साँसें #NOOXYGEN

थके राही को चंद साँसों के लिए,

लड़ते झगड़ते देखा!

पर अधूरी ख़्वाब बन कर रह गई ज़िंदगी!

बस रह गईं कुछ सिसकियाँ

और चंद कतरे आँसू के!

 

 

 

मुस्कुरा लो ज़रा !

Smile and laughter releases happy hormone Endorphins.
When we smile, brain releases tiny molecules called neuropeptides to help fight off stress. Then other neurotransmitters like dopamine, serotonin and endorphins come into play too. The endorphins act as a mild pain reliever, whereas the serotonin is an antidepressant.

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हँसो ना हँसो ! मुस्कुराओ या ना मुस्कुराओ!

ज़िंदगी यूँ हीं अपनी राहों पर चलती रहती है!

ऊपर-नीचे राहों पर गुजरती रहती है।

फिर क्यों ना थोड़ा मुस्कुरा कर जिया जाए।

चेहरे की मायूसी से कुछ नहीं मिलता।

पर मुस्कुराहटें बहुत कुछ दे जाती हैं।

इसलिए हँसो और मुस्कुराओ,

सिर्फ़ चेहरे से नहीं, सिर्फ़ आँखो से नहीं।

अपने पूरे वजूद से मुस्कुराओ।

मालूम नहीं इस छोटी सी ज़िंदगी के किस पल में

ज़िंदगी की शाम हो जाए।

इसलिए जीवन में मुस्कुराहटें बाँटते चलो ।

 

मुस्कुराहट अौर हंसी से हैप्पी हार्मोन एंडोर्फिन स्त्राव होता है – जब हम मुस्कुराते हैं, तब हमारा  मस्तिष्क तनाव को दूर करने में मदद करता है। इस के लिए वह  न्यूरोप्रेप्टाइड्स नामक छोटे अणु छोड़ता है। जिस से हैप्पी हार्मोन डोपामाइन, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे  न्यूरोट्रांसमीटरों का स्त्राव होने लगता हैं। एंडोर्फिन एक हल्के दर्द निवारक के रूप में  भी काम  करता है अौर सेरोटोनिन एक एंटीडिप्रेसेंट भी है। 

Happy World Laughter Day- 2 May, 2021

मई महीने के पहले रविवार को इस का आयोजन होता है। तनाव को कम करने के लिए वर्ल्ड लॉफ्टर डे की शुरुआत भारत में हुई। लॉफ्टर योग आंदोलन के संस्थापक डॉ. मदन कटारिया ने 11 जनवरी 1998 में मुंबई में पहली बार वर्ल्ड लॉफ्टर डे मनाया था।

I smile like a flower not only with
my lips but with my whole being.

Laughter Day was first celebrated on May 10, 1998, in Mumbai, India by Dr Madan Kataria, who is also the founder of the worldwide Laughter Yoga movement. World Laughter Day is celebrated On first Sunday each year in May to highlight the importance of laughter in our lives.

ज़िंदगी की किताब !!

ज़िंदगी के किताब को ना अपनी मर्ज़ी से बंद कर सकते हैं

ना आगे के सफ़ेद पन्नों को पढ़ सकते हैं।

सिर्फ़ आज़ के पन्नों से कभी कभी दिल भर जाता है!

और जाने- अनजाने अक्सर पुराने पन्ने पलट जातें हैं।

वहाँ होते हो तुम!

अज़ीज़ हो तुम,

पर नाराज़ है हम।

 बिना कहे तुम्हारे जाने से।

इंडेक्स

ग्लोबल हंगर इंडेक्स,

 ह्मुमन कैपिटल इंडेक्स,

वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट,

मानव विकास सूचकांक,

प्रेस फ्रीडम इंडेक्स,

ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट,

और ऐसे ही ना जाने कितने ग्लोबल इंडेक्सों में

हम पीछे हैं,

काफ़ी नीचे हैं।

पर कोरोना में तो शीर्ष पर हैं।

और सैन्य खर्च में आगे हैं!

जो स्थिति है आज,

उसमें क्या यह गम्भीर सवाल नहीं कि वरीयता किसे?

किस बात को दी जाए?

नासमझी की इंतहा !

कहाँ जा रहें हैं हम सब? क्या जितने डाक्टर और नर्सें कोरोंना की बलि चढ़ रहे हैं, उतने फिर से तैयार हो सके है? अपना जीवन दाव पर लगा जीवन देने वालों का यह हश्र? उनकी भूलों को खोज रहे सब, अपनी ग़लतियाँ भूल कर। क्यों कोरोना फैला इस कदर? खोज़ सको तो खोज लो।

हवा पानी

 

 

 

जब सुना था पानी बिकेगा बोतलों में।

सोंचा था कौन ख़रीदेगा ?

प्यास बुझाता दरिया का पानी,

 सांसे महकाती दरख़्तों से गुजरती हवा,

आज  बिक रहे हैं  करोड़ों-अरबों में।

पानी आज शर्म से पानी पानी है।

खामोशी में डूबे बयार की अब शर्माने की बारी है।

  बोतल में बंद हवा-पानी प्राण दायिनी बन गई है।

इनके गुलाम रूह अब आजादी पाएंगे कैसे?

 

शुभ रामनवमी !! कौन है राम ?

Rama Navami is a spring Hindu festival that celebrates the birthday of the Hindu God Lord Rama. He is particularly important to the Vaishnavism tradition of Hinduism, as the seventh avatar of God Vishnu.

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आज राम नवमी के पावन अवसर पर  आप सभी को रामनवमी की बधाई  अौर शुभकामनायेँ । साथ हीं इस पुस्तक के बारे में चंद पंक्तियां लिखना चाहती हूं। कौन है राम ? इस पुस्तक के लेखक राम भक्त आशीष कुमार है। इस सुंदर पुस्तक के लिए वे साधुवाद के हकदार हैं। इस पुस्तक में भगवान राम के जीवन के हर पक्ष के बारे में खूबसूरती से लिखा गया है। जिसे पढ़ने के दौरान जाने अनजाने अनेकों बार राम का नाम जप होता रहता है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, विष्णु अवतार मर्यादा पुरुर्षोत्तम भगवान राम का जन्म त्रेतायुग में चैत्र मास में शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अयोध्या में हुआ था। मर्यादा पुरुषोत्तम राम हमारे भारतीय संस्कृति के मानस में से रचे-बसे हैं। कहते हैं राम का मात्र नाम ले लेने से राम, हनुमान और महादेव खुश हो जाते हैं। 15 वीं सदी के महान रहस्यवादी कवि कबीर ने भी कहा है

एक राम दशरथ का बेटा,

एक राम घट घट में बैठा,

एक राम का सकल उजियारा,

एक राम जगत से न्यारा”।।

प्रभु श्रीराम के जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं !!!!

 

तांडव #Covid19

कहते हैं जीवन के अंतिम सत्य का एहसास श्मशान में होता है।
सचमुच यह सत्य महसूस हुआ बाँस घाट श्मशान के पास से गुजरते हुऐ,
अौर काशी में मणिकर्णिका घाट की अविराम जलतीं चितायें देख कर।
मोक्ष की आकांक्षा से खिंचे चले आते हैं लोग काशी।
अौर  चिता की अग्नि धधकती रहती है इस महाश्मशान में।
एक चिता की अग्नि बुझे ना बुझे
धधक उठतीं हैं दूसरी चिता की लाल-पीली लपटें ।
 
आज रोज़ मिल रहीं हैं किसी ना किसी के निर्वाण की दुखद खबरें। 
 बन गईं हैं सारी श्मशानें, महाश्मशान, ….
…निरंतर जलती,  हवा में अजीब गंध बिखेरती।
थके व्यथित  परिजन अस्पताल, ईलाज़, ऑक्सीजन , दवा की लाइनों 
के बाद पंक्ति बना रहें गुजरे स्वजनों  के  अंतशय्या के लिये मसानों में।
 बिजली और गैस शव दाह गृह, क्रेमाटोरियम 
की दीवारें, भट्टियां, लोहे गल रहे अनवरत जलती अपनी हीं आग में ।
क्या यह संहारक शिव का तांडव है?
या जल रहें हैं हम सब मानव,  
मानवता अौर नैतिकता भूल अपनी हीं गलतियों के आग में?