रूह की राहें

चराग़-ए-रहगुज़र रौशन करता है।
मुसाफिर की अँधेरी राहों को।
जब दिल में चराग़ जल उठते हैं,

रौशन करते हैं रूह की राहें को।

अर्थ –
चराग़-ए-रहगुज़र – lamp on the way

बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी

कुछ लोग बिन आईना जीते हैं ज़िंदगी।

वे भूल जातें है, ख़ुद एक आईना है ज़िंदगी।

और जब अचानक उन्हें हीं उनका चेहरा

दिखाती है आईना-ई-ज़िंदगी।

तब नहीं पाते अपने आप को पहचान,

या अपना भूला चेहरा ना चाहतें हैं पहचानना?

धूमिल, दाग़दार, मलिन अक्स।

आईना नहीं बोलता झूठ, जानते हैं सभी शख़्स

जी भर, जी ले ज़िंदगी

सारे सच लोग झूठ बताते चले गये।

सारी ज़िंदगी छले जाते रहे।

कई धोखे भरे रिश्ते निभाते चले गये।

शायद हुआ ऊपर वाले के सब्र का अंत।

हाथ पकड़ ले चला राह-ए-बसंत।

एक नई दुनिया, नई दिशा में।

बोला, पहचान बना जी अपने में।

तलाश अपने आप को, अपने आप में।

ग़र चाहिए ख़ुशियाँ और सुकून का साया।

जाग, छोड़ जग की मोह-माया।

मैं हूँ हमेशा साथ तेरे, कर बंदगी।

ख़ुशगवारी से जी भर, जी ले ज़िंदगी।

क्यों हर रास्ता

क्यों हर रास्ते चलते जातें हैं,

ज़िन्दगी की बहाव की तरह?

क्यों रास्तों के पेच-ओ-ख़म,

राहों की सख़्तियाँ ख़त्म होतीं नहीं है,

ज़िंदगी के उतार-चढ़ाव की तरह?

मालूम नहीं हर रहगुज़र मंज़िल का पता दे कि ना दे,

पर राहों पर चलते जाना हीं सफ़र-ए-ज़िंदगी है।

हम सब हैं मुसाफ़िर, मंज़िल की तलाश में।

मैं ख़ुद आईना

आईने ने पूछा –

क्यों लिए फिरती हो मुझे साथ?

मैंने कहा –

यक़ीं है, कड़वे लोगों को बेहतरीन

ज़वाब दे ऊपरवाला थामे रहेगा मेरा हाथ।

पर भूल से भी अहंकार में ना डूब जाऊँ,

आईने में खुद को देख नज़रें झुकाऊँ,

इस कोशिश में कि मैं ख़ुद आईना बन जाऊँ।

अपने से अपनी होड़ लगाऊँ।

Interesting fact –
Stay true to yourself. As what brings

you a sense of happiness, purpose

and meaning in life is important.

मंज़िल

सागर के इश्क़ में नदियाँ छोड़ आईं

पहाड़ों, हिम और हिमनदों को।

बहती नदियों को बस मालूम है इतना,

उनकी मंज़िल है,

साग़र के आग़ोश में।

क्या पता है इन्हें इनकी मंज़िल ….

…..सागर खारा मिलेगा?

मौन माफ़ी

मौन रह कर

माफ़ कर देना,

मौन रह कर

जीवन पथ पर बढ़ जाना

सबके बस की बात नहीं।

यह होता है तब

ऊपरवाले पर भरोसा हो जब।

अलफ़ाज़ बेमानी हो जाते हैं तब।

इश्क़ और पानी पात्र

छुआ-छूत और जात की बात,

हमबिस्तर की रात नहीं रहती याद।

ब्लड की बोतल हो जाती है पाक।

आर्गन डोनेशन लेने में

नहीं रहती कोई बात।

बस विवाह, इश्क़ और पानी पात्र में

आड़े आती है जात।

News- Tank Cleaned With Cow Urine

In Karnataka After Dalit Woman

Drinks Water. There are several tanks

in the village with written messages that

everyone can drink water from there.

https://www.ndtv.com/india-news/tank-cleaned-with-cow-urine-in-karnataka-after-dalit-woman-drinks-water-3539191/amp/1

सूखते गुलाबों में

सूखते गुलाबों में भी अक्सर

जानी पहचानी ख़ुशबू मिलती है।

पुरानी किताबों में भी अक्सर

अजीब से ख़ुशबू मिलती है।

पुरानी किताबों में मिले सूखे गुलाब,

की मिलाजुली ख़ुशबू

ले जाती हैं यादों के भँवर में।

बीते दिनों के समुंदर में।

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