
लोग क्या कहेगे?





लोगों क्या कहेंगे?
इस डर के क़ैद में क्यों जीना?
लोग हमारी ज़िंदगी से खो ना जायें।
इस डर से ग़लत लोगों को क्यों झेलना?
ज़िंदगी में लोग आएगें, लोग जाएँगें।
लोगों का क्या है? आज़ जो अपने हैं,
ना जाने कब बदल जायें मौसम की तरह।
कब दुनिया की भीड़ में खो
जायें अजनबियों की तरह।
ऐसे में खुद को खो क्यों देना?
अपने-आप को खो कर क्या पाएँगें?
Self-love
Positive Psychology – Self-love comprises four aspects: self-awareness, self-worth, self-esteem and self-care. It is a state of appreciation for oneself that grows from actions that support our physical, psychological and spiritual growth. Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness.
होते हैं कुछ लोग
ख़ुशगवार-सुकुमार दिखते पीपल से।
दीवारों-छतों-घरों पर बिन बताए,
बिना अनुमति ऊग आये पीपल से।
नाज़ुक पत्तियों और हरीतिमा भरा पीपल।
समय दिखाता है,
इनके असली रंग।
गहरी जड़ें कैसे आहिस्ते-आहिस्ते गलातीं है,
उन्ही दरों-दीवारों को टूटने-बिखरने तक,
जहाँ मिला आश्रय उन्हें।

लोग नहीं बदलते।
फ़रेबी अक्सर धोखे-बाज़ साबित होतें हैं।
वस्ल का वादा करतें है
लेकिन कभी वफ़ा नहीं करतें।
कभी दोस्त, कभी माशूक़ ,
कभी अपना… करीबी बन,
दिखा देतें हैं अपनी फ़ितरत।
अक्सर लोग नहीं बदलते।


लोग
ज़िंदगी की राहों में
लोगों को आने दो
….. जाने दो।
सिर्फ़ उनसे मिले
सबक़ अपना लो।
राहों में मिले टेढ़े-मेढ़े
लोग सीधे चलने की
सबक़ औ समझ दे जाएँगे।

कुछ लोगों को लगता है,
वे हमेशा सही हैं।
उनसे सही दूरी
बनाए रखनी चाहिए।
क्योंकि ऐसे लोग
अपने वहम में ज़िंदगी
से कुछ सीखते ही नहीं।
People don’t change, Sometimes their mask falls off.
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