हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर मौन के बीच रहते हैं
हमारे अपने विचारों से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।
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हम अपने बोले शब्दों के गूजं अौर मौन के बीच रहते हैं
हमारे अपने विचारों से बनता है हमारी जिंदगी का आशियाना।
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Gaslighting is a form of manipulation that seeks to sow seeds of doubt in a targeted individual or members of a group, hoping to make targets question their own memory, perception, and sanity.
गैसलाइटिंग प्रभाव क्या है –
यह एक गलत अौर नाकारात्मक व्यवहार है। कुछ लोग दूसरे के दिल अौर दिमाग पर हावी हो कर, उन्हें अपने तरीके से चलाने की कोशिश करते हैं। ऐसे करीबी लोग हीं करते हैं। अगर लोगों के व्यवहार पर गौर करेंगें, तब आप अपने आसपास ऐसे लोगों को आसानी से पहचान सकते हैं। इसका प्रभावित व्यक्ति के व्यक्तित्व पर बुरा असर पङता है।
गैसलाइटिंग, हेराफेरी कर किसी को अपने तरीके से चलाने का तरीका है । ऐसे लोग लक्षित व्यक्ति या किसी समूह के लोगों में मन में संदेह के बीज बोने की कोशिश करतें हैं। लक्ष्य किये गये व्यक्ति की बातों को गलत ठहरने की कोशिश करते रहते हैं। उनके सामने उनकी याददाश्त, धारणा और विवेक पर सवाल उठाते रहते है। उनकी बातों को निरंतर अस्वीकार करना, गलत तरह से उसकी व्याख्या करना, विरोधाभास पैदा करना और झूठा ठहराना सामान्य तरीका हैं। अन्य लोगों के सामने भी उसके बारे में गलत बातें अौर धारणायें देते रहते हैं। ये सब बातें उस व्यक्ति को भ्रमित , अस्थिर व परेशान करता है और उसके आत्मविश्वास को तोङता हैं।

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You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.
Swami Vivekananda
जीवन की परिपूर्णता —-
अगर यह लौकिक हो – बुद्ध के राजसी जीवन की तरह,
या संतृप्ति हो , कबीर की आध्यात्मिक आलौकिक जीवन की तरह।
तब मन कुछ अौर खोजने लगता है।
क्या खोजता है यह ?
क्या खींचती है इसे अपनी अोर?
यह खोज…….यह आध्यात्मिक तलाश कहाँ ले जायेगी?
शायद अपने आप को ढूँढ़ने
मैं कौन हूँ??
या
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Wherever you are, and in whatever circumstances, strive to love and to be a lover.
~ Rumi
जीवन रुकता नहीँ
हर पल , हर क्षण नया है
दरिया के बहते पानी की तरह.
जो बह गया वह बीत गया.
वह पानी लौट कर आता नहीँ.
यह जीवन चक्र चलता रहता है.
हर पल कुछ नया ले कर आता है.
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जिंदगी से एक गहरी सबक मिली।
किसी को परेशानियों में,
सलाह जरुर देनी चाहिये।
पर बिन माँगे मदद के लिये,
हाथ भी बढ़ाना देना चाहिये।
इसमें खतरा तो हैं,
पर
ना जाने कौन किस लम्हें में,
किस दौर से गुज़र रहा है?
जाने-अनजाने हीं किसी की दुआ मिल जाये।
Take Risks in Your Life If you Win, U Can Lead! If You Lose, You can Guide!
Swami Vivekanandalife
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कोई मुझ से पूछ बैठा…..
कोई मुझ से पूछ बैठा, बदलना किस को कहते हैं?
सोच में पड़ गया हूँ, मिसाल किस की दूँ मौसम की या अपनों की!!!!!!
Source: कोई मुझ से पूछ बैठा…..
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Don’t ask yourself what the world needs. Ask yourself what makes you come alive and then go do that. Because what the world needs is people who have come alive.
-Howard Thurman
कब क्या लिखती हूँ ,
मुझे भी नहीँ पता.
आजाद छोड़ दिया है
अपने मन और अंतरात्मा को.
यह दुनिया ही खट्टी मीठी झलकियाँ
दिखलाती रहती है.
मै तो बस उन्हें शब्दों का
चोला पहना देती हूँ.

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एक आदत सी थी,
बेफिक्री से गुनगुनाने और मुस्कुराने की।
सुनहरी सुबह और रुपहली शाम की ,
खूबसूरती में ङूब जाने की।
पर ज़माने ने इसमें भी कमियां निकाल दी।
तब ख्याल आया,
अब तो
खूबियों के सिवा कुछ बचा हीं नहीं ।
हाथ जुङ गये इबादत में।
When the world pushes you to your knees, you’re in the perfect position to pray.
~ Rumi
Female weeper / weeping woman / professional mourners – In some part of Rajasthan, India, women (of a specific caste ) are hired as professional mourners . They are know as “rudaali” /female weeper/ weeping woman . Their job is to publicly express grief for family members who are not permitted to display emotion due to social status.
कुछ लोग हँस कर ,
और कुछ हँसा कर
कमाते हैं.
कुछ लोग रो कर (रुदाली )
और कुछ लोगों को रुला कर.
रुलाने वाले क्या जवाब देंगे ?
जब
ऊपर वाला उनसे पूछेगा –
उन्होंने क्या कमाया ?
राजस्थान में कुछ स्थानों पर ऐसी प्रथा हैं. जिसमें सम्पन्न परिवारों में रो कर मातम मानने के लिये रुदाली ( जाति विशेष की महिलायें ) बुलायी जाती हैं.
Source: जिंदगी के रंग -कविता 9
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