प्यार

एक उलझन कम नहीं होती

एक दिन मिली राहों में उलझन बेज़ार, थोड़ी नाराज़ सी।

बोली – बड़े एहसान फ़रामोश हो तुम सब।

मैं ज़िंदगी के सबक़ सिखातीं हूँ

और तुम्हें शिकायतें मुझ से है?

जीना तुम्हें नहीं आता,

एक उलझन कम नहीं होती, दूसरी खड़ी कर देते हो।

हाँ! एक बात और सुनो –

ज़िंदगी है तो उलझने हैं! ना रहेगी ज़िंदगी ना रहेंगीं उलझने।

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मृग तृष्णा

शुभ वसंत पंचमी!

Happy Saraswati Puja!!!

Saraswati is the Hindu goddess of knowledge, music, art, speech, wisdom, and learning. She is a part of the tridevi of Saraswati, along with Lakshmiand Parvati.

अहमियत

अपनी ख़ुद्दारी और

आत्मसम्मान पर नाज़ करो।

झिझक नहीं।

अपने वजूद का सम्मान

ख़ुद हम नहीं करेंगे,

तब दूसरों से इज़्ज़त

पाएँगें कैसे?

अपने अहमियत को

ख़ूबसूरती से सम्भालो

तभी ज़माना अहमियत देगा।

दस्तूर

आना-जाना जीवन

का दस्तूर है।

ग़म ना कर।

मौसम, साल, महीने, दिन…

लोग बदलते रहतें हैं।

रोज़ बदलती दुनिया

में अपने बने रहें।

जिनसे दुख-सुख कह ले,

कभी हँस ले,

कभी रो ले,

यह अपनापा बना रहे।

Happy 31 st December!!!

ज़िंदगी के रंग – 220

घर के छत की ढलाई

के लिए लगे बल्ले, बाँस

और लकड़ियों के तख़्ते ने

बिखरे रेत-सीमेंट को

देख कर कहा –

हम ना हो तो तुम्हें

सहारा दे मकान का

छत कौन बनाएगा?

कुछ दिनों के बाद

मज़बूत बन चुका छत

बिन सहारा तना था।

और ज़मीन पर बिखरे थे

कुछ समय पहले

के अहंकार में डूबे बाँस,

बल्ले और तख़्तियाँ।

ज़िंदगी रोज़ नए रंग दिखाती है ।

कसक

ठंड में बढ़ जाती है,

गुम चोट की कसक।

रातों में बढ़ जाती हैं,

गुम और भूली-बिसरीं

यादों की कसक।

Words worth

Though nothing can

bring back the hour

Of splendor in the grass, of glory in the flower;

We will grieve not, rather find Strength in what remains behind; In the primal sympathy Which having been must ever be…

WORDS WORTH

By William Wordsworth

शीश महल

शीशमहल

कौन खोजता हैं दूसरों में

कमियाँ हीं कमियाँ ?

उसमें अपने आप को

ढूँढने वाले।

यह शीश महल

देखने जैसा है।

जिधर देखो अपना हीं

अक्स और परछाइयाँ

देख ख़ुश हो

लेते है ये लोग।