टिमटिमाते तारे, जगमगाते जुगनू, दमकता चाँद , नन्हें दीपक की हवा से काँपती लौ, सभी अपनी पूरी ताक़त से रात के अंधेरे का सामना करते हैं. फिर हम क्यों नहीं कर सकते सामान ? सहर तो होगी हीं….सूरज तो निकलेगा हीं….

टिमटिमाते तारे, जगमगाते जुगनू, दमकता चाँद , नन्हें दीपक की हवा से काँपती लौ, सभी अपनी पूरी ताक़त से रात के अंधेरे का सामना करते हैं. फिर हम क्यों नहीं कर सकते सामान ? सहर तो होगी हीं….सूरज तो निकलेगा हीं….

एक अोर बहती कलकल गंगा,
तट पर विशाल अश्वत्थ तरु
अौर दूसरी अोर श्मशान काली की
भव्य प्रतिमा, रक्त रंग
जवा पुष्प माला में ।
घाटों पर बाँसों का स्तुप।
राह किनारे बिकते रामनामी…….
गुजरते उस राह से मन वैराग से
…..श्मशान-वैराग्य से भर उठता।
पर कितना विचित्र है यह मन?
संसार की नश्वरता का एहसास
वह क्षणिक वैराग्य
जो श्मशान में संसार की असारता से उत्पन्न होता है,
संसार के मोह-माया में आते, क्षण में हीं
लुप्त भी हो जाता है।
वैराग्य – संसार की असारता।
श्मशान वैराग्य-श्मशान में जाकर हुआ क्षणिक वैराग्य।
Etah road accident: School bus collides with truck killing over 20 school kids, dozens injured.( 19th January, 2017)

राह चलते-चलते ,
सामने धुंध छा गया।
धुंधली राह में ङगर खो गया।
हँसते- खिलखिलाते नन्हें-मुन्ने भी
खो गये कोहरे की चादर में।
रह गये बिखरे नन्हें जूते, किताबें, स्कूल बैग…….
जाते हुए शिशिर अौर
आते हुए वसन्त ने पलाशों को खिला दिया।
जैसे ‘जंगल में आग’ लगा दिया।
पर ये फूल से नन्हें-मुन्ने समय से पहले मुरझा क्यों गये?
आग बनने से पहले, राख में खो गये।
रह गये ‘टेसू के आग’ से टीस दिलों में………
शब्दार्थ- Word meaning
जंगल की आग,टेसू, पलाश – flower known as flame-of-the-forest, bastard teak.
शिशिर -Winter Season
वसन्त – Spring Season
टीस – twinge, suffering, pain, misery, ache.
Images from Internet.

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