मौसम

हमारे अंदर भी  क्या बदलते मौसम हैं ?

क्या कभी  बसंत अौर कभी पतझङ  होते हैं ?

कभी कभी सुनाई देती है  गिरते पत्तों की उदास सरसराहट

या शरद की हिम शीतल खामोशियाँ

अौर कभी बसंत के खिलते फूलों की खुशबू….

ऋतुअों अौर मन का यह  रहस्य

बङा अबूझ है………

 

 

जिंदगी के रंग – 34 (रूपांतरण / Metamorphosis)

यादें हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं………

ये खजाने  हैं  बीते पलों के

पर कुछ रुला भी  जातीं हैं।

पर यह भी एहसास दिला जातीं हैं……

तितलियों के  रूपांतरण (metamorphosis)

जैसा बदल  लो  जिंदगी को।

जी लो हर पल को ……….

जिंदगी के रंग -33

दिल पर लगी चोट,

आँसू बन कर बह जाते हैं।

सूखी आँखें अौर

वर्षा के बाद के

धुले असमान देख कर क्या लगता है ,

कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?

The pain

If you are distressed by anything external,

the pain is not due to the thing itself,

but to your estimate of it;

and this you have the power to revoke at any moment.”

~~ Marcus Aurelius

Be with those who help your being

Be with those who help your being.

Don’t sit with indifferent people, whose breath

comes cold out of their mouths.
~  Rumi ❤ ❤

जीवन के रंग – 32

इस जीवन यात्रा में…..

एक बात तो बङे अच्छे से समझ आ गई,

अपनी लङाई खुद ही लङनी  होती है।

इसमें

शायद ही कोई साथ देता है,

क्योंकि

  लोग   अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं।

wake yourself up

once you start making the effort to

“ wake yourself up” –

you suddenly

start appreciating life a lot more.


Robert Biswas-Diener

ऐतबार

लब ना खोलूँ,

अगर ऐतबार हो।

गर ना हो ऐतबार तो ……….

नाहक लबों को क्यों खोलूँ ?

जिंदगी के रंग – 30

समझौता, भोलापन, भरोसा हँस पङे।

बोले हमारे साथ रहने वाले का यही हश्र होता है

पर एक बात है!

हम जिंदगी का आईना अौर दुनिया की असलियत जरुर दिखा देतें हैं।

बराबरी की बात

आईने में  अपने प्रतिद्वंद्वी व मित्र को देखा।

जीवन की स्पर्धा, प्रतिस्पर्धा , मुक़ाबला

किसी और से नहीं अपने आप से हो,

तब बात बराबरी की है।

वर्ना क्या पता प्रतियोगी या हम,

कौन ज्यादा सक्षम है?