खुद को ना खोने देना
अौरों को खुश करने की कोशिश में।
अपने को पाना
लोगों को खोने से अच्छा है।
खुद को ना खोने देना
अौरों को खुश करने की कोशिश में।
अपने को पाना
लोगों को खोने से अच्छा है।
जिंदगी थी खुली किताब,
हवा के झोकों से फङफङाती ।
आज खोजने पर भी खो गये
पन्ने वापस नहीं मिलते।
शायद इसलिये लोग कहते थे-
लिफाफे में बंद कर लो अपनी तमाम जिन्दगी,
खुली किताबों के अक्सर पन्नें उड़ जाया करते है ।
बरसात की हलकी फुहार
के बाद सात रंगों की
खूबसूरती बिखेरता इंद्रधनुष निकल आया।
बादलों के पीछे से सूरज की किरणें झाँकतीं
कुछ खोजे लगी….. बोली….
खोज रहीं हूँ – कहाँ से इंद्रधनुष निकला है ?
इंद्रधनुष की सतरंगी आभा खिलखिला कर हँसी अौर
कह उठी – तुम अौर हम एक हीं हैं,
बस जीवन रुपी वर्षा की बुँदों से गुजरने से
मेरे अंदर छुपे सातों रंग दमकने लगे हैं।
आसमान के बादलों से पूछा –
कैसे तुम मृदू- मीठे हो..
जन्म ले नमकीन सागर से?
रूई के फाहे सा उङता बादल,
मेरे गालों को सहलाता उङ चला गगन की अोर
अौर हँस कर बोला – बङा सरल है यह तो।
बस समुद्र के खारे नमक को मैंने लिया हीं नहीं अपने साथ।
ज़िन्दगी बहते झरने जैसा ले चली अपने संग
हमने कहा हमें अपनी राह ना चलाओ.
हम तुम्हें अपने राह ले चलते है…..
हमें जीना है अपनी ज़िंदगी – अपनी राहों पर
ना कि किसी अौर के बनाये राह पर ….
तेज हवा में झोंके में झूमते ताजे खिले गुलाब
की पंखुड़ियॉं झड़ झड़ कर बिखरते देख पूछा –
नाराज नहीँ हो निर्दयी हवा के झोंके से ?
फूल ने कहा यह तो काल चक्र हैँ
आना – जाना, खिलना – बिखरना
नियंता …ईश्वर…. के हाथों में हैँ
ना की इस अल्हड़ नादान हवा के झोंके के वश में
फ़िर इससे कैसी नाराजगी ? ?
हमारे अंदर भी क्या बदलते मौसम हैं ?
क्या कभी बसंत अौर कभी पतझङ होते हैं ?
कभी कभी सुनाई देती है गिरते पत्तों की उदास सरसराहट
या शरद की हिम शीतल खामोशियाँ
अौर कभी बसंत के खिलते फूलों की खुशबू….
ऋतुअों अौर मन का यह रहस्य
बङा अबूझ है………
यादें हँसाती हैं, गुदगुदाती हैं………
ये खजाने हैं बीते पलों के
पर कुछ रुला भी जातीं हैं।
पर यह भी एहसास दिला जातीं हैं……
तितलियों के रूपांतरण (metamorphosis)
जैसा बदल लो जिंदगी को।
जी लो हर पल को ……….
दिल पर लगी चोट,
आँसू बन कर बह जाते हैं।
सूखी आँखें अौर
वर्षा के बाद के
धुले असमान देख कर क्या लगता है ,
कभी इतनी तेज़ आँधी आई थी?
कालरात्रि सा सघन अँधेरा ,
आता है जीवन में हर रोज़ .
पर
आकाश के एक एक कर
बूझते सितारे,
करते है सूरज
औ भोर की
किरणों का आगाज …..
बस याद रखना है –
हर रात की होती है
सुहानी भोर !!!
You must be logged in to post a comment.