आँखें बंद कर हाथ जुड़ गए,
ऊपर वाले के सामने।
प्रार्थना करते हुए मुँह से निकला –
विधाता ! तुम दाता हो।
तुमसे प्रार्थना है –
जिसने मुझे जो, जितना दिया।
तुम उसे वह दुगना दो!
यह सुन ना जाने क्यों कुछ लोग नाराज़ हो गए।

यह कविता आदरणीय मनोरमा जी अौर अनिल जी को समर्पित है. जो किसी कारणवश दूसरे शहर में शिफ्ट हो रहे हैं.
This poem is dedicated to respected Anil ji and Manorama ji on their farewell.
सूफी परंपरा में ईश्वर को हमेशा प्रेमी के रूप में देखा गया है. उसका दरवाजा केवल उन लोगों के लिए ही खुलता है, जो अपने को उसके प्रेम में खो चुके होते हैं.
A life without love is of no account.
Don’t ask yourself what kind of love you should seek,
spiritual or material, divine or mundane,
eastern or western…
divisions only lead to more divisions.
Love has no labels, no definitions.
It is what it is, pure and simple.
Love is the water of life.
And a lover is a soul of fire!
The universe turns differently when fire loves water.
प्रश्न बङा कठिन है।
दार्शनिक भी है, तात्त्विक भी है।
पुराना है, शाश्वत-सनातन भी है।
तन अौर आत्मा या कहो रुह और जिस्म !!
इनका रिश्ता है उम्रभर का।
खोज रहें हैं पायें कैसे?
दोनों को एक दूसरे से मिलायें कैसे?
कहतें हैं दोनों साथ हैं।
फिर भी खोज रहें हैं – मैं शरीर हूँ या आत्मा?
चिंतन-मनन से गांठें खोलने की कोशिश में,
अौर उलझने बढ़ जातीं हैं।
मिले उत्तर अौर राहें, तब बताना।
पूरे जीवन साथ-साथ हैं,
पर क्यों मुश्किल है ढूंढ़ पाना ?
जीवन में खुश रहने और सार्थकता ढूंढने में क्या अंतर हैं?
क्या दोनों साथ-साथ चल सकतें हैं?
अर्थपूर्णता…सार्थकता के खोज में अतीत, वर्तमान और भविष्य शामिल होतें हैं।
इसके लिये सही-गलत सीखना पङता है
खुशियों के लिये कोई समय, सही-गलत, कोई शर्त नही होती।
खुशियाँ अपने अंदर होतौं हैं, किसी से मांगनी नहीं पङती है।
सार्थकता जुड़ा है – कर्तव्य, नैतिकता से।
सार्थकता और अर्थ खोजने में कभी-कभी खुशियाँ पीछे छूट जाती है।
पर जीवन से संतुष्टि के लिये दोनों जरुरी हैं।
जब भी कहीं डेरा डालना चाहा.
रुकना चाहा.
ज़िंदगी आ कर कानों में धीरे से कह गई-
यह भी बस एक पड़ाव है…
ठहराव है जीवन यात्रा का.
अभी आगे बढ़ना है,
चलते जाना है. बस चलते जाना है.
image courtesy – Aneesh
जीवन है इसलिए परेशनियाँ हैं.
जीवन का अर्थ है सीखना अौर आगे बढ़ना ।
हम सजीव हैं, इसलिए चुनौतियाँ हैं.
बदलते रहते जीवन की चुनौती है हर पल में हौसला बनाये रखना।
हम हैं, क्योंकि अपनों ने हमें ऐसा बनाया.
अतः जीवन सार है अौरों की मदद करना।
दुःख है, इसलिए ख़ुशियों का मोल है.
जीवन का रहस्य है खुश रहना।
प्यार है इसलिए जीवन का अस्तित्व है.
अतः जीवन का सौंदर्य प्रेम है।
दो विचार, दो अलग युग में जिसके अर्थ समान हैं। Two thoughts of two different eras with similar meaning.
– Shams Tabriz ( Rumi’s spiritual Instructor)
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