
खामोशी और एहतियात




चोट से टूटे दिल से,
दिमाग़ ने पूछा –
तुम ठीक हो ना?
तुम्हें बुरा नहीं,
ज़्यादा भला होने की
मिली है सज़ा।
ऐसे लोगों की
दुनिया लेती है मज़ा।
पेश नहीं आते दिल से,
दिमाग़ वालों से।
प्यार करो अपने आप से,
मुझ से।
ज़िंदगी सँवर जाएगी।

Image – Aneesh
The true mark of maturity is when somebody hurts you and you try to understand their situation instead of trying to hurt them back.
कई तरह के लोगों को देखा है।
कुछ तो खोए रहते हैं अपने आप में, कुछ अपने दर्द में।
पर बीमार अौर खतरनाक वे हैं जिन्हें मजा आता है,
दूसरों को बिन कारण दर्द और तकलीफ पहुंचाने में।
सबसे सही संतुलित कौन है?
ऐसे भी लोगों को देखा है,
जो चोट खा कर भी चोट नहीं करते।
आघात के बदले प्रतिघात नहीं करते।
क्योंकि
वे पहले दूसरे की मनःस्थिति को समझने की कोशिश करते हैं।
संगेमरमर से पूछो तराशे जाने का दर्द कैसा होता है.
सुंदर द्वार, चौखटों और झरोखों में बदल गई,
साधारण लकड़ी से पूछो काटे जाने और नक़्क़ाशी का दर्द.
सुंदर-खरे गहनों से पूछो तपन क्या है?
चंदन से पूछो पत्थर पर रगड़े-घिसे जाने की कसक,
कुन्दन से पूछो आग की तपिश और जलन कैसी होती है.
हिना से पूछो पिसे जाने का दर्द.
कठोर पत्थरों से बनी, सांचे में ढली मंदिर की मूर्तियां से पूछो चोट क्या है.
तब समझ आएगा,
तप कर, चोट खा कर हीं निखरे हैं ये सब!
हर चोट जीना सिखाती है हमें.
अौर बार-बार ज़िंदगी परखती है हमें।

मन अौर दिल पर लगे,
हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर
ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..
जीवन के हर सबक, पीड़ा अौर आघात के लिये
ये तमगे हैं, जिन्हों ने जीना सीखाया।
मुट्ठी में दबे,
मसले – कुचले गुलाबों
की खुशबू फ़िजा में तैर गई।
हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क
से भर गईं
क्या हम ऐसे बन सकते हैं?
मर्म पर लगी चोट
पीङा नहीं सुगंध दे ???
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