
भरम
जिंदगी गुरु बन, तब तक सबक दोहराती रही,
हमें तराशने और खोने-पाने के
भरम से निकालने के लिए,
जब तक इल्म सीख न लिया।
~ Dr. Rekha Rani ♥️
जिंदगी सबसे बड़ी गुरु है, जो हमें तब तक सबक सिखाती है जब तक हम ‘भरम’ से बाहर निकलकर असल ‘इल्म’ (ज्ञान) नहीं सीख लेते। डॉ. रेखा रानी की एक बेहद गहरी और प्रेरणादायक कविता।
डॉ. रेखा रानी की मार्मिक कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ अब प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ पत्रिका में प्रकाशित। इंसानी इच्छाओं के इस गहरे जीवन-दर्शन को Amazon Kindle पर पढ़ें।
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मुझे आप सभी को यह बताते हुए बेहद खुशी हो रही है कि मेरी लिखी हुई कविता ‘अतृप्त तृष्णा’ प्रतिष्ठित ‘प्रतिज्ञान’ (Pratigyan) पत्रिका में प्रकाशित हुई है!
साहित्य की इस नई पहचान का हिस्सा बनना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है। यह पत्रिका अब Amazon Kindle पर भी उपलब्ध है।

हर इंसान आजीवन लड़ता रहता है,
नज़र न आने वाले
कई अनकहे युद्धों से-
कभी ख़ुद से,
कभी ज़माने से,
कभी लोगों से,
और कभी अपनी अतृप्त तृष्णाओं से।
यही तृष्णा
सुकून को मृगतृष्णा बना देती है,
इंसान भूल जाता है,
सफ़र-ए-ज़िंदगी कोई जंग नहीं,
बल्कि वह रूहानी सफ़र है,
जो हर अनुभव से,
हर ज़ख्म से हमें तराशता है।
ताकि हम
ख़ुद को ख़ुद से
बेहतर बना सके।
ताकि सुकून से भरे,
रौशन वजूद के साथ
जीवन के अगले मुकाम का
इस्तक़बाल कर सके।
आप सभी से अनुरोध है कि कृपया नीचे दिए गए लिंक पर जाकर किंडल (Kindle) पर पूरी पत्रिका पढ़ें और अपना प्यार एवं आशीर्वाद दें। 🙏
सधन्यवाद व स्नेह,
डॉ. रेखा रानी