मिट्टी में दबे बीज को हीं
मालूम होता है,
शाखों पर खिले फूलों की
क्या कीमत चुकाई है उसने……….
मिट्टी में दबे बीज को हीं
मालूम होता है,
शाखों पर खिले फूलों की
क्या कीमत चुकाई है उसने……….
सुनाने वालों की बातें
सुन कर
मौन को बोलने दो।
क्योंकि सही जवाब तो
समय देता है।
जंग अक्सर अपनों अौर करीबियों से लङी जाती हैं
महाभारत की कहानी में सुना था,
यही सच भी है……….
अब जिंदगी के चक्रव्यूह से जाना भी है ।
सफर-ए- जिंदगी ,
कितनी भी
खूबसूरत क्यों ना हो…
अपनी कीमत
कभी ना कभी
वसूल हीं लेती है………
Bhopal – Faces of the children were reportedly stamped by the jail authorities in a bid to distinguish them from the children of the women inmates.
भोपाल सेंट्रल जेल में बंद अपने पिता से मुलाकात करने गए दो बच्चों के चेहरे पर मुहर लगाए गये।
क्या हम मशीन बन गये है ?
और काग़ज़ समझ रखा है ,
इन मासूम नाजुक चेहरों को ?
जो हथेली पर लगने वाले स्टैम्प
इनके गालों पर लगा दिया ?
त्योहार के दिन जेल में अपनों
से मिलने जाने की यह क्रूर सजा क्यों ?
शायद लोगों में मानवता …..बची ही नहीँ
या यह शक्ति – ओहदे का मद है ?
या मजाक करने का पीड़ादायक तरीका ??
क्या उनके बच्चों के साथ
ऐसा किया जाना पसंद आयेगा उन्हे ?
अहले सुबह जिंदगी आई कुछ मसले व परेशानियाँ ले कर ।
शाम ढले चौखट पर खङी थी मुस्कुराती
अौर पूछ बैठी –
दर्द हुआ क्या?
चोट
लगी क्या?
जवाब दिया –
बिना कसूर के मिली सजा,
दर्द तो बङा देती है
पर, तुझसे क्या शिकायत ऐ जिंदगी ???
तु तो रंग दिखा रही है…..
सबक अौ तजुर्बे सीखा रही है।
दिल से निकली बाते ही
अक्सर दिल को छू पाती है.
पुराने लोगों से मिलो ….बाते करो …
तो पुराने दिन याद आते है .
Image from internet.
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