काश कुछ लोगों से जिन्दगी की होड़ में इतनी जफ़ा ना होती,
काश उनमे अक्स सी सच्चाई और परछांई सी वफ़ा भी होती |
Courtsy blogger –
William Wordsworth was spot on when he said “Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in tranquility.” When my pen meets the paper, it always captures the many moods and their wild swings and emotions and their detours which overflows from my heart spontaneously into the paper transmogrifying into verses!!
काश कुछ लोगों से जिन्दगी की होड़ में इतनी जफ़ा ना होती,
काश उनमे अक्स सी सच्चाई और परछांई सी वफ़ा भी होती |
Courtsy blogger –
अक्स या परछांई बन कर रह जाने से अच्छा है,
मन की शांती खोये बिना, अपनी पहचान बनाये रखना।
Accept your dear ones , as they are !!!!
आज कहीं कुछ पढ़ते हुए,
बरसों पुरानी अपनी ही बोली कुछ पंक्तियां याद आ गई –
मेरी तुलना ना करो कोई…….
जैसी हूँ बस मैं ऐसी ही हूँ !!!!!
मुझे कविता से कहानी बनाने
या
सुबह के सूरज के बदले, दिन का दमकता सूरज बनने ना कहो।
जैसी हूं वैसे ही रहने दो।
इतने सालों बाद अपनी ही बातों
की गहराई अब समझ आती है …..
मन अौर दिल पर लगे,
हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर
ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..
जीवन के सभी सबक, पीड़ा अौर आघात
वे तमगे अौर पदक हैं,
जिन्हों ने जीना सिखाया।
I stare at the sky at night…….. destiny has taken away my brightest star, and it’s you my dad. Wish you Best birthday!
लाखों शब्दों में भी कुछ अनुभव
एक तस्वीर नहीं बना सकती।
जैसे उन्मुक्त आकाश का ….
पूरा का पूरा चित्रण नहीं होता।
स्मृति, यादें ….धरोहर रह गईं।
शेष हुई वह ज्योति, शेष हुआ वह शंखनाद….
आज शब्दों मे बाँधे बिना नमन है !!!!
जिंदगी के हसीन पलों को
कितनी भी बार कहो – थम जा !!
पर यह कब रुकता है?
पर दर्द भरे पलों का
बुलाअो या ना बुलाअो,
लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………
पता नहीं समय का खेल है या मन का?
पर इतना तो तय है –
वक्त बदलता रहता है………….
यह काल चक्र चलता रहता है।
जैसा भी समय हो, बीत हीं जाता है ……….
Go slow my mind,
everything happens at its own pace.
The gardener may water with a hundred pots,
but the fruit will appear only in its season.
❤ Kabir
खामोशी में शब्द
मौन में अर्थ
अंधेरे में उजाला
कोलाहल में शांती
शोर में संगीत
दुख में सुख
आँसू में मुस्कान
इंद्रधनुष के सात रंगों में सफेद रंग
भीङ में तन्हाई
मौत में जीवन
खोजना
क्या सरल है ?
इतनी गहराई आ जाये……
तब जिंदगी से शिकवा हीं ना रह जाये…….
यह सच है
अँधेरे में अपनी परछाईं भी साथ छोङ जाती है,
पर कुछ अपनों की पहचान हो जाती है।
अौर
कुछ अपने बनने वालों की सच्चाई सामने आ जाती है।
बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,
कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले
बस कुछ पल के लिये हैं।
जिंदगी की तरह……
बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..
जी लो जी भर के।
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