लफ़्ज़ और अल्फ़ाज़

कभी ग़ौर किया क्या?

शुक्रिया अदा करते वक्त,

दिल होता है पाक-साफ़।

शिकायतें-शिकवे आते नहीं ज़ेहन में।

एहसानमंद अल्फ़ाज़ों में होती है रूहानियत।

वे नहीं करते दिल दुखाने का गुनाह।

क़ुसूरवार तो होते हैं कड़वे-कृतघ्न दिलों से

निकलते चासनी डूबे, हिजाब ओढ़ें लफ़्ज़।

Gratitude is the healthiest of all human emotions.”

Zig Ziglar

छुपे ख़्वाब बेटियों को सजाने दे!

माथे पे ये आँचल, ये हिजाब क्या ख़ूब है।
पर इसके बिना भी वह बहुत ख़ूब है।
ना क़ैद कर बुलबुल को पिंजरे में।
ख़ुशी के गीत गाने दे।
पिता की आँखों में छुपे ख़्वाब,
बेटियों को सजाने दे।
इनके पाक दामन को आँसुओं से नहीं,
अपने अस्तित्व….वजूद-ए-ज़न,
अरमानों औ ख़्वाहिशों से सजाने दे।

* On International Day for the Elimination of Sexual Violence in Conflict – crimes against women

* On Father’s Day



ख़ुशियों भरा बदलाव

एकांत में रम कर समझ आता है,

किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।

एकांत परिचय करता है अपने आप से।

यह पहचान कराता है –

सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।

ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।

धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।

मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ

ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप

अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी

आसानी से समझने लगते हैं ।

सुकून अनलिमिटेड

ग़र अपना साथ ख़ुशियाँ देने लगे,

तब ख़ुद को जीतने की राहों पर हैं।

ग़र दूसरों से प्यार पा ख़ुश रहने की

ख्वाहिशें कम होने लगे,

तब ख़ुद से प्यार करने की राहों पर हैं।

ग़र दर्द भरे पलों में मुस्कुरा रहे हैं,

तब निर्भय होने की राहों पर है।

ग़र एकांत ख़ुशनुमा लगने लगा है,

तब अध्यात्म की राहों पर हैं।

यह जोखिम भरा शग़ल मीठा सा नशा है।

पर तय है, इसमें सुकून अनलिमिटेड है।

ढलती धुआँ धुआँ सी शाम !

ढलती धुआँ धुआँ सी

शाम सामने आते रात के

साँवले अँधेरे को ताक,

हँसी और बोली आज़ गुज़र गई,

फिर कल आऊँगी।

भीगी भीगी शाम की दहलीज़ पर

तुम फिर मुझे ढूँढते आओगे।

पर तुम करो आसनाई चरागों से।

हमें अंधेरे रास नहीं आते।

इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी !

ना डरो,

जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।

जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।

तभी अंकुर निकलता है,

ऊपर बढ़ने के लिए।

रौशनी से होती है मुलाक़ात।

नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

जीवन सार

तन थके तो आराम चाहिए।

मन थके तो सुकून चाहिए।

“जो होगा अच्छा होगा”

मन के सुकून और शांति के लिए,

यह विश्वास क़ायम रखना है ज़रूरी।

कोशिश से बना सकते है यह यक़ीन।

गीता में छुपा है यह जीवन सार –

जो हुआ अच्छा हुआ।

जो हो रहा है वह अच्छा है।

जो होगा वह भी अच्छा होगा।

एक अरसा हो गया ख़ुद से मिले…

हमें मालूम है तुम्हें,

एक अरसा हो गया है ख़ुद से मिले।

दुआ देतें हैं, तुम्हें तुम जैसा कोई मिले।

उस आईने में,

अक्स से नज़रें मिला सको तो देखना

तुम्हें अपना व्यवहार

अपना किरदार नज़र आएगा।

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