hello ज़िंदगी, पैग़ाम-ए-हयात

आ कर चले जातें है लोग, वहीं जहाँ से आए थे।

पर यहीं कहीं कुछ यादें , कुछ वादे छोड़ जातें हैं।

ग़ायब बस वह एक चेहरा होता है।

जो अक्सर तन्हाईयों को छूता रहता है।

बस रह जाती हैं कुछ कहानियाँ,

सुनने-सुनाने को, आँखें गीली कर जाने को।

साजो-सामान के साथ मेहमान

विदा होतें हैं, यादें क्यों छोड़ जातें हैं?

क्यों यह रस्म-ए-जहाँ बनाई? ऐ ज़िंदगी!

तुम्हारी अपनी,

पैग़ाम-ए-हयात

Meaning of some words-
पैग़ाम-ए-हयात- message of eternal love
तन्हाईयों – loneliness, solitude

इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

जीवन सार

तन थके तो आराम चाहिए।

मन थके तो सुकून चाहिए।

“जो होगा अच्छा होगा”

मन के सुकून और शांति के लिए,

यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।

कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।

गीता में छुपा है यह जीवन सार –

जो हुआ अच्छा हुआ।

जो हो रहा है वह अच्छा है।

जो होगा वह भी अच्छा होगा।

दिल, दिमाग़ और रूह mind, Body, Soul

दिमाग़ हमेशा तर्क खोजता है क्योंकि दिमाग़ और ईगो साथी हैं।

रूह जो संदेश देता है दिल को, उसे वही भाता है

क्योंकि दिल और रूह साथी हैं।

दिल-औ-दिमाग़ के बीच जंग,

यह है दुनियावी और रूहानियत कश्मकश।

ग़र दिल-दिमाग़-आत्मा एक हो जाएँ।

जीवन का अर्थ दिखने लगेगा।

नज़रों के सामने छाया धुआँ-धुँध छँटने लगेगा।

जीवन यात्रा की लौकिक और आलौकिक राहें नज़र आने लगेंगीं।

Mind-body-soul – struggle of thoughts are actually struggle of spirituality and worldly views.

कंकर से शंकर

कल तक कंकर था।

तराश कर हीरा बन गया।

कल तक कंकर था।

बहती नर्मदा में ,

तराश कर शंकर बन गया।

तराशे जाने में दर्द है,

चोट है।

पर यह अनमोल बना देता है।

ज़िंदगी की किताब !!

ज़िंदगी के किताब को ना अपनी मर्ज़ी से बंद कर सकते हैं

ना आगे के सफ़ेद पन्नों को पढ़ सकते हैं।

सिर्फ़ आज़ के पन्नों से कभी कभी दिल भर जाता है!

और जाने- अनजाने अक्सर पुराने पन्ने पलट जातें हैं।

वहाँ होते हो तुम!

अज़ीज़ हो तुम,

पर नाराज़ है हम।

 बिना कहे तुम्हारे जाने से।

पक्षपात !!

यह खबर पढ़ कर सभी पक्षियों को बड़ी हैरानी हुई. इंसानों ने रवायत, नियमों को अपने आप पर लागू होते देख बोल पड़े खग – बड़े विचित्र हैं ये ! बिना हमारी कामना जाने हमें क़ैद में रख कर मन बहलाना तो इनका पुराना शग़ल था. पर ये नहीं मालूम था अपने यहाँ के रीत और कुरीति हम पर भी थोप रहें हैं. नर-नारी, नर-मादा के मूल्यों में भी श्रेष्ठता, उच्चता-निम्नता का खेल? इनसे ज़्यादा समझदार तो हम हैं. खुले आसमान में खुला और बंधनविहीन जीवन जीतें हैं.

Your pain

Your pain

is the breaking

of the shell

that encloses  

your understanding.

 

~~~Khalil Gibran

 अपने  को पाना, Your relationship with you

 

खुद को   ना खोने देना

अौरों को खुश करने की कोशिश में।

 अपने  को पाना

लोगों को खोने से अच्छा है।

Mankind

Know mankind well,

don’t degrade every man as evil,

and don’t exalt every man

thinking he is good.

He who cannot discover himself;


cannot discover the world.”

 

❤  Rumi