शाम की दहलीज़ पे !!

हमेशा की तरह,

आज भी शाम की दहलीज़ पे,

आफ़ताब आसमान में सिंदूर फैलाए

इंतज़ार करता रहा चाँद का और तारों की बारात का.

क्या वह जानता नहीं

उसके तक़दीर में इंतज़ार और ढलना लिखा है?

 

Stay happy, healthy and safe – 67

सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. उसका दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने-आप को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं.

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ज्यादातर तनाव बातें  ठीक से ना समझने के कारण होते हैं।

शब्दों पर इतना ध्यान न दो।

प्रेम के देश में, भाषा का स्थान नहीं है।

प्यार मौन होता है।। 

 

Most of conflicts and tensions are due to language.

Don’t pay so much attention to the words.

In love’s country, language doesn’t have its place.

Love’s mute.

 

 

 

Shams Tabrizi