दस्तूर

आना-जाना जीवन

का दस्तूर है।

ग़म ना कर।

मौसम, साल, महीने, दिन…

लोग बदलते रहतें हैं।

रोज़ बदलती दुनिया

में अपने बने रहें।

जिनसे दुख-सुख कह ले,

कभी हँस ले,

कभी रो ले,

यह अपनापा बना रहे।

Happy 31 st December!!!

9 thoughts on “दस्तूर

  1. कम्यूट
    भीतर की दुनिया के बीच
    और बाहरी दुनिया
    दो भाग वाला घर
    वो आत्मा

    एक सपने में सुनना
    क्या
    वो आत्मा
    तुमसे कहता है

    बेहतर प्रयास करें
    सोने के दौरान
    ड्रामा में
    सपने का
    और हर दिन

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