
आईना और अक्स


दूरियाँ- नज़दीकियाँ तो दिलों के बीच की बातें हैं।
दीवारों पर इल्ज़ाम क्यों?
जो खुद चल नहीं सकतीं वे दूसरों की दूरियाँ क्या बढ़ाएँगीं?
अक्सर दीवारें रोक लेतीं हैं ग़म अौर राज़ सारे अपने तक,
अौर समेटे रहतीं हैं इन्हें दिलों में अपने।
किलों, महलों, हवेलियों, मकानों, घरों से पूछो……
इनके दिलों में छुपे हैं कितने राज़, कितनी कहानियाँ।
अगर बोल सकतीं दर-ओ-दीवारें…….
बतातीं दीवार-ए-ज़ुबान से, सीलन नहीं आँसू हैं ये उसके।
वह तो गनिमत है कि…..
दीवारों के सिर्फ कान होते हैं ज़ुबान नहीं।
टूट कर मुहब्बत करो
या मुहब्बत करके टूटो.
यादों और ख़्वाबों के बीच तकरार चलता रहेगा.
रात और दिन का क़रार बिखरता रहेगा.
कभी आँसू कभी मुस्कुराहट का बाज़ार सजता रहेगा.
यह शीशे… काँच की नगरी है.
टूटना – बिखरना, चुभना तो लगा हीं रहेगा.
गुलाबी डूबती शाम.
थोड़ी गरमाहट लिए हवा में
सागर के खारेपन की ख़ुशबू.
सुनहरे पलों की ….
यादों की आती-जाती लहरें.
नीले, उफनते सागर का किनारा.
ललाट पर उभर आए नमकीन पसीने की बूँदें.
आँखों से रिस आए खारे आँसू और
चेहरे पर सर पटकती लहरों के नमकीन छींटे.
सब नमकीन क्यों?
पहले जब हम यहाँ साथ आए थे.
तब हो ऐसा नहीं लगा था .
क्या दिल ग़मगिन होने पर सब
नमकीन…..खारा सा लगता है?
जब जिंदगी से कोई आजाद होता है,
किसी और को यादों की कैद दे जाता है.
सीखना चाह रहे हैं कैद में रहकर आजाद होना।
काँच के चश्मे में कैद आँखों के आँसू ..अश्कों की तरह.
इन आँसुओं से एक बात पूछनी है।
इतना नमक कहाँ से ढूँढ लाते हो?
कहाँ से बार बार चले आते हो?
रुक क्यों नहीं जाते ?
बातें क्यों नहीं सुनते ?
जब देखो आँखें धुँधली कर जाते हो।
Probably the biggest insight… is that happiness is not just a place but also a process. …Happiness is an ongoing process of fresh challenges, and… it takes the right attitudes and activities to continue to be happy. – Ed Diener


Indispire Topic , Edition – 259. How happy are you? Do you look for reasons to be happy? Are smiles linked with happiness?
आज हर जगह चल रही है खुशियों की खोज।
कुछ बाहर खोज रहे हैं ,
कुछ दूसरों के पास खोज रहे हैं।
दिल्ली सरकार, हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, कई विश्वविद्यालय
साइंस ऑफ हैप्पीनेस – खुशियों का विज्ञान पढ़ा रहे हैं।
शायद लोग खुशियां ढूंढ लें !!!!
अक्सर हम भूल जाते हैं कि खुशियां हमारे अंदर मिलेंगी,
हमारे दिलों की धड़कनों के साथ।
हमारी भी, अौरों की तरह कोशिश जारी है प्रसन्नता पाने की।
मुस्कान का क्या है ?
फेशबुक की हर तस्वीर मुस्कुराती है।
हम आँखों के आँसू छुपातें हैं, कई बार मुस्कान के पीछे ।
रोती आँखों से मुस्कुराते हैं कई बार।
मुस्कुराहट और खुशी हमेशा साथ हों यह जरूरी नहीं है ,
खुशियाँ के साथ स्मित हो, यह सोने पर सुहागा है।
लेकिन मुस्कुराकर खुशियाँ हासिल नहीं होतीं ।
हाँ, खुशियों से मुस्कुराहट जरूर आ जाती है चेहरे पर।
हर चोट और उनके निशान,बहुत कुछ नया सीखा जातें हैं, बहते अश्क़ मज़बूत बना जातें हैं.

कुछ हीं बूँदें अश्क़
ना जाने कैसे दिल पर
पड़े भारी बोझ
हल्का कर जातें हैं.
कहते हैं वक़्त गहरे से गहरे
घाव भर देता है .
पर सच तो यह है ,
वक़्त उन घावों के साथ रहना
सीखा देता है .
सिर्फ़ आँसू हीं हैं जो दर्द बहा ले जातें हैं.
एक सच यह भी है ,
हर चोट और उनके निशान
बहुत कुछ नया सीखा जातें हैं .
बहते अश्क़ मज़बूत बना जातें हैं.

बड़ी बड़ी बोलती सी
काले काजल अंजे ….
चपल चंचल ख़ंजन नयन
देख कर बस छोटी सी
कामना … ख़्वाहिश …जागी,
नयन तेरे हो या हमारे ,
आँसूअों से नम ना हो कभी .

टेढी -मेढी बल खाती पगङंङी, ऊँची- नीची राहें ,
कभी फूलों कभी कांटों के बीच,
तीखे मोड़ भरे जीवन का यह सफ़र
मीठे -खट्टे अनुभव, यादों,
के साथ
एक अौर साल गुज़र गया
कब …..कैसे ….पता हीं नहीं चला।
कभी खुशबू, कभी आँसू साथ निभाते रहे।
पहेली सी है यह जिंदगी।
अभिनंदन नये साल का !!!
मगंलमय,
नव वर्ष की शुभकानायें !!!!
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