होली की शुभकामनाएँ ! Happy Holi !!

बसंत उत्सव रंग और राग का,

फागुन वक्त है फाग का ।

तन रंगो किसी भी रंग।

मन रंग लो केसरिया, राधा-कान्हा संग

और भर लो रूह में रंग-सुगंध।

थोड़ा रंग-अबीर आपके गालों पर और ढेर सा आपकी ज़िंदगी में। ज़िंदगी रंगों और ख़ुशियों से गुलज़ार रहे! होली की हार्दिक शुभकामनाएँ।

वृंदावन की वृध्द विधवायेँ – कविता  Widows of Vrindavan 

( मान्यता हैं कि वृंदावन , वाराणसी आदि में शरीर त्यागने से मोक्ष के प्राप्त होती हैं. इसलिये प्रायः इन स्थानों पर विधवायें आ कर सात्विक जीवन बसर करती हैं अौर अपने मृत्यु का इंतजार करती हैं। यहाँ इन्हें अनेकों बंधनों के बीच जीवन व्यतीत करना पड़ता हैं। इस वर्ष (2016) पहली बार होली खेलने के लिये कुछ मंदिरों ने अपने द्वार इन विधवाओं के लिये खोल दिये. )

वृंदावन और कान्हा की मुरली
सब जानते हैं।
वृंदावन की होली
सब जानते हैं।
पर वहाँ कृष्ण को याद करती
सफेदी में लिपटी विधवाओ की टोली
किसने देखी हैं ?
आज़ जब पहली बार
उन्हों ने खेली फूलों की होली।
सफेदी सज गई गुलाबो की लाली से
कहीँ बज उठी कान्हा की मुरली
उनकी उदास साँसो से।

widows of vrindavan

Source: वृंदावन की वृध्द विधवाये ( कविता )

Images from internet.

Happy Holi

आप सबों के गालों पर मुठ्ठी भर

लाल पीले हरे गुलाबी अबीर-गुलाल.

जो साथ  लाये आप सब के

जीवन में हर रंग की  खुशियाँ !!