हम ख़ुशियाँ चुनते रहे।
और ना जाने कब
ज़िंदगी नाराज़ हो गई।
सब कहते रहे …..
एक छोटी सी बात थी।
हम बात तलाशते रहे पर
ना जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

TopicByYourQuote
हम ख़ुशियाँ चुनते रहे।
और ना जाने कब
ज़िंदगी नाराज़ हो गई।
सब कहते रहे …..
एक छोटी सी बात थी।
हम बात तलाशते रहे पर
ना जाने क्यों ज़िंदगी नाराज़ हो गई।

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ज़माने की महफ़िल में मुस्कुरा कर
करते हो बातें।
अपनों से, जाने-अनजानों से।
कुछ अपनी फ़िक्र, अपना ख़याल करो।
ज़माने के रंज-औ-ग़म ना उतारो ख़ुद पर।
चाहिए ग़र ज़िंदगी ख़ुशगवार चुस्त।
अपने-आप से बातें करो वही जो हों दुरुस्त।
Interesting Psychological Fact – Self-talk is
our internal dialogue. It’s influenced by
our subconscious mind, and it reveals
our thoughts, beliefs, questions, and ideas.
Positive Self-talk can enhance your
performance and general well-being.

मुस्कुराती आँखें सबके सामने
ग़ज़ब हैं झिलमिलाती सब के सामने।
चमक आँसुओं के नमी की है
या ख़ुशियों की है?
कैसे जानें?
नज़रों को पढ़ने वाले अब हैं कहाँ?

दिल पर ना जाने कितना बोझ…
पत्थर सा लिए चलते है लोग।
कभी बह जाने दो यह दर्द और सोंच।
तब समझ आएगा दिल का मोल।
पत्थरों की प्रचंड नदियाँ,
झरने तभी बहते होंगे
जब पर्वतों के दिलों पर
बोझ हो जाते होंगे बेबर्दाश्त।

चाँद हो आग़ोश में,
तो सितारों से उल्फ़त नहीं करते।
रौशन हो जहाँ आफ़ताब से,
तो जुगनुओं की रौशनी पर नहीं मरते।


लोग क्या कहेंगे?
अगर सुन रहे हो लोगों की।
तब जी रहे हो उनकी ज़िंदगी,
उनकी बातें,
उनकी ख्वाहिशें।
अपनी ज़िंदगी कब जियोगे?


ज़िंदगी की कुछ अहम बातें है –
दिल औ दिमाग़ में ज्ञान भरने के लिए पढ़ना,
दिल औ दिमाग़ में भरे दर्द हटाने,
खाली करने के लिए लिखना।
बातों को समझने के लिए ज़िक्र औ चर्चा करना।
यादों से निकलने के लिए उनको समझना।
बातों को आत्मसात् करने के लिए पढ़ाना।
राज़-ए-दिल और दिल की बातें दिल में रखना।

चोट किसी की ख़्वाहिशों के
अन्दाज़ से नहीं भरता।
भरता है, अपने तरीक़े से,
अपने समय से।
कुरेदने से राख़ में दबी चिंगारी
आग भड़काती है फ़िज़ाओं में ।
अपने चोट, घाव ना कुरेद,
दो समय भरने का।
Wounds don’t heal the way we
want them to, they heal the way
they need to. It takes time to heal.
Be gentle with your wounds.

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