सारी कायनात है उसकी!

वह है हर जगह,

फिर भी जाते हैं मंदिरों में

ताकि उसे महसूस कर सकें।

वह है हमारे अंदर,

फिर भी जपते हैं मंत्र

ताकि उसे हर वक्त याद रख सकें।

कितनी गहरी है ये सीखें।

अफ़सोस ग़लतियाँ करने समय

लोग अक्सर भूल जातें है।

सारी कायनात है उसकी,

कि वह हर वक्त देख रहा है हमें।

Psychological Fact – The process of being watched affects our performance positively. (Hawthorne effect)

मोल-अनमोल

दूर थे बादल और कहीं ना था साया।

बस था तपते सूरज का साथ।,

कहा सूरज ने – ग़लत छोड़ आगे नहीं बढ़ोगे,

तो सही साथ पाओगे कैसे?

जहाँ मोल ना हो, वहाँ से जाओगे नहीं,

तब अपना मोल जान पाओगे कैसे?

सोना मिट्टी में दबा, मिट्टी के मोल रहता हैं।

मिट्टी का साथ छोड़ सोना और हीरा

अनमोल हो जाता है।

Psychological fact – knowing own

self-worth is healing and life changing.

Self-worth is the core of our selves.

रक़्स-ए-जुगनू

देखा है कभी रक़्स-ए-जुगनू ,

अपने आप से इश्क़ करनेवाले,

नृत्य में डूबे जुगनुओं को?

रातों में अपनी रौशनी में महफ़िलें सजाते?

अँधेरे में बिखेरते अपने उजाले से दुनिया को रिझाते?

अपनी रौशनी से दीवाली मनाते?

दिया सा जलाते, बे-रौशन रातों में?

वैसे हीं अपनी रूह को रौशन रखो!

हौसले का एक सितारा दमकने दो।

यह जीवन के हर पल को रौशन करेगा, अंधकार हरेगा।

Interesting Psychological fact- Self-esteem is your overall opinion of yourself. If you have healthy self-esteem, you feel good about yourself and see yourself as deserving. When you have low self-esteem, you put little value on your opinions and ideas.

इश्क़ अपने आप से

खुल कर साँसें लो। आज़ाद छोड़ दो अपने आप को।

तुम, तुम रहो। किसी के बनाए साँचें में बेमन से ना ढलो।

जैसे हो वैसे हीं स्वीकार करो अपने आप को।

इश्क़ करना सीखो अपने आप से।

जीतने की कोशिश करो,

पर मुस्कुराओ अगर हार भी जाते हो।

क्योंकि हम सब अपनी अपूर्णता,

कमियों और खामियों के साथ परिपूर्ण हैं।

वही अनूठापन है, वही हमारी पहचान है।

Psychological Fact – Self-love means having a high regard for your own well-being and happiness. Self-love means taking care of your own needs and not sacrificing your well-being to please others.

ज़िंदगी के रंग -231

ज़िंदगी के जंग में,

जब हम अपना सम्मान करना,

अपने लिए खड़े होना

सीखने लगते है।

तब कई लोग हम से

दूर हो जातें है।

वे साथ नहीं छोड़ते

क्योंकि वे कभी

साथ थे हीं नहीं।

बस दिखने लगती है

सब की फ़ितरत।

जो अपने हैं,

वो तो हमेशा

साथ खड़े मिलेंगे।

Why We Love Narcissists – Have you ever wondered why selfish, arrogant, and entitled individuals are so charming? These narcissistic people have parasitic effects on others/ society. Narcissists manipulate credit and blame in their favor.
Research by January 15, 2014

दिल की बातें

अक्सर ज़ुबान पर लगे

सयंम के पहरे स्याह पलों

में बिखर जातें है।

दिल की गहराइयों में

छुपी बातें, लबों पर

बेबाक़ी से छलक आतीं हैं।

दिल से दिल की बातें

करनी हो तो चरागों के

जश्न से बेहतर अँधेरे हैं।

मनोवैज्ञानिक तथ्य– देर रात को बात करने पर ज्यादातर लोग सच बोलते हैं, क्योंकि रात को दिमाग थका हुआ होने के कारण ज्यादा नहीं सोच पाता है।

Psychology says – Night Is The Best Time To Have A Deep Conversation With Someone, According To Experts

रॅपन्ज़ेल सिंड्रोम Rapunzel syndrome

Rapunzel syndrome – Though its named after a fairy tale with happy ending, but Rapunzel syndrome is an extremely rare and dangerous medical condition . Where person eats hair. The eaten hair become tangled and trapped in their stomach. This causes a trichobezoar (hair ball) to form, which has a long tail extending into the small intestine. This Mental Disorders is part of obsessive-compulsive disorders.

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 संस्मरण –

           यह एक सच्ची घटना है। तब मैं शायद 8 या 9  साल की थी। एक दिन मैं अपने माता पिता के साथ एक पारिवारिक मित्र के यहां पहली बार गई। उनकी बड़ी प्यारी और सुंदर सी बेटी थी। जो लगभग मेरे ही उम्र की थी। वह बार-बार मेरे साथ खेलना चाह रही थी। पर ना जाने क्यों, उसके माता-पिता उसे रोक रहे थे। आखिरकार, वह मेरे बगल में आकर बैठ गई। बड़े प्यार से वह मेरे हाथों और गालों को छू रही थी। मुझे लगा, शायद वह मुझसे दोस्ती करना चाहती है।

 

फिर अचानक उसने झपट्टा मारा। अपनी मुट्ठी में उसने मेरे खुले, काले और घने बालों को पकड़ लिया और झटके से खींच लिया। जितनी बाल टूट कर उसकी मुट्ठी में  आये। वह जल्दी-जल्दी उन्हें मुंह में डालकर खाने लगी।उसके माता-पिता ने जल्दी-जल्दी उसके हाथों से बाल लेकर फेंके।

यह घटना मेरे लिये बेहद डरावना  था। उस समय मैं बहुत भयभीत हो गई थी।  उसके माता-पिता ने बताया कि यह एक तरह का मनोरोग है। कुछ ही समय पहले उन्होंने अपनी बेटी के पेट का ऑपरेशन करवा कर बालों का एक गोला निकलवाया था। जो कुछ सालों से लगातार  बाल खाने की वजह से उसके पेट में जमा हो गया था। इसी वजह से वे उसे मेरे साथ खेलने नहीं दे रहे थे।

 

तब मुझे मनोविज्ञान या किसी सिंड्रोम की जानकारी नहीं थी। बस रॅपन्ज़ेल की कहानी मुझे मालूम थी। अभी कुछ समय पहले ही मुझे न्यूज़ में इस बारे में  फिर से पढ़ने का मौका मिला । जिससे पुरानी यादें ताजी हो गई। तब आप सबों से इस सिंड्रोम की जानकारी बांटने का ख्याल आया।

 

रॅपन्ज़ेल सिंड्रोम

वैसे तो रॅपन्ज़ेल लंबे, खूबसूरत बालों वाली एक काल्पनिक युवती का चरित्र  है। लेकिन इस कहानी के नाम पर रखा गया, रॅपन्ज़ेल सिंड्रोम एक अत्यंत दुर्लभ मनोरोग है। ऐसे लोग  बाल खाते हैं।   खाया हुआ बाल उनके पेट में  एक ट्राइकोबोज़र (बाल की गेंद) सा बन जाता है। यह समस्या  घातक भी हो सकती है। यह मानसिक बीमारी एक प्रकार का ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर है। वास्तव  में रॅपन्ज़ेल सिंड्रोम का कारण क्या है, यह अभी तक नहीं जाना जा सका है।


परी कथा रॅपन्ज़ेल 

 यह  एक जर्मन  परी-कथा है। जिसमें डेम गोथेल नामक  जादूगरनी  है। जिसने  सुनहरे, लंबे अौर  सुंदर  बालों वाली बच्ची रॅपन्ज़ेल को सबकी नज़रों से दूर जंगल के बीच एक ऐसी मीनार में कैद कर दिया। जिस पर चढ़ने के लिए न तो सीढ़ियां थी। ना ही अंदर घुसने के लिए कोई दरवाज़ा। उसमें था तो सिर्फ़ एक कमरा और एक खिड़की।  जब जादूगरनी रॅपन्ज़ेल से मिलने जाती । तब वह मीनार के नीचे खड़ी हो जाती थी और उसे यह कह कर बुलाती थी  – रॅपन्ज़ेल, रॅपन्ज़ेल, अपने बाल नीचे करो, (“रॅपन्ज़ेल, रॅपन्ज़ेल, लेट डाउन योर हेयर” ) ताकि मैं सुनहरी सीढ़ी पर चढ़ कर ऊपर आ सकूं।

एक दिन एक राजकुमार उस जंगल से गुजरा। राजकुमार ने  रॅपन्ज़ेल  को गाते हुए सुना। उसके मधुर गीत को सुनकर वह सम्मोहित हो गया। राजकुमार उस आवाज को खोजते हुए मीनार के पास पहुंचा। उसे ऊपर जाने का कोई रास्ता नजर नहीं आया। फिर उसने जादूगरनी को रॅपन्ज़ेल  बालों के सहारे ऊपर जाते देखा। जादूगरनी के जाने के बाद राजकुमार भी उस तरीके से ऊपर गया। ऊपर जाकर वह रॅपन्ज़ेल से मिला। दोनों में प्यार हो गया। कहानी के अंत में दोनों ने एक दूसरे से शादी कर ली।

रॅपन्ज़ेल - विकिपीडिया

 

Psychology and life: The Worst Barrier To Weight Loss

वजन घटाने में एक बङी बाधा : हमारी मानसिक अवस्था Our mental state

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वजन घटाने में एक बङी बाधा : हमारी मानसिक अवस्था Our mental state

हमारी मानसिक अवस्था ऐसी स्थिति के लिये बहुत हद तक जिम्मेदार होती है हम जब बेहद परेशान होते हैं तब हम डिफेंसिव एटीट्यूड अौर Status quo मतलब यथास्थिति या हम जैसे हैं वैसे ही स्थिति बनाए रखना चाहते हैं।

जब हम मानसिक आघात, ट्रौमा, अनजाने एंग्जायटी, मानसिक दबाव ,डर , अनजानी परिस्थती, या बस्तुअों से घबराये हुए होते हैं अौर अपनी स्थिति बदलना नहीं चाहते हैं। ऐसे में अपनी मानसिक स्थिति को जरूरत से ज्यादा नियंत्रित करने की कोशिश करने लगते है

मानसिक दवाब की स्थिति में हम उल्टा सीधा भोजन , अधिक कैलोरी वाले भोजन, चीनी ऐसी चीजें, खाना की मात्रा बढ़ा देते हैं ।  यह एक तरह का इटिंग डिसऑर्डर है। इसकी वजह से भी वजन नहीं घटता।

उपाय Solution

ऐसे में जरूरत है कि अपनी परेशानियों को समझ कर अपने को संभालने की कोशिश करें। अगर व्यक्तिगत रूप से यह संभव नहीं है तो प्रोफेशनल मदद भी लेनी चाहिए । दूसरी बात है – योग, ध्यान, प्राणायाम, एक्सरसाइज, वाक जैसी आदतों को नियमित रूप से शुरू करें।

इसके अलावा हमें अपनी हॉबी और मन बहलाने के साधन भी पर भी ध्यान देना चाहिए। कोशिश करनी चाहिए ऐसे मित्रों के साथ समय बिताएं जो आपकी समस्या को समझ कर सहायता करें। सपोर्ट ग्रुप के साथ समय व्यतीत कर अपने को संभालने की कोशिश करनी चाहिए। इन सब के बाद अगर वजन घटाने का नियमित अभ्यास व कोशिश की जाए। तब डाइट और शारीरिक गतिविधियों से असर नजर आने लगता है, क्योंकि अगर मानसिक रूप से स्वस्थ होकर कोशिश की जाए। तब यह जरूर कारागार होता है

सबसे महत्वपूर्ण सुझाव

कभी कभी मानसिक स्थिति ऐसी हो जाती है कि कुछ भी करना लगभग असंभव लगता है । घबरायें नहीं। यह सब बातें मानसिक दवाब के समय सामान्य है। ऐसे में थोड़ा प्रयास करें, दोस्तों, परिवार से मदद लें। थोङे से शुरुआत करें। उदाहरण के लिए तीन प्राणायाम, 5 मिनट के ध्यान, थोङा वाक से शुरू किया जा सकता है

ऐसे लोगों के साथ ना रहने की कोशिश करें। जो नकारात्मक या परेशान करने वाली बातों से आपको परेशान, अशांत, विक्षुब्ध करें।


Positive Psychology

The REKHA SAHAY Corner!

The aim of Positive Psychology is to catalyze

a change in psychology from a preoccupation

only with repairing the worst things in life to

also building the best qualities in life.

~~Martin Seligman

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