दिवाली अौर मोमबत्ती कविता, Diwali N candle-spiritual poem


Indian Bloggers

अंधेरे में जल उठी छोटी सी  मोमबत्ती,

रोशन कर दिया जहाँ।

सारा अंधकार तिरोहित हो गया।

दिल में ख्याल आया -मोमबत्ती बन जाऊँ।

सभी को राह दिखाँऊ……….

खुशी अौर रौशनी बिखेरूँ ,

                      मोमबत्ती मेरी बात सुन हँस पङी अौर बोली –

क्या अपने दिल को जला  कर आसूँ बहा  सकोगी?

अपने को तपा अौर गला सकोगी?

पवन  के झूमते थपेङों से अपने को बचा सकोगी?

तभी दिवाली होगी।

तभी रौशन होगा यहाँ अौर सारा जहाँ।

image from internet.

आज़ाद परिंदे (कविता )

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बनाने वाले ने सब को

आज़ाद बनाया.

बाँध लिया हमने अपने को

रिश्ते नाते,  अपने-पराये, धर्म देश  की  सीमा …..

जैसे  बंधनों  में.

हमसे तो अच्छे

ये आज़ाद परिंदे हैं.

life- poetry जिंदगी -कविता

The philosophy of life and sea waves are similar.

They return , whatever is give  to them.

जिंदगी अौर सागर की लहरें

एक सी लगती हैं। 

जो दो
कभी ना कभी वापस
लौटाती हैं जरुर।

जिंदगी अौर सागर का फ़लसफा

शायद एक है।

coco