जिंदगी के रंग 13 – कविता

 

My heart is so small, it’s almost invisible. How can You place such big sorrows in it? “Look,” He answered, “your eyes are even smaller, yet they behold the world.
~ Rumi

 

हँसने की चाह ने कितना रुलाया है।

अौरो को खुश करने की कोशिश में

अपने -आप को खोया है।

अब अपने-आप को पाना  है।

      सब  खो कर भी…….

क्यों जिंदगी ने हसँने की,

कोशिश में अक्सर  रुलाया है??

 

नाम में क्या रखा है ? What is in a name?

जब, मेरी बेटी छोटी थी। तब मैं उसके साथ अक्सर एक खेल खेला करती थी ।

उसे अलग अलग नाम से बुलाती थी और फिर उससे उसका नाम पूछती थी।

उसे इस खेल में बङा मजा आता था। उसके चेहरे पर बिखरी उसकी खुशी और

खिलखिला कर नए -नए नाम बताने का खेल मुझे बड़ा अच्छा लगता था 

 यह खेल बहुत बार उल्टा भी चलता  था।  यह  मैं अक्सर तब करती थी,

जब मेरे पास बहुत काम होता था। जब मैं बहुत व्यस्त होती थी और वह

मुझे कुछ ना कुछ बोल कर परेशान करती रहती थी। मतलब यह कि  मैं

तब  उसे व्यस्त रखने के लिए  ऐसा करती थी।

 शायद, दुनिया में हर व्यक्ति के लिए  अपना नाम ही सबसे प्यारा शब्द  होता है।

पर  लड़कियों के  नाम शादी के बाद  बदल जाते हैं। लड़कियां अपने नाम या सरनेम के

साथ हीं  जिंदगी क्यों नहीं चला सकती हैं?

Beautiful Bhigwan – A Bird Sanctuary

Bhagwan  is located on the Pune-Solapur Highway(Maharastra) around 105 km from Pune on the backwaters of Ujani dam.  Its famous for migratory birds such as Ducks, Herons, Egrets, Raptors and Waders along with flocks of hundreds of flamingos

 

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Searching for Breakfast  –    Black Headed Ibis,

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     Asian Open Billed Stork  and  Black-winged Stilt in noon.

 

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An evening in  Bhigwan with seagulls…….  lovely  seabirds  

 

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beautiful long tailed, Green Bee Eater

 

 

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Grey Heron ready to take a flight……..

 

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I wish I could fly like a bird  एक आजाद परिंदे की तरह……..

 

 

 

Image courtesy Chandni Sahay

धोखा और फरेब-कविता Deception- poetry

Kerala mangoes arrive early this year – growers expect them to be ready by the second week of March. ( News; indianexpress, Mon, Feb 13, 2017)

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

धोखा और फरेब हमने किस- किस को सिखा दिया है?

प्राकृति को देखकर

 लगता है क्या कभी हम भी ऐसे थे

पवित्र- पावन, सच्चे?

अब तो करवटें बदलते मौसम ने भी

रंग दिखाना शुरु कर दिया  है

समय से पहले  प्रवासी पंछी उड़कर आने जाने लगे हैं

फल – फूल भी मौसम से पहले खिलने फलने लगे हैं

क्या हमसे यह धोखा फरेब मौसम ने भी सीख लिया है?

Image courtesy Chandni  Sahay.

मेरा ब्लॉग -नरेटिवे ट्रांसपोटेशन या परिवहन कल्पना My Blog-Narretive Transportation


Indian Bloggers

About the name of my blog – 

     Narrative transportation theory proposes that when people lose themselves in a story  or write-up,  their attitudes and intentions change to reflect that story.

          According to Psychology this theory can be used to explain the persuasive effect of what    people read. Stories, poetry and write-ups may have a huge influence on  the readers mind .

 मेरे ब्लॉग के नाम के विषय में –

मेरे ब्लॉग का नाम नरेटिवे ट्रांसपोटेशनया परिवहन कल्पना है। यह  नाम कुछ अलग सा है। इसलिए मैं इस बारे में कुछ बातें करना चाहूंगी। कभी-कभी हम किसी रचना को पढ़ कर उसमें डूब जाते हैं। उसमें खो जाते हैं। उस में कुछ अपना सा लगने लगता है।  ऐसी कहानी या गाथा जो आप को अपने साथ बहा ले जाये। हमारा मन  उसमें ङूब जाये  । इस प्रभाव को   कथा परिवहन अनुभव  या  नरेटिवे ट्रांसपोटेशन कहते हैं।  यह एक मनोवैज्ञानिक सिद्धांत है। 

मैं चाहती हूँ कि मेरी रचनाओं को पढ़ने वाले पाठक भी ऐसा महसूस करें। इसमें हीं मेरे लेखनी की सार्थकता है। शब्दों का ऐसा मायाजाल बुनना बहुत कठिन काम है। फिर भी मैं प्रयास करती रहती हूँ। अगर मेरा यह प्रयास थोड़ा भी पसंद आए। तब बताएं जरूर। यह मेरा हौसला बढ़ाएगा।

मौसम के साथ उङते प्रवासी परिंदे- कविता Migratory birds – Poem

Research reveals that global warming is compelling birds into early migration. Migrating birds are arriving at their breeding grounds earlier as global temperatures rise.

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मौसम के साथ उङते रंग- बिरंगे परिंदे,
कुदरत के जादुई रंगों के साथ,

जहाँ का मौसम माकूल – माफिक हो 

वहीं चल देते हैं। 

हमारी तरह बंधनों से बंधे नहीं हैं। 

ये बंधनों से ऊपर, घुमक्कड़  बंजारों से।

थके,-हारे, हजारों मीलों से उङ कर आते हैं।

हम आशियाना  अौर समाज के बंधन से बंधे लोग

इन की प्राकृतिक जीवन को समझे बिना।

नैसर्गिक सृष्टि के नियम से छेङ-छाङ कर,

इन्हें तकलीफ पहुँचाते हैं। 

शब्दार्थ- Word meaning

घुमक्कड़, बंजारा – gypsy

माकूल,  माफिक – suitable

कुदरत,सृष्टि – nature,

सृष्टि – Creation

नैसर्गिक – Natural

प्रवासी – Migratory

Image from internet.

Images courtesy  Chandni Sahay.

विज्ञान की नई खोज- किमेरा भ्रूण(chimera embryos -growing spare human organs in other animals)

Scientists Create First Human-Pig Chimeric Embryos  – Researchers may one day overcome the problem of organ shortages for transplantation by growing spare human organs in other animals. A group led by scientists at the Salk Institute for Biological Studies has taken the first big step toward making this a reality  (on January 26 , 2017 ) in Cell, they report having grown the first human-pig chimeric embryos.

हर साल दुनिया में हजारों लोगों की मृत्यु मानव अंगों की कमी की वजह से होती हैं। लगभग हर दस मिनट में  एक न एक व्यक्ति  अंग प्रत्यारोपण के लिए  प्रतीक्षा सूची में जोड़ा जाता है और हर दिन, उस सूची में 22 लोगों को अंग की जरूरत पूरी नहीं होने से  मर जाते हैं।

कैलिफोर्निया में सॉल्‍क इंस्‍टीट्यूट फोर बायलॉजिकल स्‍टडीज, अमेरिका के वैज्ञानिकों ने  सुअरों के अंदर इंसानी अंग उगाने के प्रयोग कि‍या हैं । 26 जनवरी, २०१७ को   वैज्ञानिकों ने एक उल्लेखनीय घोषणा की ।  वे पहली बार सफल मानव पशु संकर बनाने में सफल हुए हैं। पहला मानव-सुअर संकर भ्रूण प्रयोगशाला में बनाया गया है।  अभी प्रयोग शुरुआती दौर में है। पर वैज्ञानिकों  विश्वास है कि एक दिन प्रयोगशाला में मानव अंग  विकसित  अौर प्रत्यारोपित किये जा सकगें।

इस प्रक्रिया के तहत मरीज के ही शरीर की मूल कोशिकाओं को सूअर  के शरीर में विकसित किया जा सकेगा। एक बार अंगों के विकसित हो जाने पर उसे मरीज के शरीर में ट्रांसप्लांट  किया जा सकता है। ये अंग मरीज की अपनी कोशिकाओं से विकसित होने केी वजह से शरीर द्वारा स्वीकार किए जाने की ज्यादा संभावना रहेगी ।

 

 

 

 

 

Image from internet.

 

 

रेत के कण ( कविता ) #LessonOfLife


Indian Bloggers

क्या रेत के कणों को देख कर क्या

यह समझ आता है कि कभी ये

किसी पर्वत की चोटी पर तने अकडे

महा भीमकाय चट्टान होंगे
या कभी

किसी विशाल चट्टान को देख कर मन

में यह ख्याल आता है कि समय की

मार इसे चूर-चूर कर रेत बना देगी?

नहीं न?

इतना अहंकार भी किस काम का?

तने रहो, खड़े रहो पर विनम्रता से।

क्योंकि यही जीवन चक्र है।

जो कभी शीर्ष पर ले जाता है और

अगले पल धूल-धूसरित कर देता है।

शब्दार्थ- Word meaning

रेत -Sand

कण-Particles

पर्वत की चोटी – the top of the mountain

भीमकाय चट्टान – giant rock

चूर-चूर – Shattered

अहंकार – narcissism , Ego, high-and-mighty

विनम्रता- politeness, humbleness

जीवन चक्र- Life Cycle

शीर्ष – Top

What is the best lesson that life has taught you so far? #LessonOfLife

Source: रेत के कण ( कविता )

जो गिनती में नहीं हैं-कविता

Pune civic polls: At 56, she waits to walk with pride, sporting blue ink on finger
Namira Shaikh, along with 43 other sex workers, will receive their voter identity cards on January 25, National Voters’ Day. ( News -The Indian Express ,PUNENewsLine Tuesday January  24, 2017)


IndiChange - Harnessing the collective power of blogging to fight evil.

उनका क्या जो गिनती में नहीं  हैं,

पुत्री, पत्नी या वधु नहीं मात्र नगरवधु है।

पण्यै: क्रोता स्त्री ( रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी),

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना, नर्तकी कह

शतकों से प्रेयशी – रक्षिता बन ,

मन बहलाती रही।

उस का  प्रवेश निषिद्ध क्यों सभ्य समाज में ?

जीवन-मृत्यु में उसकी गिनती  हीं नहीं।

चलो, उन्हें गिनने का, ऊपर   उठाने का विचार तो आया।

शब्दार्थ – word meaning

वेश्या, गणिका, वारवधू, लोकांगना,रक्षिता,नगरवधू, पण्यै: क्रोता स्त्री- रुपया देकर आत्मतुष्टि के लिए खरीदी गई नारी -Prostitute.

शतकों –  Centuries.

प्रवेश निषिद्ध -No entery.

सभ्य समाज -Civilised society.

Image courtesy – internet.

धुंध- जिंदगी के रंग- 11(कविता) A Tributes -poetry

Etah road accident: School bus collides with truck killing over 20 school kids, dozens injured.( 19th January, 2017)

palash

राह चलते-चलते ,

सामने धुंध छा गया।

धुंधली राह में ङगर खो गया।

हँसते- खिलखिलाते नन्हें-मुन्ने भी

खो गये कोहरे की चादर में।

रह गये बिखरे नन्हें जूते, किताबें, स्कूल बैग…….

जाते हुए शिशिर अौर

आते हुए वसन्त ने पलाशों को खिला दिया।

जैसे ‘जंगल में आग’ लगा दिया।

पर ये फूल से नन्हें-मुन्ने  समय से पहले मुरझा क्यों गये?

आग बनने से पहले, राख में खो गये।

रह गये ‘टेसू के आग’ से टीस दिलों में………

शब्दार्थ- Word meaning

जंगल की आग,टेसू, पलाश – flower known as flame-of-the-forest, bastard teak.

शिशिर -Winter Season

वसन्त – Spring Season

टीस – twinge, suffering, pain, misery, ache.

Images from Internet.