जी भर, जी ले ज़िंदगी

सारे सच लोग झूठ बताते चले गये।

सारी ज़िंदगी छले जाते रहे।

कई धोखे भरे रिश्ते निभाते चले गये।

शायद हुआ ऊपर वाले के सब्र का अंत।

हाथ पकड़ ले चला राह-ए-बसंत।

एक नई दुनिया, नई दिशा में।

बोला, पहचान बना जी अपने में।

तलाश अपने आप को, अपने आप में।

ग़र चाहिए ख़ुशियाँ और सुकून का साया।

जाग, छोड़ जग की मोह-माया।

मैं हूँ हमेशा साथ तेरे, कर बंदगी।

ख़ुशगवारी से जी भर, जी ले ज़िंदगी।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है!

खोने का डर क्यों? साथ क्या लाए थे।

क्या कभी बिना डरे जीने कोशिश की?

तब तो फ़र्क़ समझ आएगा।

इस जहाँ में आए, सब यहाँ पाए।

सब यही छोड़ जायें।

यही कहती है ज़िंदगी।

ग़र जीवन का अर्थ खोजना है।

एक बार ज़िंदगी की बातें मान

कर देखने में हर्ज हीं क्या है?

Topic by yourQuote

एक छोटी सी बात

हम ख़ुशियाँ चुनते रहे।

और ना जाने कब

ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

सब कहते रहे …..

एक छोटी सी बात थी।

हम बात तलाशते रहे पर

ना जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

TopicByYourQuote

अहम बातें

ज़िंदगी की कुछ अहम बातें है –

दिल औ दिमाग़ में ज्ञान भरने के लिए पढ़ना,

दिल औ दिमाग़ में भरे दर्द हटाने,

खाली करने के लिए लिखना।

बातों को समझने के लिए ज़िक्र औ चर्चा करना।

यादों से निकलने के लिए उनको समझना।

बातों को आत्मसात् करने के लिए पढ़ाना।

राज़-ए-दिल और दिल की बातें दिल में रखना।

सागर मंथन

गहरे सागर मंथन से अमृत मिला और गरल।

अपने अंदर के रौशनी-अंधकार समझ ऊपर उठना है,

अपनी भावनाओं-विकारों को देखना-समझना है,

तब दिल-औ-दिमाग़ का सागर मंथन है सबसे सरल।

विचलित नहीं होना मन मेरे

विचलित नहीं होना मन मेरे, देख कफ़न का सफ़ेद नूर।

यह तो है राह-ए-सुकून, दुनिया के दुःख-दर्द से दूर।

होते हैं कई बदकिस्मत बे-कफ़न

होते है कुछ जीते-जी मद में चूर।

भूल जाते है ज़िंदगी है रूहानियत,

समझदारी है, नही रखने में ग़ुरूर।

कफ़न में जेब नहीं होती, यह है मशहूर।

कर्मों की वसीयत होती है रूह पर ज़रूर।

#TopicByYourQuote

रूह-ए-दुर्गा-2

मेरी माटी-मूरत पूजा तुम ने।
……सजाया-सँवारा,
दिया अपरिमित प्यार औ सम्मान
…..दस दिन।
कुछ अंश उसका रखा ना बचा कर?
मेरे जीते-जगाते, हाड़-मास …….

स्वरूप के लिए?

Inspired by an English quote!

तह-ए-इश्क़ (महादुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं)

थे राधा बनने की चाह में।

कई नज़रें उठी,

सिर्फ़ लालसा भरी चाह में।

माँगा इश्क़ भरी नज़रें,

मिला बदन भर चाह।

समझ ना आया, तह-दर-तह

तह-ए-इश्क़ में सच्चा कौन, झूठा कौन?

और हर इल्ज़ाम इश्क़ पर आया।

पर कृष्ण ना मिले।

महादुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं!