जो मिला उसमें जीना सीखा लिया।
जो ना मिला उसमें गुज़ारा करना सीख लिया।
चाहना, पसंद करना छोड़ना सीख लिया।
घूमते रही इर्दगिर्द तुम्हारे,
घड़ी की सुइयों की तरह।
क्या अपने आप को था जीत लिया?
या खो दिया अस्तित्व अपना?
यही होती है बज़्म-ए-हस्ती औरत की।

जो मिला उसमें जीना सीखा लिया।
जो ना मिला उसमें गुज़ारा करना सीख लिया।
चाहना, पसंद करना छोड़ना सीख लिया।
घूमते रही इर्दगिर्द तुम्हारे,
घड़ी की सुइयों की तरह।
क्या अपने आप को था जीत लिया?
या खो दिया अस्तित्व अपना?
यही होती है बज़्म-ए-हस्ती औरत की।

इंतज़ार है, वो दिन कब आएगा,
जब यह दिन ना पड़े मनाना।
जलते चराग़ सा ए’तिबार है,
मुद्दत से देखते ख़्वाब का आसार है।
जब बराबर की ज़िंदगी हो,
बराबर का मान हो।
इंतज़ार है उस दिन का……
11th October 2022: International
Day of the Girl Child. The theme
for the 2022 International Day of
the Girl Child was “Digital
generation: Our generation.”

सच को जो झूठ बताए,
शोर मचा झूठ को सच बनाए।
सुन कर अनसुना करे,
ऐसे रिश्ते क्यों निभाएँ?
जाना नहीं उन राहों पर,
जहाँ मिले अपमान बारंबार।
जो बदले मौसम सा हर बार,
क्यों करना उस पर ऐतबार?
