Failure in life
does not matter;
the greatest misfortune
is standing still.
Hazrat Inayat Khan
Failure in life
does not matter;
the greatest misfortune
is standing still.
Hazrat Inayat Khan
मुट्ठी में दबे,
मसले – कुचले गुलाबों
की खुशबू फ़िजा में तैर गई।
हथेलियाँ इत्रे गुलाब अर्क
से भर गईं
क्या हम ऐसे बन सकते हैं?
मर्म पर लगी चोट
पीङा नहीं सुगंध दे ???
कभी लगता है हम शब्दों से परे हैं।
हम मौन में जीते हैं।
पर फिर लगता है,
कुछ कानों तक
हवा में घुली चीखें भी नहीं पँहुचती
फिर मौन की आवाज़
सुनने का अवकाश किसे है????
हमारे अंदर भी क्या बदलते मौसम हैं ?
क्या कभी बसंत अौर कभी पतझङ होते हैं ?
कभी कभी सुनाई देती है गिरते पत्तों की उदास सरसराहट
या शरद की हिम शीतल खामोशियाँ
अौर कभी बसंत के खिलते फूलों की खुशबू….
ऋतुअों अौर मन का यह रहस्य
बङा अबूझ है………
यादें हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं………
ये खजाने हैं बीते पलों के
पर कुछ रुला भी जातीं हैं।
पर यह भी एहसास दिला जातीं हैं……
तितलियों के रूपांतरण (metamorphosis)
जैसा बदल लो जिंदगी को।
जी लो हर पल को ……….
दिल पर लगी चोट,
आँसू बन कर बह जाते हैं।
सूखी आँखें अौर
वर्षा के बाद के
धुले असमान देख कर क्या लगता है ,
कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?
Curvy Cupid smile of your lips
may straighten up many problems of your life……..
होठों पर छाई तीरछी
मुस्कान भरी रेखा
जीवन की ना जाने
कितनी कठिनाइयों – परेशानियों
को सुलझा कर
सीधा कर सकती हैं।
अपने विचारों को
पढ़ने अौर पकङने के जुनून अौर जोश ने
मनन करना सीखा दिया।
मन के विचारों
को पन्नों पर
शब्द जाल बना कर, ऊतारना सीखा दिया।
हम समझते हैं कि
हम सब समझते हैं।
पर ऊपर बैठ,
जो अपनी ऊँगलीं के धागे से
हम सबों को नचा रहा है कठपुतली सा।
उसे हम कैसे भूल जाते हैं?
इस जीवन यात्रा में…..
एक बात तो बङे अच्छे से समझ आ गई,
अपनी लङाई खुद ही लङनी होती है।
इसमें
शायद ही कोई साथ देता है,
क्योंकि
लोग अपनी लङाईयों अौर उलझनों में उलझने होते हैं।
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