नजरे झुकाई, हाथों को जोङा
अौर
झुक गये ऊपर वाले की बंदगी में।
पर दुनिया का गुरुर तो देखो ,
सामने वाले ने
मान लिया अपने को भगवान !
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
नजरे झुकाई, हाथों को जोङा
अौर
झुक गये ऊपर वाले की बंदगी में।
पर दुनिया का गुरुर तो देखो ,
सामने वाले ने
मान लिया अपने को भगवान !
It’s only when caterpillarness is done
that one becomes a butterfly.
That again is part of this paradox.
You cannot rip away caterpillarness.
The whole trip occurs in an unfolding process
of which we have no control.
~~ Ram Dass, Be Here Now
Ram Dass / Richard Alpert;( April 6, 1931, born in a Jewish family) is an American spiritual teacher and author of the book – “Be Here Now” . He traveled IndiaIn in 1967 and visited guru Neem Karoli Baba who gave Alpert the name “Ram Dass”, which means “servant of God”.
शीतल हवा का झोंका बहता चला गया।
पेङो फूलों को सहलाता सभी को गले लगाता ……
हँस कर जंगल के फूलों ने कहा –
वाह !! क्या आजाद….खुशमिजाज….. जिंदगी है तुम्हारी।
पवन ने मुस्कुरा कर कहा –
क्या कभी हमें दरख्तों-ङालों, खिङकियों-दरवाज़ों पर सर पटकते….
गुस्से मे तुफान बनते नहीं देता है?
हम सब एक सा जीवन जीते हैं।
गुस्सा- गुबार, हँसना-रोना , सुख-दुख,आशा-निराशा
यह सब तो हम सब के
रोज़ के जीवन का हिस्सा है!!!
समय की लहरें ना जाने
कहाँ खींच ले जाती हैं?
कभी मन के अंदर होती हैं
लहरों की आवाज़ें अौर मौजें
कभी ख़ामोशी…नीरवता…..
बदलता समय ना जाने कितने रंग दिखाता है।
रंग बदलते, कितने लोग आते जाते हैं।
भीतर लहरों की आवाज़ हीं
प्रेम अौर प्रकाश देने वाली बन जाती है।
दिवाली के जलते दियों को
देख कर समझ आया
जलना कितना मुश्किल होता है।
लेकिन दीप की तरह जलनेवाले
रौशनी बिखेर सकते हैं।
यह भी समझ आया।
चेहरा क्या है?
ईश्वर प्रदत उपहार….
हमारे उम्र अौर विचारों की छाया।
पर ये लफ्ज , ये बोली,
सच्चाई का आईना है
गगन से झुक कर पूछा चाँद ने
क्यों आँसू बहा रहे हो?
सामना करो कठिनाईयों का
किसी को फिक्र नहीं तुम्हारे अश्रुयों की ।
लोग इन पर कदम रखते गुजर जायेंगें।
क्योकिं
जिन पर तुम्हारे कदम पङे हैं
वे अोस नहीं मेरे अश्क हैं।
जबान चुप थी पर आँखोँ हीं आँखों में बातें हुईं –
तङपते पतंगे ने कहा – मैंने जला दिया अपने-आप को,
जान दे दी
तेरी खातिर।
अश्क बहाती मोमबत्ती ने
कहा मैं ने भी तो तुम्हें
अपने दिल
अपनी लौ को चुमने की इजाजत दी।
कोई तो है
मेरे अंदर।
जो
मुझे संभाले हुए।
बेकरारी सी है
फिर भी
बरकरार हूँ।
NEWS 12 oct 2017 – Body of newborn girl found in hospital toilet.
The patient informed hospital authorities, who alerted the police. Soon, a team from the Bundgarden police station reached the spot. Later, the newborn’s body was sent for post-mortem.
पाषण युग से आज तक की
लम्बी प्रगति यात्रा
पूरी करने में ना जाने कितनी सादियाँ लगी.
पर कुछ क्रुर पाषाण हृदय वाले
पल भर में वापस वहीँ कैसे लौट जाते है ?
उनकी तुलना पशुओं से भी नहीँ कर सकते
क्योंकि वे भी ऐसा जघन्य कुकर्म नहीँ करते .
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