सुनाने वालों की बातें
सुन कर
मौन को बोलने दो।
क्योंकि सही जवाब तो
समय देता है।
सुनाने वालों की बातें
सुन कर
मौन को बोलने दो।
क्योंकि सही जवाब तो
समय देता है।
जंग अक्सर अपनों अौर करीबियों से लङी जाती हैं
महाभारत की कहानी में सुना था,
यही सच भी है……….
अब जिंदगी के चक्रव्यूह से जाना भी है ।
सफर-ए- जिंदगी ,
कितनी भी
खूबसूरत क्यों ना हो…
अपनी कीमत
कभी ना कभी
वसूल हीं लेती है………
Bhopal – Faces of the children were reportedly stamped by the jail authorities in a bid to distinguish them from the children of the women inmates.
भोपाल सेंट्रल जेल में बंद अपने पिता से मुलाकात करने गए दो बच्चों के चेहरे पर मुहर लगाए गये।
क्या हम मशीन बन गये है ?
और काग़ज़ समझ रखा है ,
इन मासूम नाजुक चेहरों को ?
जो हथेली पर लगने वाले स्टैम्प
इनके गालों पर लगा दिया ?
त्योहार के दिन जेल में अपनों
से मिलने जाने की यह क्रूर सजा क्यों ?
शायद लोगों में मानवता …..बची ही नहीँ
या यह शक्ति – ओहदे का मद है ?
या मजाक करने का पीड़ादायक तरीका ??
क्या उनके बच्चों के साथ
ऐसा किया जाना पसंद आयेगा उन्हे ?
अहले सुबह जिंदगी आई कुछ मसले व परेशानियाँ ले कर ।
शाम ढले चौखट पर खङी थी मुस्कुराती
अौर पूछ बैठी –
दर्द हुआ क्या?
चोट
लगी क्या?
जवाब दिया –
बिना कसूर के मिली सजा,
दर्द तो बङा देती है
पर, तुझसे क्या शिकायत ऐ जिंदगी ???
तु तो रंग दिखा रही है…..
सबक अौ तजुर्बे सीखा रही है।
दिल से निकली बाते ही
अक्सर दिल को छू पाती है.
पुराने लोगों से मिलो ….बाते करो …
तो पुराने दिन याद आते है .
Image from internet.
image from internet.

The river’s ecosystem has left 65 percent of the world’s rivers in danger of losing biodiversity due to various factors. The Sarasvati River is one of the main Rigvedic rivers mentioned in the scripture Rig Veda and ancient Sanskrit texts. Around , 70 per cent of the sites that have been discovered to contain archaeological material dating to this civilization’s period are located on the banks of the now dried out Saraswati river.
पौराणिक कथा के अनुसार सरस्वती नदी शुष्क हो तिरोहित हो गई। इसका गहरा प्रभाव मानव जाति पर पड़ा। वर्तमान सूखी हुई सरस्वती नदी के समानांतर खुदाई में ५५००-४००० वर्ष पुराने शहर मिले हैं जिन में पीलीबंगा, कालीबंगा और लोथल भी हैं। यहाँ कई यज्ञ कुण्डों के अवशेष भी मिले हैं, जो महाभारत में वर्णित तथ्य को प्रमाणित करते हैं।ऋग्वेद के नदी सूक्त के अनुसार यह पौराणिक नदी पंजाब के पर्वतीय भाग से निकलकर कुरुक्षेत्र और राजपूताना से होते हुए प्रयाग या इलाहाबाद आकर यह गंगा तथा यमुना में मिलकर पुण्यतीर्थ त्रिवेणी कहलाती है।
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