रक़्स-ए-जुगनू

देखा है कभी रक़्स-ए-जुगनू ,

अपने आप से इश्क़ करनेवाले,

नृत्य में डूबे जुगनुओं को?

रातों में अपनी रौशनी में महफ़िलें सजाते?

अँधेरे में बिखेरते अपने उजाले से दुनिया को रिझाते?

अपनी रौशनी से दीवाली मनाते?

दिया सा जलाते, बे-रौशन रातों में?

वैसे हीं अपनी रूह को रौशन रखो!

हौसले का एक सितारा दमकने दो।

यह जीवन के हर पल को रौशन करेगा, अंधकार हरेगा।

Interesting Psychological fact- Self-esteem is your overall opinion of yourself. If you have healthy self-esteem, you feel good about yourself and see yourself as deserving. When you have low self-esteem, you put little value on your opinions and ideas.

विश्व प्रेस आजादी दिवस -3 May, World Press Freedom Day

1991 में अफ्रीका के पत्रकारों ने प्रेस की आजादी के लिए पहली बार मुहिम छेड़ी थी। अब हर वर्ष 3 मई को प्रेस फ्रीडम डे मनाया जाता है। इसे मनाने के पीछे मंतव्य यह है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ – मीडिया को मज़बूत बनाया जाये। 180 देशों में, भारत इस इंडेक्स में 142 वें नंबर पर है।

It’s one of the most dangerous countries for journalists trying to do their job properly: RSF

The 2021 World Press Freedom Index produced by Reporters Without Borders (RSF), a French NGO, has again placed India at 142nd rank out of 180 countries. This despite the fact that for a year, under directions from the Cabinet Secretary, an Index Monitoring Cell worked to improve the world rankings, including a meeting between Ambassador to France with the RSF officials to lobby for a change in the ranking in the index compiled by them. https://www.thehindu.com/news/national/india-again-placed-at-142nd-rank-in-press-freedom/article34377079.ece/amp/

बेमेल

अपने सुकून और शांति के लिए

अगर कुछ लोगों से दूर होना पड़े।

तब इसका मतलब है वे आपके

स्वस्थ के लिए बेमेल- विरुद्धाहार हैं।

विरुद्ध आहार- बेमेल या अस्वस्थकर भोजन आयुर्वेद के अनुसार।

इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी !

ना डरो,

जब चारो ओर गहन अँधेरा दिखे।

जब लगे, हो रहा सब ख़त्म।

तभी अंकुर निकलता है,

ऊपर बढ़ने के लिए।

रौशनी से होती है मुलाक़ात।

नीचे जड़े सहारा देने लगती हैं।

मिट्टी में दबे बीज सी है ज़िंदगी भी।

ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा

दिल बड़ा नाज़ुक होता है।

रिश्ते दिल के भरोसे पर टिके होते है।

उसके टूटने की आवाज़ नहीं होती।

पर भरोसा टूट जाये ,

तो ज़िंदगी के हर पल में,

हर लफ़्ज़ में इस की गूंज शामिल होती है

औ भरोसा करने की आदत छूट जाती है।

ना करो झूठे वादे, ना किसी का ऐतबार तोडो,

ना तोड़ो नाज़ुक भरोसा।

ये चोट रूह पर निशाँ छोड़ जाता है।

Psychological Fact – Pistanthrophobia is an

enormous fear of trusting people because of

awful past experiences / bad relationship.

दुनिया है रंग मंच

सुना था यह दुनिया है इक रंग मंच, हम सब है किरदार।

जीवन यात्रा में अलग-अलग हैं कहानियाँ और दास्तान।

कुछ मुकम्मल कुछ अधूरी।

सब की डोर है ऊपरवाले के हाथों में।

अब पढ़ा ट्रूमैन शो ऐसा वहम है,

जहाँ व्यक्ति अपने जीवन को रिएलिटी शो

का हिस्सा मान भ्रम में जीता है।

क्या हम सब वास्तव में रंग मंच के ऐसे हीं किरदार हैं,

जिन पर कई नज़रें टिकी हैं? …..

……जीपीएस ट्रेकिंग, कैमरे, सीसीटीवी,

ड्रोन, फ़ेसबुक, इंस्टग्राम, व्हाटअप…….

The Truman Show delusion or Truman syndrome, is a type of delusion in which the person believes that their lives are staged reality shows, or that they are being watched on cameras.

(In the film “The Truman Show,” Jim Carrey plays a man who is an unknowing star of a TV show. His life is streamed to an audience at all times).

मन का सुकून

हम सब जग में लोगों से रिश्ते बनाते हैं।

कभी अपने साथ प्रेम और इश्क़ भरा

रिश्ता बना कर देखो।

लोगों को अपने जीवन के

दायरे और सीमा बता कर देखो।

ग़र मन का सुकून चाहिए,

दूसरों के बदले खुद के लिए

जीवन जी कर देखो।

कई उलझनें ख़ुद-ब-ख़ुद सुलझने लगेंगी।

हमारी पृथ्वी HappyEarth Day -22 April

ब्रह्मांड में हमारी पृथ्वी है एक छोटी सी बिंदु।

इतनी न्यून दिखनेवाली धरा पर रहनेवाले

इंसानों का अहंकार इतना बड़ा क्यों?

7.6 अरब लोगों को नहीं दिखता कि

हम तलबगार हैं इसके? क्यो परवाह नहीं इसकी?

धरा का कोख है कूड़ा से ज़ख़्मी और

आसमाँ का सीना धुआँ से चाक।

एहसान फ़रामोशी से जो हम दे रहे जमीं को,

ग़र वही लौटाने लगे, तब जाएँगे कहाँ हम?

On April 22, Earth Day has been celebrated around the globe, annually For the past 50 years. The aim is to promoting awareness for the health of our environment.