हम गलते-पीघलते नहीं ,
इसलिये
पत्थर या पाषण कहते हो,
पर खास बात हैं कि
हम पल-पल बदलते नहीं।
अौर तो अौर, हम से
लगी ठोकरें क्या
तुम्हें कम सबक सिखाती हैं??
हम गलते-पीघलते नहीं ,
इसलिये
पत्थर या पाषण कहते हो,
पर खास बात हैं कि
हम पल-पल बदलते नहीं।
अौर तो अौर, हम से
लगी ठोकरें क्या
तुम्हें कम सबक सिखाती हैं??
आईना भी इस नासमझी पर
खुद से माफी नहीं मागँने देता।
कि खुद को दर्द क्यों पहुँचाना?
जमाना बैठा है इस काम के लिये।
सुनाने वालों की बातें
सुन कर
मौन को बोलने दो।
क्योंकि सही जवाब तो
समय देता है।
सबसे गहरा दर्द तब महसूस होता है,
अपने आप को नकार कर
हर किसी को खुश रखने
की चाहत में हार जाअो।
I have come to drag you,
out of yourself and take you into my heart.
I have come to bring out the beauty you never knew you had,
and lift you like a prayer to the sky…….
Rumi
अहले सुबह जिंदगी आई कुछ मसले व परेशानियाँ ले कर ।
शाम ढले चौखट पर खङी थी मुस्कुराती
अौर पूछ बैठी –
दर्द हुआ क्या?
चोट
लगी क्या?
जवाब दिया –
बिना कसूर के मिली सजा,
दर्द तो बङा देती है
पर, तुझसे क्या शिकायत ऐ जिंदगी ???
तु तो रंग दिखा रही है…..
सबक अौ तजुर्बे सीखा रही है।
जिंदगी ने बहुत से दर्द भरे सबक दिये,
उन्हें पन्नों पर उतारते-उतारते ,
फिर से……………
इश्क हो गया जिंदगी, कलम अौर कागज से
आप इन्हें जो चाहे कहें,
जिंदगी के रंग, जिंदगी के फलसफे, तजुर्बे या कविता……….
किसी ने ग़ालिब से पूछा – …..”कैसे हो?” ग़ालिब ने हँस कर कहा –
जिंदगी में ग़म है……
ग़म में दर्द है………….
दर्द में मज़ा है ………
अौर मज़े में हम हैं।
कुछ हँस कर, कुछ रो कर झेलते हैं।
दुःख सहने का अपना- अपना तरीका होता है।
क्या अच्छा हो, गर आँखों में आँसू पर होंठों पर मुस्कान हो।
Image from internet.
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