसी से उम्मीद, आशाएँ और अरमान.

 और कुछ तारीख़ें कब आ कर चली जातीं हैं,

पता हीं नहीं चलता.

ग़ज़ल सी ज़िंदगी…..

सँवरी, ग़ज़ल सी ज़िंदगी जीने की हसरतें

 किसकी नहीं होती? अौर, जो मिला है वही ग़ज़ल है।

यह समझते समझते ज़िंदगी निकल जाती है.

सूरज तो निकलेगा !

टिमटिमाते तारे, जगमगाते जुगनू, दमकता चाँद , नन्हें दीपक की हवा से काँपती लौ, सभी अपनी पूरी ताक़त से रात के अंधेरे का सामना करते हैं. फिर हम क्यों नहीं कर सकते सामान ? सहर तो होगी हीं….सूरज तो निकलेगा हीं….

श्मशान-वैराग्य

एक अोर बहती कलकल गंगा,

तट पर विशाल अश्वत्थ तरु

अौर दूसरी अोर श्मशान काली की 

भव्य प्रतिमा, रक्त रंग

जवा पुष्प माला में । 

घाटों पर बाँसों का स्तुप।

राह किनारे बिकते रामनामी…….

गुजरते उस राह से मन वैराग से  

…..श्मशान-वैराग्य से भर उठता।

पर कितना विचित्र है यह मन?

संसार की नश्वरता का एहसास

वह क्षणिक वैराग्य

जो श्मशान में  संसार की असारता से उत्पन्न होता है,

संसार के मोह-माया में आते, क्षण में हीं

लुप्त भी हो जाता है। 

 

 

वैराग्य – संसार की असारता।

 श्मशान वैराग्य-श्मशान में जाकर  हुआ क्षणिक वैराग्य।

जिंदगी के रंग 14 – कविता

if you experience the love, you have to touch the spirit, not the body.
~ Rumi

 

            भूलने की कुछ आदत सी हो गई है………..

जिंदगी की जद्दोजहद में।

डर लगता है कभी,

अपने आप को हीं न भूल जाऊँ।

अगर कभी तुम्हें भूल गई तो,

शिकवे गिले न करना

               बस धीरे से याद दिला देना  !!!!!!!!!

धुंध- जिंदगी के रंग- 11(कविता) A Tributes -poetry

Etah road accident: School bus collides with truck killing over 20 school kids, dozens injured.( 19th January, 2017)

palash

राह चलते-चलते ,

सामने धुंध छा गया।

धुंधली राह में ङगर खो गया।

हँसते- खिलखिलाते नन्हें-मुन्ने भी

खो गये कोहरे की चादर में।

रह गये बिखरे नन्हें जूते, किताबें, स्कूल बैग…….

जाते हुए शिशिर अौर

आते हुए वसन्त ने पलाशों को खिला दिया।

जैसे ‘जंगल में आग’ लगा दिया।

पर ये फूल से नन्हें-मुन्ने  समय से पहले मुरझा क्यों गये?

आग बनने से पहले, राख में खो गये।

रह गये ‘टेसू के आग’ से टीस दिलों में………

शब्दार्थ- Word meaning

जंगल की आग,टेसू, पलाश – flower known as flame-of-the-forest, bastard teak.

शिशिर -Winter Season

वसन्त – Spring Season

टीस – twinge, suffering, pain, misery, ache.

Images from Internet.

मैं एक लड़की ( कविता 1 )

g1

इस दुनिया मॆं मैने
         आँखें खोली.
               यह दुनिया तो
                     बड़ी हसीन
                           और रंगीन है.

मेरे लबों पर
       मुस्कान छा गई.
             तभी मेरी माँ ने मुझे
                      पहली बार देखा.
                              वितृष्णा से मुँह मोड़ लिया

और बोली -लड़की ?
           तभी एक और आवाज़ आई
                       लड़की ? वो भी सांवली ?

 

images from internet.