अक्स सी सच्चाई

 

 

काश कुछ लोगों से जिन्दगी की होड़ में इतनी जफ़ा ना होती,

काश उनमे अक्स सी सच्चाई और परछांई सी वफ़ा भी होती |

 

Courtsy blogger –

TrueWonderer

वज़ूद

अक्स  या परछांई बन कर रह जाने से अच्छा है,

मन की शांती खोये बिना, अपनी पहचान बनाये रखना।

 

तुलना

Accept your dear ones , as they are !!!!

आज कहीं कुछ पढ़ते हुए,

बरसों पुरानी अपनी ही बोली कुछ पंक्तियां याद आ गई  –

मेरी तुलना ना करो कोई…….

जैसी  हूँ बस मैं ऐसी ही हूँ !!!!!

मुझे  कविता से कहानी बनाने 

या 

 सुबह के सूरज के बदले, दिन का दमकता सूरज बनने ना कहो।

जैसी हूं वैसे ही रहने दो।

 इतने सालों बाद अपनी ही बातों 

        की गहराई अब समझ आती है …..

चोट के निशान Scars

मन अौर दिल पर लगे,

हर चोट के निशान ने मुस्कुरा कर

ऊपरवाले को शुक्रिया कहा…..

जीवन के सभी सबक, पीड़ा  अौर आघात 

वे तमगे अौर पदक हैं,

जिन्हों ने जीना सिखाया।

नमन !!

I stare at the sky at night…….. destiny has  taken away my brightest star, and it’s you my dad.    Wish you Best birthday!

लाखों शब्दों में भी कुछ अनुभव

एक तस्वीर नहीं बना सकती।

जैसे उन्मुक्त आकाश  का  ….

पूरा का पूरा चित्रण  नहीं होता।

स्मृति, यादें ….धरोहर रह गईं।

शेष हुई वह ज्योति, शेष हुआ  वह शंखनाद….

आज शब्दों मे बाँधे बिना नमन है !!!!

 

काल चक्र

जिंदगी के हसीन  पलों को

कितनी  भी बार कहो – थम जा !!

पर यह कब रुकता है?

पर दर्द भरे पलों का

बुलाअो या ना बुलाअो,

लगता है यह खिंचता हीं चला जा रहा है………

पता नहीं समय का खेल है या मन का?

पर इतना तो तय है –

वक्त बदलता रहता है………….

यह काल चक्र चलता रहता है।

जैसा भी समय हो,    बीत हीं जाता है ……….

 

 

 

My mind

Go slow my mind,

everything happens at its own pace.

The gardener may water with a hundred pots,

but the fruit will appear only in its season.

 

❤ Kabir

जीवन के रंग 28 – भीङ में तन्हाई

खामोशी में शब्द

मौन में अर्थ

अंधेरे में उजाला

कोलाहल में शांती

शोर में संगीत

दुख में सुख

आँसू में मुस्कान

इंद्रधनुष के सात रंगों  में सफेद रंग

भीङ में तन्हाई

मौत में जीवन

खोजना

क्या सरल है ?

इतनी गहराई आ जाये……

तब जिंदगी से शिकवा हीं ना रह जाये…….

यह सच है

 

यह सच है 

अँधेरे में अपनी परछाईं भी साथ छोङ जाती है,

पर कुछ अपनों की पहचान हो जाती है।
अौर
कुछ अपने बनने वालों की सच्चाई  सामने आ जाती है।

जिंदगी के रंग – 27

बेचैन लहरें किनारे पर सर पटकती,

कह रहीं हैं – ये सफेद झाग, ये खूबसूरत बुलबुले

बस कुछ पल के लिये हैं।

जिंदगी की तरह……

बीत रहे वक्त अौ लम्हे को…..

जी लो जी भर के।