तन्हा तन्हा सफ़र

जहान में आए तन्हा,

जाना है यहाँ से तन्हा।

तन्हाई अकेलापन नहीं, है एकांत।

ग़र मिलना है ख़ुदा से, ख़ुद से।

तन्हाईयाँ हीं मुलाक़ात हैं करातीं।

अक्सर जीवन का सफ़र होता है क़ाफ़िले में,

फिर भी होती हैं दिल में तनहाइयाँ।

मिलो सबों से,

पर करो अपने साथ सफ़र।

ना जाने क्यों ख़ूबसूरत तन्हाईयाँ हैं बदनाम।

क्या सुनाए दास्तान?

लगता था, क्या सुनाए दास्तान?

उम्र गुज़र जाएगी, पर पूरी नहीं होगी।

हर लफ़्ज़ पर आँसू थे छलकते,

गला था रुँधता।

दर्द में डूबी कहानी अधूरी रह जाती।

ज़िंदगी औ समय ने बना दी आदत,

आँसू पी कहानी सुनाने की।

समुंदर के साथ भी यही हुआ था क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?

अपने हीं आँसुओं को पी-पी कर खारा हो गया क्या?