
प्रतिमा


एकांत में रम कर समझ आता है,
किसे प्यार है, किसे कहते है ज़रूरत।
एकांत परिचय करता है अपने आप से।
यह पहचान कराता है –
सच्चे अपनों और तथाकथित अपनों से।
ख़ुशियों भरा बदलाव लाता है बाहर से।
धीरे-धीरे अंदर भी बहुत कुछ बदलने लगता है।
मनोवैज्ञानिक तथ्य – जब आप खुद के साथ
ज्यादा समय अकेले बिताने लगते हैं तब आप
अपने साथ-साथ दूसरे की मनःस्थिति बड़ी
आसानी से समझने लगते हैं ।

ग़र अपना साथ ख़ुशियाँ देने लगे,
तब ख़ुद को जीतने की राहों पर हैं।
ग़र दूसरों से प्यार पा ख़ुश रहने की
ख्वाहिशें कम होने लगे,
तब ख़ुद से प्यार करने की राहों पर हैं।
ग़र दर्द भरे पलों में मुस्कुरा रहे हैं,
तब निर्भय होने की राहों पर है।
ग़र एकांत ख़ुशनुमा लगने लगा है,
तब अध्यात्म की राहों पर हैं।
यह जोखिम भरा शग़ल मीठा सा नशा है।
पर तय है, इसमें सुकून अनलिमिटेड है।

एकांत
वह नशा है,
जिसकी लत लगे,
तो छूटती नहीं।
भीड़ तो वह कोलाहल है,
जो बिना भाव
मिलती है हर जगह।

अकेलापन और एकांत में अंतर है. अकेलापन उबाता है. जब कि एकांत आत्मनिरीक्षण के अवसर देता है।ज़िंदगी में ज़्यादा मूल्यवान है, मन की शांति और दिल में सहानुभूति.

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