गुरु

ज़िंदगी में ज़ख़्म

लगते रहेंगे।

उन्हें भूल जाओ

तो कोई बात नहीं।

पर सबक़ ना भूलना।

ग़र भूल गए तो

ज़िंदगी गुरु बन

फिर-फिर सिखाएगी।

4 thoughts on “गुरु

  1. मैं करूँगा
    मेरे घाव
    मेरी चोटें
    मेरी गलती से
    याद रखने के लिए

    मैं अपनी कहानी के साथ
    किसी और पर बोझ मत डालो

    मैं एक साधारण व्यक्ति हूँ
    वो आत्मा
    मुझे पढ़ाएं
    मेरी जवानी के बाद से
    अवलोकन के लिए
    सपने के माध्यम से
    बेहतर के लिए
    कोशिश
    नए दिन को

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