Be quiet.
Find acquaintances with silence.
Go inside,
delve into your heart.
Take a day off from the clamor.
~ Rumi
Image from internet.
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( मान्यता हैं कि वृंदावन , वाराणसी आदि में शरीर त्यागने से मोक्ष के प्राप्त होती हैं. इसलिये प्रायः इन स्थानों पर विधवायें आ कर सात्विक जीवन बसर करती हैं अौर अपने मृत्यु का इंतजार करती हैं। यहाँ इन्हें अनेकों बंधनों के बीच जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं। इस वर्ष (2016) पहली बार होली खेलने के लिये कुछ मंदिरों ने अपने द्वार इन विधवाओं के लिये खोल दिये. )
वृंदावन और कान्हा की मुरली
सब जानते हैं।
वृंदावन की होली
सब जानते हैं।
पर वहाँ कृष्ण को याद करती
सफेदी में लिपटी विधवाओ की टोली
किसने देखी हैं ?
आज़ जब पहली बार
उन्हों ने खेली फूलों की होली।
सफेदी सज गई गुलाबो की लाली से
कहीँ बज उठी कान्हा की मुरली
उनकी उदास साँसो से।

Source: वृंदावन की वृध्द विधवाये ( कविता )
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Some beautiful paths can’t be discovered without getting lost.
कभी-कभी राहों मे,
खो जाना भी अच्छा है,
कुछ सुंदर नये रास्तों को पाने के लिए ।
खोये बिना कुछ पाया नहीं जा सकता।
अपने आप को भी भूल जाना
कभी-कभी अच्छा है
बहुत कुछ नया पाने के लिए।
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सपने तो सपने है
कभी हँसाते , रूलाते , डराते , जगाते,
जाने अनजाने सपने .
फ़िर भी सपने तो सपने है.
पर बेहद अपने है.
हाँ , कभी कभी देर से सही
पूरे होते हुए भी देखा है इन्हे .
क्या आप विश्वास करेंगे ?
कभी किसी ने
अपने मौत की ख़बर और वजह
मुझे सपने में जो बताई
आँसू भरी आँखों से !
कुछ दिनो बाद उसे सच होते सुना……..
(यह मेरे जीवन की एक सच्ची घटना है. बड़ी जद्दोजहद और सोंच विचार के बाद कविता का रुप दे सकी हूँ. )
IndiSpire topic –
Have you ever seen an interesting or strange dream? Have any of such dreams come true? Do you try to figure out the meaning of your dreams?

एक पत्थर ने पूछा शिवलिंग से।
तुम चिकने हो, सलोने हो इसलिए
पूजे जाते हो?
हमें तो ना कोई पूछता है।
ना ही पूजता है।
शिवलिंग ने कहा- मैं भी तुम जैसा ही था।
नोकदार रुखड़ा, पत्थर का टुकड़ा।
पर मैंने अपने को छोड़ दिया
नदी के प्रवाह में, नियंता के सहारे।
दूसरों को चोट देने के बदले चोटें खाईं।
नर्मदा ने मुझे घिस – माँज कर ऐसा बनाया।
क्या तुम अपने को ऐसे को छोड़ सकोगे?
तब तुम भी शिव बन जाओगे, शिवलिंग कहलाओगे।
(ऐसी मान्यता है कि नर्मदा नदी का हर पाषाण शिवलिंग होता है या उनसे स्वाभाविक और उत्तम शिवलिंग बनते हैं। नर्मदा या रेवा नदी हमारे देश की 7 पवित्र नदियों में से एक है। नर्मदा नदी छत्तीसगढ़ में अमरकंटक मैं विंध्याचल गाड़ी श्रृंखला से निकलती है और आगे जाकर अरब सागर में विलीन हो जाती है। अमरकंटक में माता नर्मदा का मंदिर है । यह ऐसी एकमात्र नदी है जिस की परिक्रमा की जाती है यह उलटी दिशा में यानी पूरब से पश्चिम की ओर बहती है । इसे गंगा नदी से भी ज्यादा पवित्र माना जाता है । मान्यता है कि गंगा हर साल स्वयं गंगा दशहरा के दिन नर्मदा नदी के पास प्ले के लिए पहुंचती है ।यह एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है। इस प्राचीन नदी की चर्चा रामायण, महाभारत , पुराणों और कालिदास के साहित्य में भी मिलता है।
हमारा जीवन भी ऐसा हीं है। जीवन के आघात, परेशनियाँ, दुःख-सुख हमें तराशतें हैं, हमें चमक प्रदान करते हैं ।
Life is a journey of self discovery. Describe your journey till now or a part of your journey which brought to closer to a truth about life or closer to your soul and self-discovery. #SelfDiscovery
शब्दार्थ -word meaning
नियंता – ईश्वर, भगवान
प्रवाह – धार, बहाव
नर्मदा – नर्मदा नदी
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Source: शालिग्राम और नर्मदा ( कविता )
क्या भविष्य को संजोने की लालसा
हमारी व्याकुलता अोर चिंता को बढ़ाती है?
नहीं, भविष्य के सपने सजाना
तो मनुष्य होने की
पहचान है।
यह व्यग्रता, उद्वेग तो
स्वंयसिद्ध , सर्वशक्तिमान बन
भविष्य को नियंत्रित करने की कोशिश का परिणाम है…….

सदियाँ अौर युग बीते,
रावण कभी नहीं मरा,
उसने अत्याचार किया, पर परस्त्री को स्पर्श नहीं।
आज के रावण तो नारी अस्मिता के भक्षक हैं।
नहीं लगाते दहेज पर विराम।
पर काली -दुर्गा कहलानेवाली के गर्भयात्रा को हीं रोक देतें हैं……….
क्यों नारी नापी जाती है मात्र रुप-रंग से,
क्यों नहीं योग्यता बौद्धिकता से?
क्यों नहीं यह माप-दंङ पुरुषों पर लागु है?
सुंदरता तो हमारे नयनों में होती है।
यह सब सौंदर्य बोध अौर नियम तो हमने बना लिया है………….
सदियाँ अौर युग बीते,
रावण कभी नहीं मरा,
रावण है, इसलिये राम याद आतें हैं।
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Psychology in religion – Religion is a learned behaviour, which has a strong and positive impact on human personality, if followed properly.
धर्म बचपन से सीखा हुआ व्यवहार है. अपने अराध्य या ईश्वर के सामने अपनी मनोकामनायेँ कहना या अपनी भूल कबुलना, ये हमारे सभी बातेँ व्यवहार को साकारात्मक रुप से प्रभावित करती हैँ. जो मनोविज्ञान का भी उद्देश्य है.
प्रार्थना, उपदेश, आध्यात्मिक वार्ता, ध्यान, भक्ति गीत, भजन आदि सभी गतिविधियाँ धर्म का हिस्सा हैँ. ध्यान देँ तब पायेंगेँ , ये सभी किसी ना किसी रुप मेँ हम पर साकारात्मक असर डालतीँ हैँ. अगर गौर करेँ, तब पयेँगेँ ये सभी व्यवहार किसी ना किसी रुप में मनोवैज्ञानिक
अध्ययनोँ से भी पता चला है – ध्यान, क्षमा, स्वीकृति, आभार, आशा और प्रेम जैसी धार्मिक परंपराएँ हमारे व्यक्तित्व पर प्रभावशाली मनोवैज्ञानिक असर डलता हैं।
clinical reports suggest that rehabilitation services can integrate attention to spirituality in a number of ways.
(“Spirituality and religion in psychiatric rehabilitation and recovery from mental illness”- ROGER D. FALLOT Community Connections, Inc., Washington, DC, USA International Review of Psychiatry (2001), 13, 110–116)
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