गगन से झुक कर पूछा चाँद ने
क्यों आँसू बहा रहे हो?
सामना करो कठिनाईयों का
किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे अश्रुयों की ।
लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।
क्योकिं
जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं
वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।
गगन से झुक कर पूछा चाँद ने
क्यों आँसू बहा रहे हो?
सामना करो कठिनाईयों का
किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे अश्रुयों की ।
लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।
क्योकिं
जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं
वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।
जबान चुप थी पर आँखोँ हीं आँखों में बातें हुईं –
तङपते पतंगे ने कहा – मैंने जला दिया अपने-आप को,
जान दे दी
तेरी खातिर।
अश्क बहाती मोमबत्ती ने
कहा मैं ने भी तो तुम्हें
अपने दिल
अपनी लौ को चुमने की इजाजत दी।
कोई तो है
मेरे अंदर।
जो
मुझे संभाले हुए।
बेकरारी सी है
फिर भी
बरकरार हूँ।
NEWS 12 oct 2017 – Body of newborn girl found in hospital toilet.
The patient informed hospital authorities, who alerted the police. Soon, a team from the Bundgarden police station reached the spot. Later, the newborn’s body was sent for post-mortem.
पाषण युग से आज तक की
लम्बी प्रगति यात्रा
पूरी करने में ना जाने कितनी सादियाँ लगी.
पर कुछ क्रुर पाषाण हृदय वाले
पल भर में वापस वहीँ कैसे लौट जाते है ?
उनकी तुलना पशुओं से भी नहीँ कर सकते
क्योंकि वे भी ऐसा जघन्य कुकर्म नहीँ करते .
Failure in life
does not matter;
the greatest misfortune
is standing still.
Hazrat Inayat Khan
मुट्ठी में दबे,
मसले – कुचले गुलाबों
की खुशबू फ़िजा में तैर गई।
हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क
से भर गईं
क्या हम ऐसे बन सकते हैं?
मर्म पर लगी चोट
पीङा नहीं सुगंध दे ???
कभी लगता है हम शब्दों से परे हैं।
हम मौन में जीते हैं।
पर फिर लगता है,
कुछ कानों तक
हवा में घुली चीखें भी नहीं पँहुचती
फिर मौन की आवाज़
सुनने का अवकाश किसे है????
हमारे अंदर भी क्या बदलते मौसम हैं ?
क्या कभी बसंत अौर कभी पतझङ होते हैं ?
कभी कभी सुनाई देती है गिरते पत्तों की उदास सरसराहट
या शरद की हिम शीतल खामोशियाँ
अौर कभी बसंत के खिलते फूलों की खुशबू….
ऋतुअों अौर मन का यह रहस्य
बङा अबूझ है………
यादें हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं………
ये खजाने हैं बीते पलों के
पर कुछ रुला भी जातीं हैं।
पर यह भी एहसास दिला जातीं हैं……
तितलियों के रूपांतरण (metamorphosis)
जैसा बदल लो जिंदगी को।
जी लो हर पल को ……….
दिल पर लगी चोट,
आँसू बन कर बह जाते हैं।
सूखी आँखें अौर
वर्षा के बाद के
धुले असमान देख कर क्या लगता है ,
कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?
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